Bihar Teacher Transfer Policy: बिहार शिक्षा विभाग ने शिक्षकों के ट्रांसफर के लिए एक नई नियमावली तैयार की है. इस नई नीति में 40 वर्ष से अधिक उम्र की अविवाहित महिला शिक्षकों का विशेष ध्यान रखा गया है. ऐसी शिक्षिकाओं को ट्रांसफर के दौरान अपनी पसंद के स्कूल चुनने की प्राथमिकता मिलेगी. इसके साथ ही कानूनी रूप से अलग रह रहीं महिला शिक्षकों को भी इस ट्रांसफर प्रक्रिया में खास वरीयता दी जाएगी. जिन स्कूलों में स्वीकृत शिक्षकों की संख्या 4 से कम है, वहां इस कैटेगरी के तहत पोस्टिंग नहीं की जाएगी.
गंभीर बीमारी और दिव्यांगता पर विशेष छूट
नई नियमावली में गंभीर बीमारियों से जूझ रहे और दिव्यांग शिक्षकों को ट्रांसफर में विशेष राहत दी गई है. कैंसर, ओपन हार्ट सर्जरी, शरीर का अंग बदलने की सर्जरी, एक किडनी वाले व्यक्ति, किडनी ट्रांसप्लांट और डायलिसिस कराने वाले शिक्षकों को खुद के मामले में 20% वरीयता मिलेगी.
अगर उनकी पत्नी या 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे इन बीमारियों से पीड़ित हैं, तो भी शिक्षक को 10% की वरीयता दी जाएगी. इसके अलावा ब्रेन ट्यूमर, न्यूरो सर्जरी, बोन टीबी, गंभीर टीबी और लकवा से पीड़ित शिक्षकों को भी प्राथमिकता मिलेगी. दिव्यांगता के मामले में 80% से 100% तक विजन, हड्डी और सुनने की क्षमता जिनमें न हो वैसे शिक्षकों को वरीयता दी जाएगी.
मेडिकल बोर्ड करेगा दावों की जांच
बीमारी और दिव्यांगता के नाम पर होने वाले फर्जीवाड़े को रोकने के लिए शिक्षा विभाग एक मेडिकल बोर्ड का गठन करेगा. यह बोर्ड आवेदनों की पूरी बारीकी से जांच करेगा. अगर कोई शिक्षक इस कैटेगरी में आवेदन करता है और किसी वजह से इस बार उसका ट्रांसफर नहीं हो पाता है, तो वह अगले ट्रांसफर राउंड में भी इसी वरीयता के साथ दोबारा आवेदन करने का हकदार होगा.
गलत दावा करने पर होगी जेल और कार्रवाई
अगर किसी शिक्षक ने ट्रांसफर पाने के लिए बीमारी, दिव्यांगता या किसी अन्य दर्जे का गलत दावा किया, तो उस पर गाज गिरना तय है. जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) के स्तर से मामले की जांच कराई जाएगी. आरोपी शिक्षक को सफाई देने के लिए सिर्फ 7 दिन का समय मिलेगा. यदि आरोप सच साबित होता है, तो शिक्षक के खिलाफ विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी.
बिहार की ताजा खबरों के लिए क्लिक करें
राष्ट्रीय और राज्य पुरस्कार विजेताओं को सम्मान
शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर काम करने वाले और सम्मानित शिक्षकों को भी इस नई नीति में फायदा मिलेगा. राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित शिक्षकों को ट्रांसफर में 10% और राज्य शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित शिक्षकों को 5% की वरीयता देने का नियम बनाया गया है.
इसे भी पढ़ें: बिहार को मोदी सरकार ने दिया 2900 करोड़ का तोहफा, जानिए कैसे खर्च होगा पैसा और क्या है 50-50 का फॉर्मूला?
