World First Bodhivan Biharsharif : ज्ञानपीठ नालंदा के संस्कृति ग्राम परिसर में शनिवार को विश्व के पहले ‘बोधिवन’ की स्थापना की गयी. पौधारोपण से पहले विभिन्न देशों के बौद्ध भिक्षुओं एवं विद्वानों द्वारा भगवान बुद्ध की पूजा-अर्चना और बौद्ध मंत्रोच्चार के साथ कार्यक्रम को आध्यात्मिक वातावरण प्रदान किया गया.
बौद्ध मंत्रोच्चार कर एक के बाद एक 28 पौधारोपण बौद्ध भिक्षुओं, प्राध्यापकों और पत्रकारों द्वारा किया गया.
विशिष्ट अतिथियों द्वारा विधिवत लोकार्पण
एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज के पूर्व अध्यक्ष प्रो. दुर्ग सिंह चौहान और नव नालंदा महाविहार सम विश्वविद्यालय, नालंदा के कुलपति प्रो. सिद्धार्थ सिंह ने विधिवत इसका लोकार्पण किया.
बोधिवन में थेरवाद बौद्ध परंपरा में वर्णित 28 बुद्धों से संबद्ध पवित्र बोधिवृक्षों का एक साथ रोपण किया गया है, जिसे बौद्ध विरासत, संस्कृति और आध्यात्मिक पर्यटन की दिशा में अनूठी पहल माना जा रहा है.
कुलपति प्रो. सिद्धार्थ सिंह का संबोधन
लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. सिद्धार्थ सिंह ने कहा कि भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से 28 बुद्धों और उनके ज्ञान प्राप्ति से जुड़े बोधिवृक्षों को एक स्थान पर प्रदर्शित करने की परिकल्पना को साकार किया गया है.
दुनिया में अपनी तरह का यह अकेला और अनूठा बोधिवन है, जिसके लिए देश के विभिन्न हिस्सों से अलग-अलग प्रजातियों के पवित्र वृक्षों को एकत्र किया गया है.
वैश्विक बौद्ध विरासत और पर्यटन का आयाम
उन्होंने कहा कि प्रत्येक वृक्ष के साथ उसका पाली नाम, पारंपरिक नाम और वैज्ञानिक नाम प्रदर्शित किया गया है, जिससे पर्यटकों को वृक्षों की पहचान के साथ उनके धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व की जानकारी मिल सकेगी.
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यह बोधिवन भारत और बौद्ध जगत के बीच मैत्री और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा, जिससे राजगीर-नालंदा की बौद्ध विरासत को वैश्विक आयाम मिलेगा.
रोपण किए गए 28 बोधिवृक्ष और उपस्थिति
इस बोधिवन में भारत, श्रीलंका, बांग्लादेश, म्यांमार, वियतनाम, चीन, कंबोडिया, जापान, ताइवान, तिब्बत, कोरिया, थाईलैंड, लाओस, मंगोलिया, भूटान सहित विभिन्न बुद्धिस्ट मॉनेस्ट्री के बौद्ध भिक्षुओं द्वारा कुल 28 बोधिवृक्ष (छितवन, पलाश, पाटली, वन-पीपल, शाल, नागकेशर, नागकेशर, नागकेशर, नागकेशर, अर्जुन/ककुध, सोन, सोन, सलई, कदम्ब, बाँस, अर्जुन, चम्पा, कुंदरु, कर्णिकार, विजयसार, आंवला, पाटली, सफेदा आम, शाल, शिरीष, गूलर, बरगद, पीपल) लगाये गये.
कार्यक्रम में प्रो. नलिन शास्त्री, भिक्षु डॉ. चालींदे, डॉ. वंदना सिंह, रजिस्ट्रार प्रो. रूबी कुमारी सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे.
