Rajgir International Airport : बिहार कैबिनेट से प्रस्ताव पारित होने के बावजूद राजगीर में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के स्थल को लेकर तस्वीर अभी साफ नहीं हुई है. राजगीर प्रखंड के मेयार-बढ़ौना मौजा में पूर्व में चिह्नित स्थल पर किसानों के लगातार विरोध के बाद प्रशासन ने अब वैकल्पिक जमीन की तलाश शुरू कर दी है. अंडवस, कतरीसराय और इस्लामपुर क्षेत्र में करीब 900 से 1000 एकड़ भूमि की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं.
तीन संभावित स्थलों का प्रारंभिक निरीक्षण
भूमि सुधार उपसमाहर्ता राजीव रंजन के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए तीन संभावित स्थलों का प्रारंभिक निरीक्षण किया गया है. निरीक्षण के आधार पर रिपोर्ट जिला प्रशासन को भेजी जाएगी. इसके बाद प्रशासनिक स्तर पर स्थल का अनुमोदन होने पर एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया की टीम संभावित जगहों का तकनीकी निरीक्षण करेगी.
तकनीकी जांच के बाद होगा अंतिम फैसला
एयरपोर्ट के अंतिम स्थल का चयन कई तकनीकी मानकों के आधार पर किया जाएगा. इसमें सुरक्षा, भौगोलिक स्थिति, पर्याप्त भूमि की उपलब्धता, रनवे की जरूरत और अन्य निर्धारित मानकों को देखा जाएगा. इसलिए फिलहाल यह तय नहीं माना जा सकता कि एयरपोर्ट अंडवस, कतरीसराय या इस्लामपुर में से किस जगह बनेगा.
कतरीसराय को माना जा रहा बेहतर विकल्प
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, कतरीसराय क्षेत्र को संभावित स्थलों में अपेक्षाकृत बेहतर विकल्प माना जा रहा है. यहां एयरपोर्ट बनने पर नालंदा के अलावा शेखपुरा, लखीसराय, जमुई और झारखंड के कोडरमा सहित आसपास के क्षेत्रों के लोगों को भी हवाई सेवा का लाभ मिलने की संभावना जतायी जा रही है.
अंडवस और इस्लामपुर में भी जमीन की तलाश
राजगीर के छबिलापुर-बेन-परवलपुर मार्ग के आसपास अंडवस क्षेत्र में भी उपयुक्त भूखंड की तलाश की जा रही है. इसके अलावा इस्लामपुर क्षेत्र को भी संभावित स्थलों की सूची में रखा गया है. तीनों जगहों पर उपलब्ध भूमि और एयरपोर्ट के लिए जरूरी मानकों की जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ायी जा रही है.
मेयार में पहले कई प्रक्रियाएं हो चुकी थीं
इससे पहले मेयार-बढ़ौना मौजा में नालंदा विश्वविद्यालय, बिहार खेल विश्वविद्यालय, राज्य खेल अकादमी और बिहार पुलिस अकादमी के आसपास अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के लिए स्थल चिह्नित किया गया था. तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित राज्य के वरिष्ठ मंत्रियों और अधिकारियों ने भी प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण किया था.
पैमाइश से लेकर एएआई निरीक्षण तक हुआ था काम
प्रस्तावित जमीन की पैमाइश के बाद नजरिया नक्शा तैयार किया गया था. जमीन की खरीद-बिक्री पर भी रोक लगायी गयी थी. एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया की टीम ने प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण किया था और आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किए जाने की बात भी सामने आयी थी. इसके बावजूद स्थल चयन की प्रक्रिया अब नए सिरे से आगे बढ़ती दिख रही है.
किसानों के आंदोलन के बाद बदला प्रशासन का रुख
मेयार क्षेत्र में एयरपोर्ट के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होने की आहट के बाद किसान विरोध में उतर गये थे. किसानों ने जमीन बचाने को लेकर लगातार आंदोलन किया और प्रशासन के समक्ष अपनी आपत्तियां दर्ज करायीं. इसके बाद प्रशासन ने वैकल्पिक स्थलों की तलाश शुरू की है.
किसानों के लिए बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा बदलाव
मेयार से संभावित स्थल परिवर्तन की कवायद को स्थानीय स्तर पर किसान आंदोलन की बड़ी सफलता के तौर पर देखा जा रहा है. हालांकि, अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है. प्रशासनिक रिपोर्ट और एएआई की तकनीकी जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के लिए कौन सा स्थल उपयुक्त पाया जाता है.
एयरपोर्ट बनने से बढ़ेगी क्षेत्रीय कनेक्टिविटी
राजगीर में अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बनने की योजना को क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और पर्यटन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. राजगीर और नालंदा आने वाले पर्यटकों के साथ आसपास के जिलों के लोगों को भी हवाई सेवा का लाभ मिल सकता है. हालांकि, इसके लिए पहले उपयुक्त स्थल का चयन और आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है.
