Smart Meter: बिहार के शहरी और ग्रामीण इलाकों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने वाले उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण खबर है. अब पुराने मीटर को हटाकर स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने के दौरान हर बार सर्विस केबल बदलना जरूरी नहीं होगा. बिहार विद्युत विनियामक आयोग ने इस पर रोक लगा दी है.
आयोग ने साफ कहा है कि केबल बदलने की जरूरत है या नहीं, इसका फैसला तय तकनीकी मानकों के आधार पर होगा. सिर्फ फील्ड में तैनात किसी कर्मचारी के कहने पर केबल नहीं बदली जा सकेगी.
जेई करेंगे केबल की जांच
नई व्यवस्था के तहत सर्विस केबल की जांच जूनियर इंजीनियर करेंगे. जेई को खुद केबल का फिजिकल वेरीफिकेशन करना होगा. इसके बाद वह अपनी रिपोर्ट में केबल बदलने की जरूरत और उसका ठोस तकनीकी कारण दर्ज करेंगे.
केबल बदलने की सिफारिश पर जूनियर इंजीनियर के हस्ताक्षर जरूरी होंगे. उनके दस्तखत के बिना केबल बदलने की फाइल आगे नहीं बढ़ेगी.
नई गाइडलाइन के मुताबिक जेई से नीचे के किसी कर्मचारी के हस्ताक्षर को केबल बदलने के लिए वैध नहीं माना जाएगा. इससे लाइनमैन या ठेकेदार के स्तर पर मनमाने तरीके से केबल बदलने की गुंजाइश कम होगी.
बिजली कंपनियों की मांग आयोग ने खारिज की
साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी और नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी चाहती थीं कि सर्विस केबल बदलने का फैसला फील्ड अधिकारियों के विवेक पर छोड़ दिया जाए.
आयोग ने बिजली कंपनियों के इस तर्क को खारिज कर दिया. आयोग ने कहा कि बिना तय मानक के अलग-अलग अधिकारी एक ही केबल को लेकर अलग-अलग राय दे सकते हैं. इससे नियमों में असमानता पैदा होगी.
आयोग के मुताबिक केबल बदलने की पारदर्शी प्रक्रिया नहीं होने से उपभोक्ताओं को परेशानी होगी. साथ ही बिजली कंपनियों के प्रति उनका भरोसा भी कम हो सकता है.
बिजली कंपनी को नया SOP बनाने का निर्देश
आयोग ने बिजली कंपनियों को नया एसओपी यानी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर तैयार करने का निर्देश दिया है. इसमें साफ बताया जाएगा कि किन परिस्थितियों में सर्विस केबल बदली जाएगी और इसके लिए उपभोक्ता से कितना शुल्क लिया जाएगा.
आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि नए एसओपी का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए. इससे उपभोक्ताओं को पहले से जानकारी रहेगी और फील्ड में तैनात कर्मचारी मनमानी नहीं कर सकेंगे.
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घरेलू उपभोक्ताओं से लिए जा रहे 600 रुपये
फिलहाल एजेंसी के जरिए काम करने वाले बिजली मिस्त्री सर्विस केबल के मानक तय कर रहे हैं. केबल उपभोक्ता को उपलब्ध करानी होती है. इसे बदलने के लिए घरेलू उपभोक्ताओं से 600 रुपये शुल्क लिया जा रहा है.
हालांकि, अलग-अलग श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिए अलग-अलग रेट निर्धारित है. आयोग ने शुल्क और प्रक्रिया में समानता लाने के लिए बिजली कंपनी को स्पष्ट एसओपी तैयार करने को कहा है.
1.34 करोड़ उपभोक्ताओं के परिसर में लगे प्रीपेड मीटर
बिहार में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों को मिलाकर करीब 2.26 करोड़ बिजली उपभोक्ता हैं. इनमें से करीब 1.34 करोड़ उपभोक्ताओं के परिसरों में पोस्टपेड मीटर हटाकर स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं.
आयोग के इस फैसले से स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने के दौरान केबल बदलने को लेकर स्पष्ट नियम लागू होंगे. इससे उपभोक्ताओं पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालने की संभावना भी कम होगी.
