बिहारशरीफ. बिहार विधानसभा चुनाव में जिला एक नई मिसाल कायम करने जा रहा है. यहां की महिलाओं ने एकजुट होकर ठान लिया है कि इस बार 100 प्रतिशत मतदान, एक भी वोट छूटेगा नहीं. जिले के गांव-गांव में यह जोश देखने को मिल रहा है, जहां महिलाएं लोकतंत्र के इस महापर्व को उत्सव में बदल रही हैं. चुनावी बिगुल फूंकने के लिए जीविका दीदियों, आंगनबाड़ी सेविकाओं और स्थानीय महिलाओं ने एक जनआंदोलन छेड़ दिया है. इस अभियान में पारंपरिक तरीके भी शामिल हैं और नए जोश भरे तरीके भी. गलियों में रंगोली बनाई जा रही है, जिसमें लिखा है कि मतदान है अधिकार, इसे करो साकार. युवतियों के हाथों में मतदान का संकल्प लिखी मेहंदी सजी है. प्रभात फेरियां और नुक्कड़ नाटकों के जरिए हर घर तक यह संदेश पहुंचाया जा रहा है. कुछ दिन पहले सोगरा हाइस्कूल से एक विशाल जागरूकता रैली निकाली गई, जो शहर के विभिन्न चौक-चौराहों से होती हुई अस्पताल चौक तक पहुंची. इस रैली में सैकड़ों महिलाओं ने हिस्सा लिया. इसके बाद कई इलाकों में कैंडिल मार्च या मशाल जुलूस भी निकाला गया, जिसने रात के अंधेरे में भी मतदान के प्रकाश को फैलाने का संकल्प दोहराया. बेन, नगरनौसा, सिलाव, चंडी, हरनौत और हिलसा जैसे क्षेत्रों में महिलाओं ने सामूहिक शपथ लेकर अपने संकल्प को मजबूत किया है. यहां आयोजित मेहंदी और रंगोली प्रतियोगिताओं ने युवाओं को भी इस मुहिम से जोड़ा है. महिलाओं का कहना है साफ है कि यह चुनाव हमारे लिए सिर्फ एक तारीख नहीं, एक उत्सव है. हम न सिर्फ खुद वोट डालेंगी, बल्कि अपने पड़ोस की हर महिला को मतदान केंद्र तक ले जाएंगी. लोकतंत्र की असली ताकत हमारा वोट ही तो है. जिला प्रशासन ने भी इस जन-जागरण में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है. छह नवंबर को होने वाले मतदान में शत-प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सोशल मीडिया समेत पोस्टर, बैनर और लगातार जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं. जीविका दीदियों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को विशेष जिम्मेदारी दी गई है. जिले की यह महिला शक्ति साबित कर रही है कि जब समाज की आधी आबादी जाग जाये, तो लोकतंत्र का उत्सव हर दिल में बस सकता है.
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