Bihar News: बिहार में जमीन और संपत्ति के कागजों का निबंधन अब बिना कागज के और आसान बनाने की तैयारी है. पेपरलेस निबंधन की प्रक्रिया को तेज करने में दस्तावेजनवीस यानी डीड राइटर और कातिब भी मदद करेंगे. इसी को लेकर सोमवार को मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन मंत्री मदन सहनी ने दस्तावेजनवीस संघ के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की.
डिजिटल हस्ताक्षर से होगा दस्तावेज का निबंधन
बैठक विकास भवन स्थित कार्यालय में हुई. इसमें तय किया गया कि पेपरलेस निबंधन व्यवस्था में सेवा देने वाले लोगों के लिए दस्तावेज पर डिजिटल हस्ताक्षर की सुविधा दी जाएगी. विभाग जल्द ही सभी सेवा प्रदाताओं को यूजर आईडी उपलब्ध कराएगा.
इसके अलावा सॉफ्टवेयर में एक पक्ष की ओर से होने वाले निबंधन की भी सुविधा जोड़ी जाएगी. सेवा प्रदाताओं को पेपरलेस निबंधन की नई व्यवस्था समझाने के लिए प्रशिक्षण भी दिया जाएगा.
जमीन का नक्शा और हस्ताक्षर भी ऑनलाइन होंगे
नई व्यवस्था में संपत्ति का नजरी नक्शा और पक्षकार के हस्ताक्षर भी ऑनलाइन अपलोड किए जा सकेंगे. जमीन और संपत्ति से जुड़ी जानकारी हिन्दी में भरने की सुविधा भी सॉफ्टवेयर में दी जाएगी. इससे लोगों को अपनी संपत्ति का विवरण दर्ज करने में आसानी होगी.
मॉर्गेज और लीज डीड के लिए भी बनेगी सुविधा
बैंकों की ओर से मॉर्गेज और लीज डीड के लिए तैयार किए गए प्रपत्र के अनुसार सॉफ्टवेयर में भी इसकी सुविधा जोड़ी जाएगी. इसके साथ ही दस्तावेजनवीसों के लाइसेंस जारी करने से जुड़े नियम और शर्तों की विभागीय स्तर पर समीक्षा की जाएगी.
सर्विस चार्ज 1000 से घटाकर 500 रुपये होगा
बैठक में सेवा प्रदाताओं के हित में एक और बड़ा फैसला लिया गया. स्कोर के तहत ली जाने वाली सर्विस चार्ज की राशि को 1000 रुपये से घटाकर 500 रुपये करने पर सहमति बनी है. इससे सेवा प्रदाताओं को राहत मिलने की उम्मीद है.
सेवा प्रदाताओं को ई-स्टाम्प की क्रेडिट सीमा खरीदने और पैसों के लेन-देन के लिए वॉलेट खाता उपलब्ध कराया जाएगा. इसके लिए चालू खाता खोलने की व्यवस्था की जाएगी.
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तकनीकी मदद के लिए भी होगी नई व्यवस्था
सेवा प्रदाताओं को तकनीकी सहायता देने के लिए दस्तावेजनवीस संघ की ओर से सुझाए गए अभ्यर्थी को सहायता के तौर पर लाइसेंस देने की व्यवस्था की जाएगी. इससे पेपरलेस निबंधन के दौरान तकनीकी परेशानी आने पर मदद मिल सकेगी.
उत्तराधिकारी को भी मिल सकेगा लाइसेंस
बैठक में सेवा प्रदाताओं के उत्तराधिकारी को अनुकंपा के आधार पर लाइसेंस देने की व्यवस्था पर भी सहमति बनी. इसके अलावा सेवा प्रदाताओं के लिए अलग-अलग कल्याणकारी योजनाएं शुरू करने के बारे में भी विचार करने का फैसला लिया गया.
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