बोधगया में बन रहा दलाई लामा सेंटर 2028 तक होगा तैयार, दुनिया को देगा शांति और करुणा का संदेश

Bihar News: बिहार के बोधगया में एक ऐसा वैश्विक केंद्र बन रहा है, जो आने वाले समय में दुनिया को शांति और करुणा का संदेश देगा. दलाई लामा की प्रेरणा से बन रहा “द दलाई लामा सेंटर फॉर तिब्बतन एंड इंडियन एंशियंट विजडम” 2028 तक तैयार होने का लक्ष्य है. करीब 200 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा यह संस्थान बिहार को फिर से वैश्विक बौद्ध अध्ययन के केंद्र के रूप में स्थापित करेगा

Bihar News: बोधगया में बन रहा यह सेंटर दुनिया का अनूठा संस्थान होगा, जहां भारतीय और तिब्बती प्राचीन ज्ञान परंपराओं का अध्ययन और शोध किया जाएगा. इस प्रोजेक्ट का शिलान्यास 3 जनवरी 2023 को दलाई लामा ने किया था.

इसके निर्माण की देखरेख दलाई लामा ट्रस्ट कर रहा है और केंद्र सरकार के सहयोग से इसे तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है.

दलाई लामा ट्रस्ट की देखरेख में बदलाव

बिहार की धरती से एक बार फिर मानवता और प्रेम की नई इबारत लिखी जा रही है. बोधगया में बन रहा ‘द दलाई लामा सेंटर’ केवल एक इमारत नहीं, बल्कि प्राचीन भारतीय दर्शन और तिब्बती ज्ञान के मिलन का सबसे बड़ा वैश्विक मंच होगा.

केंद्र सरकार के विदेश मंत्रालय के सहयोग और द दलाई लामा ट्रस्ट की देखरेख में इस प्रोजेक्ट को 2028 के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. यह संस्थान दुनिया भर के शोधार्थियों के लिए एक ऐसा स्थान बनेगा यहां तर्कशास्त्र, मनोविज्ञान और प्राचीन भारतीय ज्ञान पर रिसर्च की जा सकेगी.

केंद्र और राज्य का सहयोग

इस प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने के लिए केंद्र और बिहार सरकार ने कंधे से कंधा मिलाकर काम किया है. राज्य सरकार ने न केवल इस सेंटर के लिए 30 एकड़ की जमीन उपलब्ध कराई है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरगामी सोच का नतीजा है कि भारत अब भारतीय संस्कृति के जरिए विश्व शांति का नेतृत्व करने की दिशा में बढ़ रहा है. यह सेंटर क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को अहिंसक तरीके से सुलझाने के रास्तों पर भी काम करेगा.

तिब्बती संस्कृति और भारतीय मूल्यों का अनूठा संगम

दलाई लामा सेंटर का मुख्य उद्देश्य प्रेम, दया, करुणा और सहिष्णुता जैसे बुनियादी मानवीय मूल्यों को हर इंसान तक पहुंचाना है. यहां का पाठ्यक्रम 14वें दलाई लामा की चार प्रमुख जीवन प्रतिबद्धताओं पर आधारित होगा, जिसमें अंतर-धार्मिक सद्भाव और तिब्बती संस्कृति का संरक्षण शामिल है.

जब यह 2028 में पूरी तरह बनकर तैयार होगा, तब बोधगया की पहचान केवल एक तीर्थ स्थल के रूप में ही नहीं, बल्कि एक आधुनिक और प्राचीन ‘विजडम हब’ के तौर पर पूरी दुनिया में चमक उठेगी.

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लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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