Samrat Choudhary: पटना में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय चिंतन शिविर में बिहार की शिक्षा व्यवस्था को लेकर कई अहम फैसले लिए गए. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि स्कूलों में हर हाल में पढ़ाई सुनिश्चित की जाएगी. परीक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए AI का इस्तेमाल होगा. छात्रों की शिकायतों के समाधान के लिए अलग ऑनलाइन पोर्टल भी बनाया जाएगा.
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए बनेगी राज्य स्तरीय समिति
पटना के अधिवेशन भवन में शिक्षा विभाग की ओर से दो दिवसीय कार्यशाला-सह-चिंतन शिविर का आयोजन किया गया. शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी की अध्यक्षता में हुए इस शिविर का उद्घाटन मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने किया.
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा ऐसा विभाग है, जो पूरे समाज को दिशा देता है. सरकार का लक्ष्य बिहार के हर स्कूल में गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई सुनिश्चित करना है.
इसके लिए राज्य स्तर पर एक विशेष समिति का गठन किया गया है. समिति का काम स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और छात्रों के सीखने के स्तर को बेहतर करने के उपाय सुझाना होगा. सरकार का लक्ष्य हर स्कूल को उत्कृष्टता का केंद्र बनाना है.
परीक्षा व्यवस्था में AI की होगी एंट्री
सरकार ने परीक्षा प्रणाली में भी बड़े बदलाव की तैयारी की है. परीक्षाओं को पारदर्शी, निष्पक्ष और आधुनिक बनाने के लिए राज्य स्तरीय परीक्षा सुधार समिति गठित की जाएगी. यह समिति बोर्ड और प्रतियोगी परीक्षाओं के साथ-साथ कक्षा स्तर पर होने वाले मूल्यांकन की भी समीक्षा करेगी.
छात्रों ने कितना याद किया, सिर्फ इतना ही नहीं देखा जाएगा. उनकी समझ, विश्लेषण क्षमता और विषय पर पकड़ का भी आकलन किया जाएगा. इसके लिए तकनीक और AI का इस्तेमाल करने के सुझाव दिए जाएंगे.
छात्रों की समस्याओं के लिए बनेगा अलग पोर्टल
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने छात्रों के लिए अलग ऑनलाइन पोर्टल बनाने की घोषणा की है. इस पोर्टल पर विद्यार्थी स्कूल, कॉलेज, परीक्षा, शिक्षा व्यवस्था और प्रशासन से जुड़ी अपनी समस्याएं दर्ज कर सकेंगे. छात्र अपने सुझाव भी सीधे सरकार तक पहुंचा सकेंगे.
सरकार का दावा है कि इसका मकसद छात्रों को अपनी समस्या लेकर अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत देना है. खास बात यह होगी कि शिकायत सिर्फ दर्ज करके छोड़ नहीं दी जाएगी. उसके समाधान की निगरानी भी की जाएगी.
30 दिन में समाधान नहीं तो CM स्तर पर लगेगा सहयोग शिविर
मुख्यमंत्री ने शिकायतों के समाधान की समयसीमा भी तय करने की बात कही है. अगर किसी छात्र की शिकायत पोर्टल पर दर्ज होने के 30 दिनों के भीतर समाधान नहीं होता है, तो उसे मुख्यमंत्री स्तर पर लाया जाएगा.
इसके लिए महीने में एक बार अलग सहयोग शिविर आयोजित करने की बात कही गई है. यहां उन मामलों की समीक्षा होगी, जिनका समाधान तय समयसीमा में नहीं हो पाया. इस व्यवस्था से अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की कोशिश होगी.
स्कूल-कॉलेजों में जाकर छात्रों से बात करेंगे मंत्री और अधिकारी
सरकार अब शिक्षा व्यवस्था को सिर्फ दफ्तरों से चलाने के बजाय जमीन पर जाकर समझने की तैयारी में है. मुख्यमंत्री ने कहा कि मंत्री, विधायक, सांसद और संबंधित अधिकारी स्कूल-कॉलेजों में जाएंगे. वहां छात्र-छात्राओं से सीधे बातचीत की जाएगी.
युवाओं से मिलने वाले सुझावों और समस्याओं को ऑनलाइन पोर्टल पर भी दर्ज किया जाएगा. इससे सरकार को यह समझने में मदद मिलेगी कि स्कूल और कॉलेजों में छात्रों को वास्तव में किन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
शिक्षा के साथ कौशल और रोजगार पर भी जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के युवाओं को शिक्षा, कौशल और अवसरों से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है. सरकार का लक्ष्य ऐसी आधुनिक शिक्षा व्यवस्था तैयार करना है, जिससे बिहार के बच्चों को बेहतर पढ़ाई के लिए दूसरे राज्यों का रुख न करना पड़े. इसके लिए राज्य में 1001 मॉडल स्कूल विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है. सरकार का कहना है कि इन स्कूलों के जरिए बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल देने की कोशिश की जाएगी.
बिहार की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें
पेपर लीक पर सरकार का सख्त रुख
चिंतन शिविर के दौरान परीक्षा में पेपर लीक का मुद्दा भी उठा. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस पर सख्त रुख अपनाया. उन्होंने कहा कि सरकार परीक्षा व्यवस्था को 'लीकेज प्रूफ' बनाने पर काम कर रही है. पेपर लीक करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि परीक्षा व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर छोड़ा नहीं जाएगा. उन्होंने पेपर लीक करने वालों के खिलाफ गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई और सजा की व्यवस्था की बात भी कही.
मेहनत करने वाले छात्रों के हित में सख्ती
मुख्यमंत्री ने कहा कि पेपर लीक का सबसे बड़ा नुकसान मेहनत करने वाले छात्रों को होता है. विद्यार्थी महीनों और कई बार वर्षों तक परीक्षा की तैयारी करते हैं.
ऐसे में प्रश्नपत्र लीक होने से पूरी परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठता है और छात्रों का भरोसा टूटता है. सरकार अब परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने के साथ-साथ तकनीक के इस्तेमाल पर भी जोर दे रही है.
चार फैसलों से बदलने की तैयारी
सरकार के फैसलों को देखें तो शिक्षा व्यवस्था में चार बड़े बदलावों पर फोकस किया गया है.
पहला- गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए राज्य स्तरीय समिति.
दूसरा- परीक्षा सुधार के लिए अलग समिति और AI आधारित मूल्यांकन.
तीसरा- छात्रों की समस्याओं के लिए ऑनलाइन पोर्टल और 30 दिन की समयसीमा.
चौथा- छात्रों के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुनना और पेपर लीक के खिलाफ सख्त कार्रवाई.
