बिहारशरीफ : मेयार जलाशय की जमीन होगी अतिक्रमण मुक्त, मापी के बाद प्रशासन करेगा कार्रवाई

Meyar Reservoir land : मेयार जलाशय की सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए प्रशासनिक पहल शुरू हो गई है. पहले राजस्व कर्मचारियों द्वारा जांच की जाएगी, उसके बाद सरकारी अमीन से जमीन की पैमाइश कराई जाएगी. इस पहल से ग्रामीणों में जलाशय के भविष्य को लेकर उम्मीद जगी है.

Meyar Reservoir land : राजगीर प्रखंड के मेयार जलाशय की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने की प्रशासनिक पहल शुरू हो गई है. जलाशय के सरकारी भू-भाग पर संभावित अतिक्रमण की पहले राजस्व कर्मचारी से जांच करायी जाएगी. इसके बाद सरकारी अमीन से जलाशय की पूरी जमीन की पैमाइश करायी जाएगी. मापी और जांच में अतिक्रमण की पुष्टि होने पर संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार अतिक्रमण वाद चलाया जाएगा.

राजस्व अभिलेख और स्थल की स्थिति होगी स्पष्ट

राजगीर की अंचलाधिकारी कौशल्या कुमारी ने बताया कि जलाशय की जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए राजस्व अभिलेखों के साथ स्थल की स्थिति की जांच जरूरी है. सरकारी अमीन के माध्यम से पूरे भू-भाग की मापी करायी जाएगी. इससे यह निर्धारित किया जा सकेगा कि जलाशय की कुल कितनी जमीन है और उसके कितने हिस्से पर अतिक्रमण है.

ग्रामीणों में जगी कार्रवाई की उम्मीद

प्रशासन की इस पहल के बाद मेयार के ग्रामीणों में जलाशय के भविष्य को लेकर उम्मीद जगी है. ग्रामीणों के अनुसार मेयार जलाशय 14 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैला हुआ है. इसे क्षेत्र के किसानों के लिए जल संग्रह और सिंचाई का महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है. जलाशय में पर्याप्त पानी रहने से आसपास के खेतों को सिंचाई का लाभ मिलता है.

नक्शे और धरातल की स्थिति में अंतर का दावा

ग्रामीणों का कहना है कि नक्शे में दर्ज जलाशय का पूरा भू-भाग धरातल पर दिखाई नहीं देता है. जलाशय की खुदाई, उड़ाही और जीर्णोद्धार के दौरान जमीन की वास्तविक स्थिति को लेकर कई सवाल सामने आए हैं. अब प्रशासनिक मापी के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सरकारी अभिलेख में दर्ज जमीन और मौके पर मौजूद भू-भाग में कितना अंतर है.

करीब दो करोड़ की लागत से हुआ जीर्णोद्धार

लघु जल संसाधन विभाग की ओर से करीब दो करोड़ रुपये की लागत से मेयार जलाशय का जीर्णोद्धार कराया गया है. कार्य के दौरान ग्रामीणों ने खुदाई और जीर्णोद्धार की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाये हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि निर्धारित मानक के अनुरूप खुदाई और उड़ाही नहीं की गयी, जिससे जलाशय की जलधारण क्षमता प्रभावित हो सकती है. इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.

अतिक्रमण को लेकर विभाग और अंचल में अलग-अलग जानकारी

लघु जल संसाधन विभाग के सहायक अभियंता के अनुसार जलाशय की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए राजगीर अंचलाधिकारी से पत्राचार किया गया है. हालांकि सीओ कौशल्या कुमारी ने बताया कि उनके संज्ञान में ऐसा पत्र अभी नहीं आया है. ऐसे में राजस्व जांच और सरकारी मापी के बाद ही जलाशय की भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है.

जीर्णोद्धार की गुणवत्ता की भी जांच की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि जलाशय को अतिक्रमण मुक्त कराने के साथ ही जीर्णोद्धार कार्य की गुणवत्ता की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. उनका कहना है कि इसके लिए उच्चस्तरीय जांच दल गठित किया जाना चाहिए, ताकि सरकारी राशि के इस्तेमाल और निर्माण कार्य की गुणवत्ता की स्थिति स्पष्ट हो सके.

किसानों के लिए महत्वपूर्ण है मेयार जलाशय

ग्रामीणों और किसानों के अनुसार मेयार जलाशय वर्षा जल संग्रह और सिंचाई के लिहाज से महत्वपूर्ण है. यदि जलाशय की जमीन अतिक्रमण मुक्त होती है और जीर्णोद्धार कार्य की गुणवत्ता भी सुनिश्चित की जाती है, तो भविष्य में इसकी जल संग्रह क्षमता बेहतर हो सकती है. इससे आसपास के किसानों को सिंचाई में राहत और कृषि उत्पादन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.

मापी के बाद आगे की कार्रवाई

फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता जलाशय की जमीन की राजस्व जांच और सरकारी अमीन से मापी कराने की है. इसके बाद यदि किसी हिस्से पर अतिक्रमण की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. वहीं जीर्णोद्धार कार्य को लेकर ग्रामीणों की शिकायतों की जांच होती है या नहीं, इस पर भी लोगों की नजर बनी हुई है.

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By रामविलास प्रसाद

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