डिजास्टर में अब बचेगी ज्यादा जानें,पटना समेत 20 शहरों में बनेंगे नए आपदा केंद्र

Bihar News: बाढ़, डूबने की घटनाएं, शीतलहर और आगजनी… डिजास्टर से जूझते बिहार को अब मिलेगा मजबूत सुरक्षा कवच. राज्य सरकार 20 और जिलों में ऐसे सेंटर खोलने जा रही है, जो किसी भी आपात स्थिति में मिनटों में राहत और बचाव का काम शुरू कर सकेंगे.

Bihar News: डिजास्टर प्रभावित लोगों को तुरंत राहत और बचाव मुहैया कराने के लिए बिहार सरकार तेजी से अपने आपातकालीन ढांचे को मजबूत कर रही है. आपदा प्रबंधन विभाग ने अब तक 17 जिलों में आपातकालीन ट्रेनिग सेंटर का निर्माण पूरा कर लिया है, जबकि पटना में निर्माण कार्य प्रगति पर है. शेष 20 जिलों में भी जल्द ऐसे केंद्र बनाए जाएंगे.

यह जानकारी बुधवार को सूचना भवन के संवाद कक्ष में आपदा प्रबंधन विभाग(Disaster Management Department) के संयुक्त सचिव मोहम्मद नदीमुल गफ्फार सिद्दीकी ने दी.

इन जिलों में शुरू हो चुका है सेंटर का संचालन

संयुक्त सचिव ने बताया कि जिन 17 जिलों में ईआरएफटीसी सेंटर पूरी तरह बनकर तैयार हैं, वहां NDRF की टीमें तैनात कर दी गई हैं. इनमें भागलपुर, पूर्णिया, अररिया, सारण, खगड़िया, किशनगंज, पूर्वी चंपारण, मुंगेर, दरभंगा, पश्चिम चंपारण, सहरसा, नालंदा, बक्सर, गोपालगंज, गया, मधुबनी और समस्तीपुर शामिल हैं.

पटना में सेंटर का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है, जबकि सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर, वैशाली, बेगूसराय, भोजपुर, सुपौल, कटिहार, मधेपुरा, सीवान समेत अन्य जिलों में जल्द काम पूरा कराया जाएगा.

संयुक्त सचिव ने बताया कि वर्ष 2025 में राज्य में नदी, तालाब और जलाशयों में डूबने से 2098 लोगों की मौत हुई थी. इसे गंभीर चुनौती मानते हुए सरकार ने 2030 तक डूबने से होने वाली मौतों में 50 फीसदी कमी लाने का लक्ष्य तय किया है. इसके लिए संवेदनशील इलाकों में मॉकड्रिल, जागरूकता अभियान और प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं.

शीतलहर से बचाव के लिए 130 रैन बसेरे

2025-26 में शीतलहर और कड़ाके की ठंड से बचाव के लिए राज्य भर में 130 रैन बसेरे बनाए गए. इनमें अब तक 38 हजार 700 से अधिक लोगों ने रात गुजारी. साथ ही करीब 80 हजार जरूरतमंदों के बीच कंबल वितरित किए गए, ताकि ठंड से होने वाली मौतों को रोका जा सके.

मुख्यमंत्री राहत कोष से 10 अति बाढ़ प्रभावित जिलों में 100 स्थायी बाढ़ आश्रय स्थल बनाने का लक्ष्य तय किया गया है. इनमें से 96 का निर्माण पूरा हो चुका है. बाढ़ प्रभावित परिवारों को दी जाने वाली राशि को भी बढ़ाकर 6 हजार से 7 हजार रुपये कर दिया गया है. वर्ष 2025-26 में 9 लाख 71 हजार 678 परिवारों को कुल 680.17 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है.

तैयार हो रहे है NDRF योद्धा

राज्य में डिजास्टर के जोखिम को कम करने के लिए बड़े पैमाने पर ट्रेनिग प्रोग्राम चलाए जा रहे हैं.2241 आंगनबाड़ी सेविकाओं को दो दिवसीय विशेष ट्रेनिग दिया गया. 482 स्वास्थ्य कर्मियों को आकस्मिक ट्रेनिग ट्रेनिग दिया गया.
इसके अलावा आग से बचाव को लेकर पांच हजार श्रमिकों को जागरूक किया गया, सुरक्षित तैराकी कार्यक्रम के तहत 16 हजार 374 बच्चों और किशोरों को ट्रेनिग दिया गया, जबकि 67 प्रखंडों में 1745 राजमिस्त्रियों को आपदा-सुरक्षित निर्माण तकनीक सिखाई गई.

इन केंद्रों के चालू होने से बिहार में आपदा के समय राहत, बचाव और पुनर्वास की व्यवस्था पहले से कहीं ज्यादा मजबूत होगी. सरकार का दावा है कि आने वाले वर्षों में बिहार आपदा प्रबंधन के मॉडल स्टेट के रूप में उभरेगा.

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लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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