PM Awas Yojana Urban: बिहार के शहरी इलाकों में बिना घर के गुजर-बसर कर रहे और योग्य परिवारों के लिए राहत भरी खबर है. प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 के तहत राज्य के 45 शहरी निकायों में पक्के मकान बनाने के लिए 233.05 करोड़ रुपये की भारी रकम मंजूर कर दी गई है.
नगर विकास एवं आवास विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है. योजना के तहत लाभार्थी आधारित आवास प्रोजेक्ट्स के लिए यह राशि उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि लोग अपना खुद का पक्का मकान बना सकें.
30 से 45 वर्गमीटर में बनेगा पक्का मकान
इस योजना का मकसद शहरों में रहने वाले जरूरतमंद परिवारों को अपने सपनों का घर बनाने में आर्थिक मदद देना है. इसके तहत लाभार्थियों को 30 से 45 वर्गमीटर तक का पक्का आशियाना बनाने के लिए वित्तीय सहायता दी जाएगी.
यह राशि वित्तीय वर्ष 2026-27 में पहली किस्त के रूप में खर्च की जाएगी. केंद्र और राज्य सरकार अपनी-अपनी हिस्सेदारी मिलाकर कुल 233.05 करोड़ रुपये का फंड इन 45 चुनिंदा शहरों के लिए मुहैया कराएंगे.
किसको कितना मिला
स्वीकृत की गई कुल रकम में वर्गवार आवंटन की पूरी जानकारी सामने आ गई है. इसमें केंद्र सरकार की ओर से सामान्य व अन्य वर्ग के लिए 111.60 करोड़ रुपये, अनुसूचित जाति (SC) के लिए 27.23 करोड़ रुपये और अनुसूचित जनजाति के लिए 99.60 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं. केंद्र के इसी अनुपात में बिहार सरकार भी अपना अंश मिलाकर पूरा फंड जारी कर रही है, जिससे निर्माण कार्यों में कोई रुकावट न आए.
सीतामढ़ी को मिला सबसे बड़ा फंड
स्वीकृत बजट में सबसे बड़ा हिस्सा सीतामढ़ी नगर निगम के खाते में गया है, जहां के लिए 20.63 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं. इसके अलावा बोधगया नगर परिषद को 18.16 करोड़ रुपये और मधुबनी नगर निगम को 17.03 करोड़ रुपये दिए गए हैं.
आलमनगर नगर पंचायत को 13.80 करोड़, मीरगंज नगर परिषद को 10.52 करोड़, चकिया नगर परिषद को 10.36 करोड़ और बनमनखी बाजार नगर परिषद को 10.30 करोड़ रुपये मिले हैं. बाकी बचे निकायों को भी उनके प्रोजेक्ट के हिसाब से बजट दिया गया है.
बिहार की ताजा खबरों के लिए क्लिक करें
बिना किसी देरी के समय पर पूरे होंगे मकान
फंड ट्रांसफर में होने वाली देरी को खत्म करने के लिए नगर विकास एवं आवास विभाग ने स्पष्ट किया है कि पूरी राशि एसएनए स्पर्श (SNA SPARSH) सिस्टम के जरिए भेजी जाएगी. इस जस्ट-इन-टाइम मॉडल से पैसा सीधे और समय पर संबंधित शहरों तक पहुंचेगा. इससे कागजी कार्रवाई या फंड रुकने की समस्या खत्म होगी और लाभार्थियों के खाते में किस्तों की रकम बिना रुकावट पहुंच सकेगी.
इसे भी पढ़ें: बिहार में शिक्षकों के लिए नई एसओपी जारी, ट्रांसफर से पहले ये 5 बातें जानना जरूरी
