Bihar News: हर गांव में खुलेगी दूध सहकारी समिति, हर पंचायत में सुधा सेंटर, बदलेगी बिहार की डेयरी अर्थव्यवस्था

Bihar News: दूध, मछली और पशुपालन अब सिर्फ आजीविका नहीं, बल्कि बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनने जा रहे हैं. सरकार ने ऐसा खाका तैयार किया है, जिससे गांव-गांव रोजगार, महिलाओं को सशक्तिकरण और उपभोक्ताओं को शुद्ध उत्पाद मिल सकेगा. सात निश्चय-3 के तहत की जा रही ये पहल बिहार को डेयरी और मत्स्य क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की तैयारी है.

Bihar News: रविवार को विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह ने सात निश्चय-3 के तहत डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग की प्रस्तावित योजनाओं की समीक्षा की. विभाग के सचिव शीर्षत कपिल अशोक ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से इन योजनाओं का विस्तृत खाका प्रस्तुत किया.

बैठक में साफ किया गया कि हर गांव में एक दुग्ध सहकारी समिति और हर पंचायत में सुधा का दूध बिक्री केंद्र खोलने का लक्ष्य रखा गया है.

गांव-गांव बनेगा दुग्ध सहकारी का नेटवर्क

योजना के तहत प्रत्येक गांव में दुग्ध सहकारी समिति की स्थापना की जाएगी. इन समितियों को जीविका से प्रभावी रूप से जोड़ा जाएगा ताकि ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित हो सके.

सरकार का फोकस है कि दुग्ध सहकारी समितियों में महिलाओं की बहुलता हो, जिससे वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें और परिवार की आय में स्थायी बढ़ोतरी हो.

हर पंचायत में सुधा का दूध बिक्री केंद्र खोला जाएगा. इससे ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में दूध एवं दुग्ध उत्पादों की ताजी और गुणवत्तापूर्ण उपलब्धता सुनिश्चित होगी. इससे बिचौलियों की भूमिका घटेगी और किसानों को दूध का बेहतर मूल्य मिलेगा.

एआई वर्कर से सुधरेगा पशुपालन का भविष्य

कृत्रिम गर्भाधान सेवाओं को मजबूत करने के लिए हर पंचायत में एक एआई वर्कर की तैनाती की जाएगी. प्रत्येक एआई वर्कर को डिजिटल एआई गन उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे पशुओं की नस्ल सुधार और दुग्ध उत्पादन में तेजी लाई जा सके. यह कदम पशुपालकों की आय बढ़ाने में मील का पत्थर साबित हो सकता है.

पशु चारा और मत्स्य क्षेत्र को भी मिलेगा बढ़ावा

बैठक में पशु चारा उत्पादन को प्रोत्साहित करने पर विशेष चर्चा हुई. इसका उद्देश्य है कि पशुओं को गुणवत्तापूर्ण आहार मिले और दूध उत्पादन स्थिर रूप से बढ़े. वहीं, उपभोक्ताओं तक ताजी और गुणवत्तापूर्ण मछली पहुंचाने के लिए फिश आउटलेट की स्थापना की जाएगी. इससे मत्स्य पालकों को सीधा बाजार मिलेगा और ग्राहकों को भरोसेमंद उत्पाद.

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई ताकत

इन योजनाओं से न सिर्फ दुग्ध और मत्स्य उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि गांवों में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे. महिलाओं की भागीदारी से सामाजिक बदलाव आएगा और बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी.

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By Pratyush Prashant

कंटेंट एडिटर और तीन बार लाड़ली मीडिया अवॉर्ड विजेता. जेंडर और मीडिया विषय में पीएच.डी. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम में कार्यरत. डेवलपमेंट, ओरिजनल और राजनीतिक खबरों पर लेखन में विशेष रुचि. सामाजिक सरोकारों, मीडिया विमर्श और समकालीन राजनीति पर पैनी नजर. किताबें पढ़ना और वायलीन बजाना पसंद.

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