Bus workers' strike Khatam : बिहारशरीफ. निजी बस संचालकों की कथित दबंगई, मारपीट और विभागीय स्तर पर कार्रवाई नहीं होने के विरोध में सरकारी बसों के चालक और संवाहकों की अनिश्चितकालीन हड़ताल बुधवार को वरीय अधिकारियों के आश्वासन के बाद समाप्त हो गयी. हड़ताल खत्म होते ही चालक और संवाहक काम पर लौट आए और सरकारी बसों का परिचालन फिर से सामान्य हो गया. हालांकि, एक दिन चली हड़ताल की सूचना के कारण बुधवार को भी यात्रियों की संख्या सामान्य से कम रही.
एक दिन तक सरकारी बसों का परिचालन बंद रहने से बिहार राज्य पथ परिवहन निगम को करीब 10 लाख रुपये के राजस्व नुकसान का अनुमान है. मंगलवार को बिहारशरीफ सरकारी बस स्टैंड से पटना समेत विभिन्न मार्गों पर चलने वाली करीब 40 सरकारी बसों के पहिए पूरी तरह थम गए थे. इसके अलावा राजगीर, नवादा और पिंक बसों का परिचालन भी प्रभावित रहा.
निजी बस संचालकों पर लगाया दबंगई का आरोप
हड़ताल पर गए सरकारी बस कर्मियों का आरोप था कि निजी बस संचालकों की मनमानी के कारण उन्हें लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. कर्मचारियों का कहना था कि परिचालन के दौरान निजी बस संचालकों द्वारा दबाव बनाया जाता है. विरोध करने पर सरकारी बस के चालक और संवाहकों के साथ मारपीट और दुर्व्यवहार तक की घटनाएं सामने आती हैं.
कर्मचारियों का आरोप था कि इस संबंध में शिकायत किए जाने के बाद भी अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से उनका आक्रोश लगातार बढ़ रहा था. उनका कहना था कि यदि कर्मचारी अपनी ड्यूटी के दौरान सुरक्षित नहीं रहेंगे तो उनके लिए नियमित रूप से बसों का परिचालन करना मुश्किल होगा. इसी मुद्दे को लेकर कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की थी.
मंगलवार को ठप रहा बसों का परिचालन
हड़ताल के कारण मंगलवार को बिहारशरीफ से पटना समेत कई प्रमुख मार्गों पर सरकारी बस सेवा पूरी तरह बाधित रही. रोजाना सरकारी बसों से यात्रा करने वाले यात्रियों को अचानक परेशानी का सामना करना पड़ा. कई यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए निजी बसों और दूसरे वाहनों का सहारा लेना पड़ा.
सरकारी बसों का परिचालन बंद होने के कारण यात्रियों को अतिरिक्त खर्च भी करना पड़ा. वहीं, बिहारशरीफ से पटना और अन्य प्रमुख शहरों के बीच सरकारी बस सेवा पर निर्भर रहने वाले यात्रियों को वैकल्पिक साधन तलाशने में भी परेशानी हुई.
पटना में अधिकारियों से हुई बातचीत
हड़ताल की जानकारी मिलने के बाद विभाग के वरीय अधिकारियों ने कर्मचारियों के प्रतिनिधियों से पटना में बातचीत की. अधिकारियों ने कर्मचारियों की ओर से उठायी गयी समस्याओं को गंभीरता से सुना और उनके समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया.
अधिकारियों ने कर्मचारियों को उनकी सुरक्षा और परिचालन से जुड़ी समस्याओं के समाधान का भरोसा दिलाया. आश्वासन मिलने के बाद कर्मचारियों ने हड़ताल समाप्त करने का फैसला लिया. बुधवार से चालक और संवाहक अपने काम पर लौट आए, जिसके बाद सरकारी बसों का परिचालन दोबारा शुरू हो गया.
यात्रियों को परेशान करना नहीं था उद्देश्य
हड़ताल समाप्त करने के बाद कर्मचारियों ने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य यात्रियों को परेशान करना नहीं था. उनका कहना था कि अपनी सुरक्षा, सम्मान और काम करने के लिए बेहतर माहौल की मांग को लेकर विभाग का ध्यान समस्या की ओर आकर्षित करना जरूरी हो गया था.
कर्मचारियों ने कहा कि वे चाहते हैं कि सरकारी बसों के परिचालन के दौरान किसी भी कर्मचारी के साथ मारपीट या दुर्व्यवहार की घटना नहीं हो. यदि कोई विवाद होता है तो विभाग और संबंधित अधिकारी समय पर हस्तक्षेप कर कर्मचारियों की शिकायत पर कार्रवाई करें.
दोबारा घटना हुई तो आंदोलन की चेतावनी
सरकारी बस कर्मियों ने साफ किया कि यदि भविष्य में निजी बस संचालकों की ओर से दबंगई, मारपीट या दुर्व्यवहार की घटना दोहरायी जाती है और शिकायत के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होती है, तो वे दोबारा आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे.
कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि ऐसी स्थिति में सरकारी बस सेवा प्रभावित होने से यात्रियों को होने वाली परेशानी की जिम्मेदारी बिहार राज्य पथ परिवहन निगम के अधिकारियों की होगी. कर्मचारियों का कहना है कि विभाग को अभी से इस मामले में ठोस कदम उठाना चाहिए, ताकि भविष्य में विवाद बढ़ने की स्थिति न आए.
एक दिन की हड़ताल से करीब 10 लाख रुपये के राजस्व नुकसान के बाद अब विभाग के सामने सरकारी और निजी बस संचालकों के बीच लगातार सामने आ रहे विवाद का स्थायी समाधान निकालने की चुनौती है. कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ बसों का परिचालन सुचारु रखना भी जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी विवाद या हड़ताल के कारण यात्रियों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़े.
