बागी कांग्रेस विधायक सुरेंद्र कुशवाहा की अशोक चौधरी से मुलाकात, NDA में जाने के कयास तेज

Bihar Politics: बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है. कांग्रेस के बागी विधायक सुरेद्र कुशवाहा ने रविवार को बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी से मुलाकात की. इस मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है.

Bihar Politics: बिहार की राजनीति में रविवार की दोपहर एक कांग्रेस के बागी विधायक सुरेंद्र कुशवाहा अचानक बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी के सरकारी आवास पर पहुंचे. राज्यसभा चुनाव में अपनी ही पार्टी को ‘गच्चा’ देने वाले विधायक सुरेंद्र कुशवाहा की इस मुलाकात को महज शिष्टाचार भेंट मानना मुश्किल है.

माना जा रहा है कि सुरेंद्र कुशवाहा जल्द ही औपचारिक रूप से एनडीए का दामन थाम सकते हैं, जिससे विपक्षी खेमे को बड़ा झटका लगना तय है.

अचानक मुलाकात से बढ़ी सियासी सरगर्मी

सुरेंद्र कुशवाहा का अशोक चौधरी के सरकारी आवास पर पहुंचना कई सवाल खड़े कर रहा है. खासकर ऐसे समय में जब वे पहले ही पार्टी लाइन से अलग रुख अपनाते नजर आ चुके हैं. इस मुलाकात को लेकर अब यह चर्चा तेज है कि वे एनडीए के करीब जा सकते हैं.

मुलाकात के बाद दोनों ही नेताओं ने मीडिया से दूरी बनाए रखी, पीछे के दरवाजे से निकल गए और कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया.लेकिन विधानसभा की बदलती परिस्थितियों और राज्यसभा चुनाव में एनडीए की ‘क्लीन स्वीप’ जीत के बाद इस मुलाकात के मायने साफ नजर आ रहे हैं.

राज्यसभा चुनाव से शुरू हुआ विवाद

सुरेंद्र कुशवाहा पिछले काफी समय से अपनी पार्टी कांग्रेस की लाइन से अलग चल रहे हैं. राज्यसभा चुनाव के दौरान उन्होंने और कांग्रेस के दो अन्य विधायकों ने राजद उम्मीदवार को वोट न देकर सबको चौंका दिया था. इसके बाद उन्होंने एक विवादित बयान देकर आग में घी डालने का काम किया था.

कुशवाहा ने खुलकर कहा था कि राजद ने ‘भूमिहार’ उम्मीदवार को मैदान में उतारा था, जो उन्हें पसंद नहीं था, इसलिए उन्होंने वोट नहीं दिया. इस बयान के बाद कांग्रेस ने उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी थी, लेकिन कुशवाहा के तेवर ढीले होने के बजाय और कड़े हो गए.

महागठबंधन में दरार के संकेत

राज्यसभा चुनाव में महागठबंधन के विधायकों की वोटिंग न करने ने राजद और कांग्रेस के बीच के अविश्वास को उजागर कर दिया था. यदि सुरेंद्र कुशवाहा पाला बदलते हैं, तो आने वाले समय में कांग्रेस के कुछ और विधायक भी इस रास्ते पर चल सकते हैं. बिहार की राजनीति में यह ‘इस्तीफों और दल-बदल’ का मौसम विपक्ष के लिए बड़ी चुनौती पेश कर रहा है.

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लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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