Revenue Department: खतियानी रकवा से अधिक रकवा की अलग-अलग जमाबंदी कायम होने के आधार पर दाखिल-खारिज और परिमार्जन के ऑनलाइन आवेदनों को सीधे अस्वीकृत करना अब राजस्व कर्मियों के लिए उचित नहीं होगा. इस संबंध में राजगीर भूमि सुधार उप समाहर्त्ता (डीसीएलआर) राजीव रंजन ने अनुमंडल के सभी अंचल अधिकारियों, राजस्व अधिकारियों और राजस्व कर्मचारियों को आवश्यक निर्देश जारी किया है.
अभिलेखों के साथ स्थलीय जांच का निर्देश
डीसीएलआर ने निर्देश में कहा है कि ऐसे मामलों में आम रैयतों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. किसी खाता-खसरा के खतियानी रकवा से अधिक रकवा की अलग-अलग जमाबंदी कायम होने का मामला सामने आने पर संबंधित अभिलेखों की सूक्ष्म जांच के साथ स्थलीय और भौतिक सत्यापन कराया जाए.
यदि जांच में जमाबंदी सही पायी जाती है और आवेदक का दखल-कब्जा भी प्रमाणित होता है, तो केवल खतियानी रकवा से अधिक रकवा की अलग जमाबंदी होने का हवाला देकर दाखिल-खारिज या परिमार्जन के आवेदन को अस्वीकृत नहीं किया जा सकता है.
गलत रकवा दर्ज मिला तो भेजा जाएगा प्रस्ताव
निर्देश के अनुसार, जांच के दौरान जमाबंदी में गलत तरीके से रकवा दर्ज होने का मामला सामने आता है, तो उसमें सुधार के लिए विधिवत प्रस्ताव अपर समाहर्त्ता, नालंदा को भेजना सुनिश्चित किया जाएगा.
डीसीएलआर ने कहा है कि राजस्व अभिलेखों में दर्ज रकवा और जमाबंदी की वास्तविक स्थिति की जांच किए बिना किसी आवेदन को अस्वीकृत करना रैयतों के हित में नहीं है. सभी अंचल अधिकारियों और राजस्व कर्मियों को ऐसे मामलों में अभिलेखीय, स्थलीय और भौतिक सत्यापन कर नियमानुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है.
रैयतों को कार्यालयों के चक्कर से मिलेगी राहत
नए निर्देश से दाखिल-खारिज और परिमार्जन से जुड़े मामलों में अनावश्यक आपत्तियों और आवेदनों की अस्वीकृति पर रोक लगने की उम्मीद है. साथ ही, रैयतों को राजस्व कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर लगाने से भी राहत मिलेगी.
