Bihar News : (कंचन कुमार) बिहारशरीफ जिले सहित राज्यभर के स्कूलों में गर्मी की छुट्टियां शुरू होने लगी हैं. छुट्टियों के साथ स्कूलों में दिए जा रहे प्रोजेक्ट और होमवर्क ने अभिभावकों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है. बिहारशरीफ समेत जिलेभर में स्टेशनरी और कला सामग्री की कीमतों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. चार्ट पेपर, थर्मोकोल, रंग, स्केच पेन और गोंद जैसी जरूरी वस्तुएं 20 से 25 प्रतिशत तक महंगी हो गई हैं.
स्कूल प्रोजेक्ट का बढ़ा खर्च
स्कूलों में ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान विद्यार्थियों को मॉडल, चार्ट और प्रोजेक्ट कार्य दिए जा रहे हैं. छुट्टियां शुरू होते ही बाजारों में स्टेशनरी सामग्री खरीदने वालों की भीड़ बढ़ गई है. लेकिन इस बार अभिभावकों को पहले की तुलना में ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं.
चार्ट पेपर से रंग तक सब महंगे
बाजार के आंकड़ों के अनुसार चार्ट पेपर की कीमत 8 रुपये से बढ़कर 10 रुपये प्रति शीट हो गई है. वहीं प्रोजेक्ट शीट पैकेट 18 रुपये से बढ़कर 22 रुपये तक पहुंच गया है. रंगीन कागज, थर्मोकोल और कार्टन बोर्ड की कीमतों में भी 20 से 25 प्रतिशत तक उछाल आया है.
कला सामग्री पर भी बढ़ा बोझ
वाटर कलर सेट 55 रुपये से बढ़कर 68 रुपये, स्केच पेन सेट 45 से बढ़कर 55 रुपये और क्रेयॉन सेट 40 से बढ़कर 48 रुपये तक पहुंच गया है. वहीं फेविकोल और मार्कर पेन की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
कक्षा बढ़ने के साथ बढ़ रहा खर्च
विशेषज्ञों के अनुसार जैसे-जैसे विद्यार्थियों की कक्षा बढ़ती है, वैसे-वैसे प्रोजेक्ट कार्यों की जटिलता और खर्च भी बढ़ता जाता है. कक्षा 3 और 4 के विद्यार्थियों पर औसतन 140 रुपये तक खर्च हो रहा है, जबकि इंटरमीडिएट विज्ञान वर्ग के विद्यार्थियों को प्रोजेक्ट और मॉडल निर्माण पर करीब 530 रुपये तक खर्च करना पड़ रहा है.
विज्ञान के छात्रों पर सबसे ज्यादा असर
विज्ञान वर्ग के विद्यार्थियों को मॉडल, प्रयोगात्मक चार्ट और जैविक आकृतियों जैसी अतिरिक्त सामग्री खरीदनी पड़ती है. इसी कारण अन्य वर्गों की तुलना में उनका खर्च काफी अधिक हो गया है.
थर्मोकोल और सजावटी सामग्री भी महंगी
दुकानदार रवि कुमार ने बताया कि स्कूल प्रोजेक्ट में उपयोग होने वाली रंगीन थर्मोकोल शीट की कीमत 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ गई है. अब इसकी कीमत आकार और मोटाई के अनुसार 35 से 50 रुपये प्रति शीट तक पहुंच चुकी है.
अभिभावकों ने महंगाई पर जताई चिंता
अभिभावक विजय कुमार, टिंकू कुमार और विकास कुमार उर्फ गांधी जी ने कहा कि शिक्षा का खर्च पहले से ही बढ़ा हुआ है. अब प्रोजेक्ट सामग्री महंगी होने से घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है.
आने वाले दिनों में और बढ़ सकती हैं कीमतें
बाजार जानकारों का मानना है कि यदि कच्चे माल और परिवहन लागत में इसी तरह बढ़ोतरी जारी रही, तो आने वाले समय में स्टेशनरी और प्रोजेक्ट सामग्री की कीमतें और बढ़ सकती हैं.
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