नालंदा में ज्ञान भारतम् मिशन के तहत डिजिटल होंगी प्राचीन पाण्डुलिपियां, DM कुंदन कुमार ने दिए सख्त निर्देश

Nalanda News: नालंदा में कागज, भोजपत्र, ताड़पत्र और कपड़े पर लिखी दुर्लभ पाण्डुलिपियों को सहेजने की कवायद तेज हो गई है. DM कुंदन कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में जिला स्तरीय समिति का गठन किया गया है. पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें.

Nalanda News (कंचन कुमार): ऐतिहासिक और ज्ञान की भूमि नालंदा में प्राचीन पाण्डुलिपियों को सहेजने और उन्हें आधुनिक रूप देने के लिए एक बड़ी मुहिम शुरू की गई है. बिहारशरीफ स्थित समाहरणालय में जिला पदाधिकारी (DM) कुंदन कुमार की अध्यक्षता में ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ के तहत एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई. इस बैठक का मुख्य एजेंडा प्राचीन और दुर्लभ पाण्डुलिपियों का संरक्षण, डिजिटाइजेशन एवं अभिलेखीकरण सुनिश्चित करना था. बैठक को संबोधित करते हुए डीएम कुंदन कुमार ने कहा कि कागज, भोजपत्र, ताड़पत्र और कपड़ों पर लिखी गई ये दुर्लभ पाण्डुलिपियां हमारे देश की अमूल्य बौद्धिक धरोहर हैं, जिन्हें नष्ट होने से बचाना और डिजिटल रूप में सुरक्षित रखना समय की मांग है.

पाण्डुलिपियों की खोज के लिए जिला स्तरीय विशेष समिति का हुआ गठन

ज्ञान भारतम् मिशन को धरातल पर प्रभावी तरीके से उतारने के लिए नालंदा जिले में एक विशेष जिला स्तरीय समिति का गठन किया गया है.

  • खोज अभियान: यह नवगठित समिति जिले के सभी सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थानों, प्राचीन मठ-मंदिरों, ऐतिहासिक शैक्षणिक संस्थानों, पुस्तकालयों और निजी संग्रहकर्ताओं के पास जाकर पाण्डुलिपियों की पहचान करेगी.
  • सूचीकरण और स्कैनिंग: पहचान की गई सभी पाण्डुलिपियों का एक व्यवस्थित डेटाबेस (सूची) तैयार किया जाएगा. इसके बाद आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर इनका डिजिटाइजेशन किया जाएगा ताकि इनका डिजिटल स्वरूप हमेशा के लिए सुरक्षित रहे.

आम नागरिक भी ‘ज्ञान भारतम् ऐप’ पर अपलोड कर सकेंगे अपनी निजी धरोहर

इस मिशन की सबसे खास बात यह है कि इसमें आम जनता की भागीदारी को भी जोड़ा गया है. बैठक में अधिकारियों ने बताया कि कोई भी आम नागरिक या इतिहास प्रेमी ज्ञान भारतम् ऐप (Gyan Bharatam App) एवं आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से अपने पूर्वजों या निजी संग्रह में सुरक्षित पाण्डुलिपियों को स्वयं अपलोड कर सकता है.

डीएम कुंदन कुमार ने अपील करते हुए कहा कि इस कदम से घरों और निजी अलमारियों में बंद दुर्लभ पाण्डुलिपियां राष्ट्रीय डिजिटल धरोहर का हिस्सा बन सकेंगी. इससे न केवल भारत की बौद्धिक विरासत का संरक्षण होगा, बल्कि नालंदा और भारत के समृद्ध इतिहास को वैश्विक स्तर पर एक नई और मजबूत पहचान मिलेगी.

डीएम ने बैठक में मौजूद विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे आपसी समन्वय स्थापित कर इस सर्वेक्षण और डिजिटाइजेशन के कार्य को पूरी पारदर्शिता के साथ समयबद्ध तरीके से पूरा करें. बैठक में जिले के कई आला अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ मुख्य रूप से उपस्थित रहे.

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Published by: Aditya Kumar Ravi

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