नालंदा: जन्म-मृत्यु पंजीकरण नियमावली के तहत 21 दिन के भीतर पंजीकरण पर नहीं लगेगा कोई शुल्क, प्रशासन ने जारी किए नए निर्देश

बिहार में मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के नियम जारी। 21 दिनों के भीतर पंजीकरण निःशुल्क है। पूरी प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेज और शुल्क की जानकारी यहाँ देखें।

Bihar Birth and Death Registration Rules : बिहार में लागू बिहार जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण नियमावली के तहत अब प्रत्येक मृत्यु का निर्धारित समय सीमा में पंजीकरण कराना अनिवार्य है. नियमावली के अनुसार मृत्यु के 21 दिनों के भीतर पंजीकरण कराने पर कोई शुल्क नहीं लिया जाता. इसके बाद विलंब से पंजीकरण कराने पर निर्धारित शुल्क के साथ अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने होंगे. राज्य सरकार द्वारा लागू नियमावली के तहत पंजीकरण प्रक्रिया को समयबद्ध और पारदर्शी बनाया गया है, ताकि नागरिकों को मृत्यु प्रमाणपत्र आसानी से उपलब्ध हो सके.

नालंदा जिला प्रशासन की ओर से 31 जुलाई को जारी अपडेट में इस नियम को लेकर विस्तृत जानकारी दी गई है. प्रशासन ने साफ किया है कि समय सीमा का पालन नहीं करने पर लोगों को अतिरिक्त प्रक्रिया और शुल्क का सामना करना पड़ेगा.

Biharsharif News : देरी करने पर कितना लगेगा शुल्क

प्रशासन के अनुसार, अगर मृत्यु के 21 दिनों के भीतर पंजीकरण कराया जाता है तो यह पूरी तरह निःशुल्क रहेगा. लेकिन 21 से 30 दिनों के बीच पंजीकरण कराने पर 2 रुपये का शुल्क देना होगा. वहीं 30 दिनों से लेकर 365 दिनों के अंदर पंजीकरण कराने पर 5 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है.

अगर एक साल से ज्यादा की देरी होती है, तो 10 रुपये का शुल्क देना अनिवार्य होगा. इसके अलावा मृत्यु प्रमाणपत्र जारी कराने के लिए भी 10 रुपये का शुल्क तय किया गया है.

दस्तावेजों को लेकर सख्ती

नियमावली के तहत मृत्यु पंजीकरण के लिए जरूरी दस्तावेज भी तय किए गए हैं. अगर किसी व्यक्ति की मौत अस्पताल में होती है, तो अस्पताल द्वारा जारी मृत्यु प्रमाणपत्र देना अनिवार्य होगा. इसके साथ ही श्मशान या कब्रिस्तान का प्रमाणपत्र या घाट की रसीद भी देनी होगी.

वहीं अगर मृत्यु घर पर होती है, तो नोटरी शपथपत्र, वार्ड पार्षद की अनुशंसा, सूचनाकर्ता का पता प्रमाण और श्मशान या कब्रिस्तान का प्रमाणपत्र देना जरूरी होगा.

ज्यादा देरी पर बढ़ेगी प्रक्रिया

प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि 30 दिनों से अधिक देरी होने पर प्रक्रिया और सख्त हो जाएगी. ऐसे मामलों में बीडीओ या एसडीओ द्वारा जारी आदेश की प्रति, पता प्रमाण और शपथपत्र देना अनिवार्य होगा. यानी देरी जितनी बढ़ेगी, औपचारिकताएं भी उतनी ही बढ़ेंगी.

ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों विकल्प

लोगों की सुविधा के लिए प्रशासन ने आवेदन की दोनों व्यवस्था रखी है. पंजीकरण नगर परिषद, नगर पंचायत या संबंधित प्रखंड कार्यालय में जाकर कराया जा सकता है. इसके अलावा ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी उपलब्ध है, जिससे लोग घर बैठे प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं.

प्रशासन की अपील

जिला प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि वे जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण नियमावली का पालन करें और तय समय के भीतर पंजीकरण जरूर कराएं. इससे भविष्य में उत्तराधिकार, बैंक, बीमा, पेंशन और अन्य जरूरी कार्यों में किसी तरह की परेशानी नहीं होगी.

प्रशासन का कहना है कि समय पर पंजीकरण कराने से लोगों को सरकारी सुविधाओं का लाभ लेने में आसानी होगी और अनावश्यक भागदौड़ से भी बचा जा सकेगा.


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By कंचन कुमार

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