नालंदा में सूखे नशे का फैलता जाल नशे की गिरफ्त में युवा पीढ़ी, बढ़ते अपराध ने बढ़ाई चिंता

Nalanda News: नालंदा जिले में ब्राउन शुगर, हेरोइन, गांजा और नशीले इंजेक्शनों का अवैध कारोबार तेजी से फैल रहा है. इसके साथ ही जिले में हिंसा, छिनतई, रंगदारी, मारपीट और अन्य आपराधिक घटनाओं में भी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि नशे की लत पूरी करने के लिए कई युवक अपराध की राह पकड़ रहे हैं, जिससे सामाजिक माहौल पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है.

(Nalanda News : नालंदा से कंचन की रिपोर्ट) नालंदा जिले में ब्राउन शुगर, हेरोइन, गांजा और नशीले इंजेक्शनों का अवैध कारोबार तेजी से फैल रहा है. इसके साथ ही जिले में हिंसा, छिनतई, रंगदारी, मारपीट और अन्य आपराधिक घटनाओं में भी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि नशे की लत पूरी करने के लिए कई युवक अपराध की राह पकड़ रहे हैं, जिससे सामाजिक माहौल पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है.

नशे का विरोध करने वालों पर भी हो रहे हमले

जिले में नशे के बढ़ते प्रभाव का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि विरोध करने वालों को भी हिंसा का सामना करना पड़ रहा है. तीन माह पूर्व रामचंद्रपुर के उत्तरी गांधी नगर में नशा कर रहे युवकों का विरोध करने पर एक परिवार के पिता-पुत्र के साथ मारपीट कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया गया था. हाल के दिनों में सूर्य तालाब, नाला रोड और मेट्रो अस्पताल मोड़ के आसपास मारपीट और फायरिंग की घटनाएं भी सामने आई हैं, जिनमें नशे के आदी युवकों की संलिप्तता की चर्चा रही.

हर माह 150 से 180 नए युवा हो रहे नशे के शिकार

विशेषज्ञों के अनुसार जिले में 16 से 25 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं के बीच सूखा नशा तेजी से फैल रहा है. अनुमान है कि हर महीने 150 से 180 नए युवा इसकी गिरफ्त में आ रहे हैं. शुरुआत अक्सर दोस्तों की संगत और उत्सुकता से होती है, लेकिन कुछ ही समय में यह गंभीर लत का रूप ले लेती है.

शहर से गांव तक फैला नशे का नेटवर्क

नशे का कारोबार अब केवल शहरों तक सीमित नहीं रह गया है. बीड़ी अस्पताल, नालंदा कॉलोनी, मगध कॉलोनी, उत्तरी गांधी नगर, बाजार समिति, रेलवे स्टेशन क्षेत्र, सोहसराय, टिकुलीपर और चुड़ीचक जैसे इलाकों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसकी पहुंच बढ़ रही है. हाल ही में नूरसराय के दरुआरा गांव में एक युवक की संदिग्ध मौत को भी लोग नशे से जोड़कर देख रहे हैं.

नाबालिग और महिलाओं का हो रहा इस्तेमाल

पुलिस जांच में यह तथ्य सामने आया है कि ब्राउन शुगर और स्मैक का कारोबार संगठित नेटवर्क के माध्यम से संचालित किया जा रहा है. तस्कर पुलिस की नजरों से बचने के लिए नाबालिग बच्चों और महिलाओं को डिलीवरी एजेंट के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं. यह नेटवर्क बिहारशरीफ के अलावा राजगीर, हिलसा और कई ग्रामीण इलाकों तक फैल चुका है.

नशे की लत से उजड़ रहे परिवार

नशे की लत युवाओं की जिंदगी के साथ उनके परिवारों को भी तबाह कर रही है. वर्ष 2024 में चंडी के गौरव कुमार और भैसासुर के गोलू कुमार की आत्महत्या के मामलों ने पूरे जिले को झकझोर दिया था. परिजनों का आरोप था कि दोनों युवक ब्राउन शुगर की लत और उससे जुड़े आर्थिक दबाव से परेशान थे. चिकित्सकों का कहना है कि केवल चार से पांच डोज के बाद ही व्यक्ति इसकी गिरफ्त में आ सकता है.

छापेमारी में खुल रहे नेटवर्क के तार

जनवरी 2026 में नूरसराय थाना क्षेत्र के कखड़ा गांव से पुलिस ने बड़ी मात्रा में ब्राउन शुगर बरामद कर एक आरोपी को गिरफ्तार किया था. वहीं मार्च 2026 में पटना में 25 करोड़ रुपये मूल्य की 21 किलो से अधिक ब्राउन शुगर बरामदगी मामले में नालंदा निवासी बिहार पुलिस के एक सिपाही का नाम सामने आने के बाद यह मामला और गंभीर हो गया. पुलिस नेटवर्क के विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है.

जागरूकता और सख्ती ही समाधान

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सूखे नशे के कारोबार में साक्ष्य जुटाना और बड़े तस्करों तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण कार्य है, क्योंकि नेटवर्क छोटे सप्लायरों और डिलीवरी एजेंटों के जरिए संचालित होता है. विशेषज्ञों का मानना है कि पारिवारिक निगरानी, सामाजिक जागरूकता, युवाओं का मार्गदर्शन और प्रशासन की सख्त कार्रवाई ही इस बढ़ती समस्या पर प्रभावी अंकुश लगा सकती है.

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By Vivek Singh

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