नालंदा में 3 महीने से वेतन न मिलने पर भड़के शिक्षक, संघ की बैठक में आंदोलन की रणनीति तैयार

Nalanda News: नालंदा जिला प्रारंभिक शिक्षक संघ की बैठक प्राथमिक विद्यालय खरजम्मा में जिलाध्यक्ष सूर्यकांत सिंह की अध्यक्षता में संपन्न हुई. बैठक में तीन महीने से जीओबी मद और दो महीने से एसएसए मद के वेतन भुगतान न होने पर आक्रोश जताया गया. संघ ने दिव्यांग शिक्षकों का परिवहन भत्ता बंद होने पर आरटीआई (RTI) के जरिए जवाब मांगने और नए डीईओ (DEO) की सुस्त कार्यशैली के खिलाफ रणनीति बनाई. संघ ने चेतावनी दी है कि यदि शिक्षा मंत्री से वार्ता के बाद भी वेतन व भत्ते की समस्या नहीं सुलझी, तो शिक्षक आंदोलन की राह अख्तियार करेंगे.

Nalanda News (अमर वर्मा): नालंदा जिले के प्रारंभिक शिक्षकों के वेतन भुगतान में हो रही अत्यधिक देरी और प्रशासनिक उदासीनता को लेकर शिक्षकों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है. रविवार को बिहार पंचायत-नगर प्रारंभिक शिक्षक संघ (नालंदा) की जिला एवं प्रखंड कार्यकारिणी की एक महत्वपूर्ण संयुक्त बैठक बिहारशरीफ प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय खरजम्मा में आयोजित की गई. बैठक की अध्यक्षता संघ के जिलाध्यक्ष सूर्यकांत सिंह ने की. इस उच्चस्तरीय बैठक में जिला व प्रखंड स्तर के दर्जनों शिक्षक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, जहां शिक्षकों के लंबित वेतन, दिव्यांग भत्ते की कटौती और विभागीय शिथिलता जैसे गंभीर मुद्दों पर संगठनात्मक रणनीति तैयार की गई.

तीन महीने से बिना वेतन के काम कर रहे हैं जीओबी मद के शिक्षक, एसएसए की स्थिति भी बदतर

बैठक को संबोधित करते हुए विभिन्न वक्ताओं ने शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर तीखा हमला बोला. संघ के पदाधिकारियों ने वित्तीय संकट साझा करते हुए बताया कि:

  • एसएसए मद (SSA): सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए) मद से जुड़े शिक्षकों को दो महीने की लंबी अवधि बीत जाने के बाद भी विभाग द्वारा महज एक महीने का ही आंशिक वेतन भुगतान किया गया है.
  • जीओबी मद (GOB): वहीं दूसरी ओर, राजकीय मद (जीओबी) के तहत कार्यरत शिक्षकों की स्थिति और भी दयनीय है, जिन्हें पिछले तीन महीनों से एक रुपये का भी वेतन भुगतान नहीं हुआ है.

संघ ने दो टूक कहा कि भीषण गर्मी के इस मौसम में बिना वेतन के शिक्षकों के सामने भुखमरी की स्थिति आ गई है. ऐसे माहौल में विभाग द्वारा शिक्षकों से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा (Quality Education) की अपेक्षा करना पूरी तरह बेमानी और अनुचित है.

बिना बताए बंद हुआ दिव्यांग शिक्षकों का परिवहन भत्ता, आरटीआई (RTI) से मांगा जाएगा जवाब

बैठक के दौरान जिले के दिव्यांग शिक्षकों को मिलने वाले परिवहन भत्ते को बिना किसी पूर्व आधिकारिक सूचना या लिखित आदेश के अचानक बंद किए जाने पर गहरी चिंता और रोष व्यक्त किया गया. संघ ने इस मनमाने फैसले के खिलाफ कानूनी मोर्चा खोलने का निर्णय लिया है. रणनीति के तहत संबंधित पीड़ित शिक्षक अब सूचना के अधिकार (RTI Act) के माध्यम से शिक्षा विभाग से इस भत्ते को बंद करने का वैधानिक कारण और लिखित स्पष्टीकरण मांगेंगे.

टीईटी बाध्यता और प्रोन्नति पर न्यायालय के फैसले का इंतजार, चल रहा है सदस्यता अभियान

सांगठनिक व विधिक प्रगति:

TET परीक्षा की बाध्यता: टीईटी (TET) परीक्षा की बाध्यता को लेकर संघ के पदाधिकारियों ने शिक्षकों को आश्वस्त किया कि वर्तमान में किसी भी शिक्षक को घबराने या मानसिक तनाव लेने की आवश्यकता नहीं है. इस संवेदनशील मामले में माननीय न्यायालय का स्पष्ट निर्णय आ चुका है और अब बिहार सरकार विधिक (कानूनी) सलाह लेकर आगे का सकारात्मक रास्ता तय करेगी.

प्रोन्नति (Promotion): शिक्षकों की प्रोन्नति के विषय पर बताया गया कि विभागीय सुस्ती के कारण यह प्रक्रिया बेहद धीमी गति से चल रही है और संगठन सरकार की ओर से नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी होने का इंतजार कर रहा है.

सदस्यता अभियान: सांगठनिक मजबूती को लेकर समीक्षा में बताया गया कि वर्तमान में बिहारशरीफ, नूरसराय, अस्थावां, चंडी, बिंद एवं कतरीसराय प्रखंडों में सदस्यता अभियान तेजी से चल रहा है, जिसे जल्द ही जिले के शेष सभी प्रखंडों में भी डिजिटल मोड में लॉन्च कर दिया जाएगा.

नए जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) के आने से और सुस्त हुई प्रक्रिया, मंत्री से लगाई जाएगी गुहार

संघ के सदस्यों ने नवपदस्थापित जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) की कार्यशैली पर भी गंभीर आरोप लगाए. शिक्षकों का कहना है कि नए डीईओ के पदभार ग्रहण करने के बाद से जिले में जनशिकायतों और शिक्षकों की फाइलों के निष्पादन की गति पहले से भी अधिक धीमी हो गई है. विभाग की इस सुस्ती को देखते हुए संघ ने निर्णय लिया है कि नालंदा जिले की इन सभी समेकित समस्याओं का एक मांग पत्र तैयार कर इसी महीने होने वाली राज्य स्तरीय बैठक में माननीय शिक्षा मंत्री के समक्ष मजबूती से रखा जाएगा. संघ ने चेतावनी दी है कि यदि वार्ता के बाद भी शिक्षकों के वैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों की पूर्ति समय पर नहीं की गई, तो पूरे सूबे में उग्र आंदोलन ही अंतिम विकल्प होगा.

इस महत्वपूर्ण बैठक में महिला प्रकोष्ठ की जिलाध्यक्ष शशिप्रभा सिन्हा, जिला प्रभारी रीतेश कुमार, जिला कार्यालय सचिव अजीत कुमार, जिला संयोजक के.के. ब्रह्मचारी, जिला महासचिव नवल किशोर शर्मा, जिला कोषाध्यक्ष अजीत कुमार, जिला उपसंयोजक अमित कुमार, जिला उपाध्यक्ष भूषण कुमार सहित विभिन्न प्रखंडों के दर्जनों पदाधिकारी और बड़ी संख्या में प्राथमिक व मध्य विद्यालयों के शिक्षक-शिक्षिकाएं मौजूद रहे.

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Published by: Aditya Kumar Ravi

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