Bihar Industrial Park: बिहार सरकार ने राज्य में दो औद्योगिक पार्क विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है. सरकार ने मुजफ्फरपुर और दरभंगा में इंडस्ट्रियल पार्क बनाने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया है. इन पार्कों को भारत औद्योगिक विकास योजना (भव्या) के तहत विकसित करने की योजना है. अगर केंद्र से मंजूरी मिलती है तो बिहार को करीब 1050 करोड़ रुपये की सहायता मिलेगी.
मुजफ्फरपुर और दरभंगा में बनेगा पार्क
सरकार की योजना के अनुसार मुजफ्फरपुर के पारू में 700 एकड़ और दरभंगा के बहादुरपुर में 350 एकड़ जमीन चिह्नित की गई है. यानी दोनों परियोजनाओं के लिए कुल 1050 एकड़ भूमि तय की गई है.
उद्योग सचिव कुंदन कुमार ने बताया कि प्रस्ताव केंद्र के पास भेज दिया गया है. मंजूरी मिलने के बाद दोनों जिलों में आधुनिक औद्योगिक पार्क विकसित किए जाएंगे.
12 हजार लोगों को मिल सकता है रोजगार
सरकार का अनुमान है कि इन दोनों पार्कों में उद्योग शुरू होने के बाद करीब 12 हजार लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा. इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे और क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियां भी बढ़ेंगी.
क्या है 'भव्या' योजना?
भारत औद्योगिक विकास योजना (भव्या) का उद्देश्य देश में विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) को बढ़ावा देना है. इसके जरिए भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की तैयारी की जा रही है. यह योजना 2026-27 से 2031-32 तक लागू रहेगी. इसके लिए केंद्र सरकार ने 33,660 करोड़ रुपये का बजट तय किया है.
योजना के तहत पूरे देश में 100 औद्योगिक पार्क विकसित किए जाएंगे. पहले चरण में 50 पार्क बनाए जाएंगे. इनमें शुरुआती मंजूरी सिर्फ 20 पार्कों को मिलेगी. ऐसे में बिहार के सामने दूसरे राज्यों से कड़ी प्रतिस्पर्धा है.
क्या होता है प्लग-एंड-प्ले इंडस्ट्रियल पार्क?
मुजफ्फरपुर और दरभंगा में बनने वाले पार्क प्लग-एंड-प्ले मॉडल पर आधारित होंगे। इसका मतलब है कि यहां उद्योग लगाने के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाएं पहले से तैयार रहेंगी.
सड़क, बिजली, पानी, ड्रेनेज और अन्य जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर पहले से उपलब्ध होगा. उद्योगपतियों को सिर्फ अपनी मशीनें लगानी होंगी और वे तुरंत उत्पादन शुरू कर सकेंगे.
बिहार इस मॉडल का सफल उदाहरण पहले भी पेश कर चुका है. कोरोना काल में पश्चिम चंपारण के चनपटिया का प्लग-एंड-प्ले पार्क काफी चर्चित रहा था.
तीन स्तर पर तैयार होगा इंफ्रास्ट्रक्चर
इन औद्योगिक पार्कों में आधुनिक सुविधाओं का पूरा इंतजाम किया जाएगा.
कोर इंफ्रास्ट्रक्चर
- आंतरिक सड़कें
- बिजली और पानी की व्यवस्था
- ड्रेनेज सिस्टम
- भूमिगत गलियारे
वैल्यू-एडेड इंफ्रास्ट्रक्चर
- तैयार फैक्ट्री शेड
- वेयरहाउस
- जांच प्रयोगशालाएं
सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर
- श्रमिकों के लिए आवास
- अन्य जरूरी जनसुविधाएं
चुनौतीपूर्ण होगी चयन प्रक्रिया
इस योजना की नोडल एजेंसी वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय का उद्योग संवर्द्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) है. इसका क्रियान्वयन राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर विकास निगम (NICDC) राज्य सरकारों और निजी क्षेत्र के सहयोग से करेगा.
औद्योगिक पार्कों का चयन पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के जरिए होगा. ऐसे में अब बिहार की नजर केंद्र सरकार के फैसले पर टिकी है. अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है तो राज्य के औद्योगिक विकास और रोजगार के क्षेत्र में यह एक बड़ा कदम साबित हो सकता है.
