इलेक्ट्रिक स्कूटी मालिकों की बढ़ी परेशानी, स्पेयर पार्ट्स और मिस्त्रियों की कमी से नालंदा में इलेक्ट्रिक स्कूटी मालिक परेशान

Bihar Sharif News : नालंदा में इलेक्ट्रिक स्कूटी और ई-बाइक की संख्या बढ़ रही है, लेकिन पुराने मॉडलों के स्पेयर पार्ट्स और प्रशिक्षित मिस्त्रियों की कमी से वाहन मालिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. कई लोग मजबूरी में अपनी स्कूटी कबाड़ में बेच रहे हैं.

बिहारशरीफ से कंचन कुमार की रिपोर्ट
Bihar Sharif News : पर्यावरण संरक्षण और बढ़ती पेट्रोल-डीजल की कीमतों के बीच नालंदा जिले में पिछले पांच वर्षों के दौरान इलेक्ट्रिक स्कूटी, ई-बाइक और टोटो की संख्या तेजी से बढ़ी है. लेकिन इन वाहनों के पुराने मॉडल के संचालक अब एक नई समस्या से जूझ रहे हैं. जिले में प्रशिक्षित इलेक्ट्रिक वाहन मिस्त्रियों की कमी और अलग-अलग कंपनियों के स्पेयर पार्ट्स उपलब्ध नहीं होने के कारण छोटी-सी खराबी भी वाहन मालिकों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है.

सस्ती स्कूटी अब बन रही बोझ

शुरुआती दौर में कई नई और कम कीमत वाली कंपनियों ने आकर्षक ऑफर के साथ इलेक्ट्रिक स्कूटी बाजार में उतारी थीं. उस समय लोगों ने कम खर्च और बेहतर माइलेज की उम्मीद में बड़ी संख्या में इन्हें खरीदा. लेकिन कुछ वर्षों बाद इन कंपनियों के शोरूम बंद हो गए या उनका सर्विस नेटवर्क समाप्त हो गया. अब उनके स्पेयर पार्ट्स बाजार में नहीं मिल रहे हैं, जिससे मामूली खराबी होने पर भी वाहन बेकार हो जा रहे हैं.

मोटर खराब हुई, मरम्मत से ज्यादा महंगा खर्च

मगरा निवासी गणेश प्रसाद ने तीन वर्ष पहले एक नई कंपनी की इलेक्ट्रिक स्कूटी खरीदी थी. कुछ समय पहले उसकी मोटर में मामूली खराबी आ गई. स्थानीय मिस्त्री ने बताया कि दूसरे ब्रांड की मोटर सीधे फिट नहीं हो सकती. उसे फिट करने के लिए 20 से 25 हजार रुपये तक का खर्च आएगा. इतनी बड़ी राशि खर्च करना उन्हें उचित नहीं लगा, इसलिए उन्होंने स्कूटी की मरम्मत कराने का विचार ही छोड़ दिया.

बार-बार मरम्मत से परेशान होकर कबाड़ी को बेची स्कूटी

रिटायर शिक्षक अखिलेश प्रसाद की दो साल पुरानी इलेक्ट्रिक स्कूटी में बार-बार खराबी आने लगी. हर बार मरम्मत के नाम पर डेढ़ हजार से तीन हजार रुपये तक खर्च करना पड़ रहा था. लगातार बढ़ते खर्च से परेशान होकर उन्होंने अंततः अपनी स्कूटी मामूली कीमत पर कबाड़ी को बेच दिया.

मरम्मत में लगी ई-स्कूटी की तस्वीर

एक साल पुरानी स्कूटी भी हो गई बेकार

हिलसा के किराना व्यवसायी मनीष प्रसाद ने एक वर्ष पहले नई कंपनी की इलेक्ट्रिक स्कूटी खरीदी थी. कुछ समय बाद स्कूटी बंद हो गई. बाजार में उसके छोटे-छोटे स्पेयर पार्ट्स भी उपलब्ध नहीं थे. मिस्त्री हर बार हल्की मरम्मत के नाम पर 1000 से 1200 रुपये तक का बिल बना रहा था. आखिरकार उन्होंने भी स्कूटी को मात्र 5 हजार रुपये में कबाड़ी को बेच दिया.

क्या कहते हैं इलेक्ट्रिक वाहन मिस्त्री?

बिहारशरीफ के इलेक्ट्रिक वाहन मिस्त्री मोहम्मद राशिद बताते हैं कि तीन से पांच वर्ष पहले कई नई कंपनियां सस्ती इलेक्ट्रिक स्कूटी बेच रही थीं. हर कंपनी के अलग-अलग डिजाइन और पार्ट्स होने के कारण एक कंपनी का सामान दूसरी कंपनी में फिट नहीं होता. अधिकांश कंपनियों के स्थानीय शोरूम या सर्विस सेंटर भी नहीं थे. ऐसे में पुराने मॉडलों की मरम्मत करना आज बड़ी चुनौती बन गया है. उन्होंने बताया कि वर्तमान में बड़ी और स्थापित कंपनियां बाजार में आ चुकी हैं. इनके जिला और प्रखंड स्तर तक शोरूम, सर्विस सेंटर तथा स्पेयर पार्ट्स उपलब्ध हैं. कई कंपनियां अपने सर्विस सेंटर के लिए इलेक्ट्रिक वाहन मिस्त्रियों को विशेष प्रशिक्षण भी दे रही हैं. आने वाले समय में इसका सकारात्मक असर दिखाई देगा.

ई-स्कूटी के खराब मोटर की तस्वीर

मिस्त्रियों की कमी से बढ़ रहा खर्च

विशेषज्ञों का कहना है कि जिले में प्रशिक्षित इलेक्ट्रिक वाहन मिस्त्रियों की संख्या अभी भी काफी कम है. इसी कारण मरम्मत का शुल्क अपेक्षाकृत अधिक लिया जा रहा है. यदि स्थानीय स्तर पर अधिक तकनीशियन तैयार किए जाएं तो मरम्मत सस्ती और आसान हो सकती है.

सरकार से प्रशिक्षण और सर्विस नेटवर्क बढ़ाने की मांग

वाहन संचालकों और मिस्त्रियों का कहना है कि सरकार को इलेक्ट्रिक वाहन तकनीशियन तैयार करने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करना चाहिए. इससे युवाओं को रोजगार मिलेगा, सर्विस सेंटरों में कुशल मिस्त्री उपलब्ध होंगे और लोगों का इलेक्ट्रिक वाहनों पर भरोसा भी बढ़ेगा. साथ ही कंपनियों को जिला स्तर पर स्पेयर पार्ट्स और सर्विस की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए.

बिक्री बढ़ रही, लेकिन भरोसा घटने का खतरा

जानकारों के अनुसार, वर्तमान में नालंदा जिले में प्रतिदिन औसतन 18 से 20 इलेक्ट्रिक स्कूटी की बिक्री हो रही है. हालांकि पुराने मॉडलों की मरम्मत और स्पेयर पार्ट्स की समस्या यदि जल्द दूर नहीं हुई, तो भविष्य में उपभोक्ताओं का भरोसा प्रभावित हो सकता है. वहीं, मजबूत सर्विस नेटवर्क, प्रशिक्षित मिस्त्री और आसानी से उपलब्ध कल-पुर्जे इलेक्ट्रिक वाहनों के बाजार को और अधिक गति दे सकते हैं.

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By Yuvraj Ratan

पटना जन्मस्थली है मेरी, निष्पक्ष, तथ्यात्मक और जनहित आधारित पत्रकारिता में विश्वास करता हूं. वर्तमान में मेरा उद्देश्य बिहार के स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता से उठाना और पाठकों तक सत्यापित जानकारी पहुंचाना है. किसी भी समाचार को प्रकाशित करने से पहले उपलब्ध तथ्यों और स्रोतों का सत्यापन करना मेरी प्राथमिकता है. पाठकों को विश्वसनीय, निष्पक्ष और जनहितकारी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध हूं.

प्राथमिक शिक्षा संत जेवियर्स हाई स्कूल, पटना से पूरी करने के बाद संत जेवियर्स कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नॉलजी से बैचलर्स ऑफ मास कम्यूनिकेशन से स्नातक किया हूं. 2020 से पटना स्थित मीडिया संस्थान न्यूज 4 नेशन में एंकर सह प्रोड्यूसर के पद पर डेढ़ वर्षों तक काम किया. इसके उपरांत जून 2022 से इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमिटी (I-PAC) में सीनियर एग्जीक्यूटिव के पद पर रहते हुए डिजिटल कम्यूनिकेशन टीम में कार्य करने का मौका मिला. वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर के पद पर हूं इसके माध्यम से नागरिकों के पास तथ्यात्मक और सही सूचनाएँ, खबर और अपडेट देने का कार्य कर रहा हूं.

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