बिहारशरीफ सदर प्रखंड के गंगा बीघा गांव में सावन की अंतिम सोमवारी के अवसर पर सोमवार को 24 घंटे के अखंड कीर्तन से पूर्व भव्य कलश शोभायात्रा निकाली गई. धार्मिक उत्साह और श्रद्धा के माहौल में निकली शोभायात्रा में गांव की महिलाओं, पुरुषों और बच्चियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. 201 कलश के साथ निकली शोभायात्रा ने पूरे गांव का भ्रमण किया. इस दौरान भक्ति गीतों और धार्मिक जयकारों से पूरा गांव भक्तिमय हो उठा.
कलश शोभायात्रा गांव से निकलकर पंचाने नदी तट तक पहुंची, जहां श्रद्धालुओं ने विधि-विधान के साथ कलश में पवित्र जल भरा. इसके बाद महिलाएं और बच्चियां सिर पर कलश लेकर वापस गांव की ओर रवाना हुईं. शोभायात्रा ने गांव की विभिन्न गलियों का भ्रमण किया.श्रद्धालु ‘हरे राम, हरे कृष्ण’ का संकीर्तन करते हुए आगे बढ़ रहे थे. गांव का भ्रमण करने के बाद शोभायात्रा महादेव स्थान पहुंची, जहां विधिवत पूजा-अर्चना कर कलश स्थापित किए गए. इसके बाद 24 घंटे के अखंड कीर्तन की शुरुआत की गई. कलश शोभायात्रा, गांव भ्रमण और 24 घंटे के अखंड कीर्तन को लेकर गंगा बीघा में पूरे दिन उत्सव और भक्ति का माहौल बना हुआ है.
अखंड कीर्तन के दौरान घरों में नहीं जलता चूल्हा
गंगा बीघा में अखंड कीर्तन से जुड़ी एक खास परंपरा भी है कि 24 घंटे तक चलने वाले अखंड के दौरान गांव के कोई भी घरों में चूल्हा नहीं जलाया जाता है और खाना नहीं बनाया जाता. ग्रामीण अखंड शुरू होने से पहले ही घरों में मीठे व्यंजन और अन्य भोजन तैयार कर लेते हैं तथा अखंड कीर्तन की समाप्ति के बाद उसी तैयार भोजन का प्रसाद के रूप में सेवन करते हैं.
ग्रामीणों का मानना है कि इस परंपरा से अखंड के दौरान परिवार का पूरा ध्यान पूजा-पाठ और संकीर्तन में लगा रहता है तथा सामूहिक धार्मिक भावना मजबूत होती है. अखंड कीर्तन शुरू होते ही पूरा गंगा बीघा गांव भक्ति के रंग में रंग गया. महादेव स्थान पर श्रद्धालुओं द्वारा लगातार हरिनाम संकीर्तन और भजन प्रस्तुत किए जा रहे हैं. रात-दिन चलने वाले इस संकीर्तन में ग्रामीण बारी-बारी से शामिल होकर भगवान का नाम जप रहे हैं. मंदिर परिसर और आसपास के इलाके में धार्मिक गीतों और जयकारों की गूंज सुनाई दे रही है. मुख्य पुजारी ईश्वर महतो ने कहा कि सावन की अंतिम सोमवारी पर आयोजित यह 24 घंटे का अखंड कीर्तन गांव की सुख-शांति और समृद्धि की कामना के लिए किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि कलश शोभायात्रा और अखंड कीर्तन के माध्यम से ग्रामीणों को एकजुट होकर धार्मिक परंपरा निभाने का अवसर मिलता है. उन्होंने कहा कि ऐसी परंपराएं नई पीढ़ी को भी धर्म और संस्कृति से जोड़ती हैं.
वहीं कामता महतो ने कहा कि अखंड कीर्तन के दौरान पूरा गांव एक परिवार की तरह नजर आता है. घरों में चूल्हा बंद रखने और पहले से भोजन तैयार करने की परंपरा भी इसी सामूहिक भावना का हिस्सा है. सभी लोग मिलकर अखंड में भाग लेते हैं. इस मौके पर सतीश प्रसाद ने कहा कि इस तरह के धार्मिक आयोजनों से लोगों में धर्म और अध्यात्म के प्रति आस्था एवं विश्वास कायम रहता है. साथ ही समाज में एकता, भाईचारा और आपसी सद्भाव मजबूत होता है. सामूहिक रूप से पूजा-पाठ और कीर्तन में शामिल होने से ग्रामीणों के बीच आपसी मेलजोल भी बढ़ता है.
आयोजन को सफल बनाने में ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर सहयोग किया. कलश शोभायात्रा में कौशल, अरविंद, सतीश , सुरेश, नंदू पंडित, ललिता देवी, विनीता देवी, मुन्नी देवी, शीला देवी समेत गांव के सैकड़ो महिला पुरुष मौजूद थे.
