बिहार के सरकारी स्कूलों में शुरू होगी कंप्यूटर की पढ़ाई, छठी से आठवीं तक बदलेगा सिलेबस

Bihar News: बिहार के सरकारी स्कूलों में अब प्राइवेट स्कूलों की तर्ज पर गांव-गांव के बच्चे भी माउस और कीबोर्ड पर हाथ आजमाएंगे. बिहार सरकार ने 1 अप्रैल से कक्षा 6 से 8 तक के लिए नया कंप्यूटर पाठ्यक्रम लागू करने का फैसला लिया है.

Bihar News: बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए बड़ा बदलाव होने जा रहा है. नए शैक्षणिक सत्र से यानी 1 अप्रैल से कक्षा छह से आठवीं तक के छात्रों को कंप्यूटर की पढ़ाई कराई जाएगी. राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) ने इसकी पूरी तैयारी कर ली है और जिलों में किताबें भेजने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है.

अब तक कंप्यूटर शिक्षा में पिछड़ रहे सरकारी स्कूलों के छात्रों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में यह बड़ा कदम माना जा रहा है. इस कोर्स के तहत बच्चों को कंप्यूटर की बुनियादी जानकारी दी जाएगी, जिससे वे तकनीक के साथ कदम से कदम मिला सकें.

सिलेबस में क्या सीखेंगे बच्चे?

नया कंप्यूटर कोर्स केवल थ्योरी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे बेहद व्यावहारिक बनाया गया है. बच्चे न केवल कंप्यूटर के विभिन्न भागों और उनकी कार्यप्रणाली को पहचानेंगे, बल्कि ऑपरेटिंग सिस्टम, मल्टीटास्किंग और यूजर इंटरफेस जैसे तकनीकी पहलुओं को भी समझेंगे. सबसे खास बात यह है कि इस पाठ्यक्रम में ‘साइबर अपराध’ से बचाव की रणनीतियों और ‘क्लाउड कंप्यूटिंग’ जैसी आधुनिक तकनीकों को भी शामिल किया गया है. इससे बच्चे दैनिक जीवन में तकनीक का सुरक्षित और सही उपयोग करना सीख सकेंगे.

सरकार इस योजना को समय पर लागू करने के लिए गंभीर है और जमीनी स्तर पर तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है.

बेसिक लर्निंग पर शिक्षकों को विशेष निर्देश

NCERT ने स्कूलों और शिक्षकों के लिए एक विशेष एडवाइजरी जारी की है. इसमें कहा गया है कि नया सिलेबस शुरू करने से पहले छात्रों की ‘बेसिक लर्निंग’ यानी बुनियादी समझ को मजबूत किया जाए. शिक्षकों से अपील की गई है कि वे छात्रों को इस तरह तैयार करें कि उन्हें नई किताबों और व्यावहारिक विषयों को समझने में कोई कठिनाई न हो.

डिजिटल साक्षरता के इस नए दौर में सरकार का पूरा जोर ‘रट्टा मार’ पढ़ाई के बजाय ‘छात्र केंद्रित’ और व्यावहारिक शिक्षा पर है. कंप्यूटर शिक्षा की शुरुआत और नए सिलेबस का लागू होना बिहार की शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है. इससे सरकारी स्कूलों के बच्चे भी डिजिटल युग में आगे बढ़ सकेंगे.

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लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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