स्वच्छता पखवाड़ा में शामिल बच्चों को किया गया पुरस्कृत
नव नालंदा महाविहार में आयोजित स्वच्छता पखवाड़ा का समापन बुधवार को हुआ. कार्यक्रम की शुरुआत मानस भूमि सिनियर सेकेण्डरी के छात्रों द्वारा नाटक “मैं बिहार हूं” के प्रदर्शन के साथ हुई. महाविहार द्वारा सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत के प्रति जागरूकता और सम्मान को बढ़ावा देने के लिए “विश्व विरासत दिवस” के तहत 16 से 30 अप्रैल तक स्वच्छता पखवाड़ा मनाया.
राजगीर. नव नालंदा महाविहार में आयोजित स्वच्छता पखवाड़ा का समापन बुधवार को हुआ. कार्यक्रम की शुरुआत मानस भूमि सिनियर सेकेण्डरी के छात्रों द्वारा नाटक “मैं बिहार हूं” के प्रदर्शन के साथ हुई. महाविहार द्वारा सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत के प्रति जागरूकता और सम्मान को बढ़ावा देने के लिए “विश्व विरासत दिवस” के तहत 16 से 30 अप्रैल तक स्वच्छता पखवाड़ा मनाया. विभिन्न समुदाय-उन्मुख गतिविधियों के माध्यम से विश्वविद्यालय ने स्थानीय हितधारकों को सक्रिय रूप से शामिल किया गया. स्वच्छता और विरासत को संरक्षित करने में भारत सरकार और उसके संस्थानों की साझा जिम्मेदारियों पर प्रकाश डाला. इस अवसर पर कुलपति प्रो. सिद्धार्थ सिंह ने एसआरपीएस, नालंदा हेरिटेज, आईपीएस अकादमी और मानस भूमि के छात्रों की उत्साहपूर्ण भागीदारी की सराहना की. उनके शिक्षकों और प्राचार्यों को उनके सहयोग के लिए हार्दिक धन्यवाद दिया. उन्होंने जापान, अमेरिका और अन्य देशों में अपने अंतरराष्ट्रीय अनुभवों से अंतर्दृष्टि साझा की. इस बात पर जोर दिया कि दुनिया भर के देश अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान के सम्मान के रूप में स्वच्छता को कितना महत्व देते हैं. उनके प्रेरक शब्दों ने छात्रों को स्वच्छता को दैनिक मूल्य के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित किया. इस अवसर पर डॉ. मीता ने पेंटिंग प्रतियोगिता के विजेताओं की घोषणा की. नव्या राज (आईपीएस अकादमी) को प्रथम, द्वितीय पुरस्कार (टाई): सौरव राज (मानस भूमि) और दीपशिखा (एसआरपीएस), तृतीय पुरस्कार (टाई): निकिता रानी (एसआरपीएस) और सौरव कुमार (नालंदा हेरिटेज) को दिया गया है. सभी प्रतिभागियों को कुलपति द्वारा प्रमाण पत्र और पुरस्कार दिया गया. इस अवसर पर प्रो. श्रीकांत सिंह को “हमारे जीवन में विश्व विरासत के मूल्य” विषय पर उनके विशेष व्याख्यान के लिए प्रशंसा प्रमाण पत्र से सम्मानित किया गया. डीन प्रो. विश्वजीत कुमार ने जीवन में मूलभूत मूल्यों के रूप में स्वच्छता, सफाई और स्वच्छता के महत्व पर जोर दिया. कार्यक्रम का समन्वय अंग्रेजी के प्रोफेसर डॉ.भीष्म कुमार ने किया. उनके द्वारा कार्यक्रम के नोडल अधिकारी के रूप में भी काम किया गया.
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