Bihar News: बिहार में सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम कसने के लिए परिवहन विभाग ने ठोस और समयबद्ध रणनीति तैयार की है. अधिकदुर्घटना वाले स्थलों यानी ब्लैक स्पॉट की नए सिरे से पहचान की जाएगी और अप्रैल 2026 तक सड़कों की सभी खामियों को दूर करने का लक्ष्य तय किया गया है.
विभाग का साफ कहना है कि अब सिर्फ दुर्घटनाओं के कारणों की रिपोर्ट बनाकर मामला नहीं छोड़ा जाएगा, बल्कि 15 दिनों के भीतर उस स्थान को सुरक्षा मानकों के अनुरूप ठीक करना अनिवार्य होगा. राज्य में सड़क दुर्घटनाओं के ग्राफ को नीचे लाने के लिए परिवहन विभाग ने एक कड़ा और ‘रिजल्ट ओरिएंटेड’ प्लान तैयार किया है.
परिवहन विभाग ने साफ निर्देश दिया है कि अप्रैल 2026 तक बिहार की सभी सड़कों को अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप दुरुस्त कर लिया जाए, ताकि बेगुनाहों की जान बचाई जा सके.
ब्लैक स्पॉट पर त्वरित कार्रवाई का निर्देश
परिवहन विभाग के अनुसार, किसी भी सड़क पर यदि दुर्घटना संभावित स्थल चिन्हित होता है तो वहां सुधार कार्य तय समयसीमा में पूरा किया जाएगा. उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एक ही स्थान पर बार-बार दुर्घटनाएं न हों. इसके लिए विशेष टीमों का गठन किया जाएगा, जिनमें संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल होंगे और उनकी स्पष्ट जवाबदेही तय की जाएगी.
अधिकारियों के मुताबिक पटना और वैशाली में 59 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए जा चुके हैं, जहां जल्द सुधार कार्य पूरा करने पर सहमति बन गई है. इसके अलावा गया, जहानाबाद, पूर्णिया, सीतामढ़ी, भागलपुर, मुजफ्फरपुर, शिवहर, छपरा और मोतिहारी में भी नए ब्लैक स्पॉट की पहचान और उन्हें दुरुस्त करने का काम तेज कर दिया गया है.
हाइवे पर दिखेगी अस्पतालों की जानकारी
सड़क हादसों के बाद घायलों को तुरंत इलाज मिल सके, इसके लिए राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर विशेष साइनेज लगाए जाएंगे. इन साइनेज पर नजदीकी सरकारी और निजी अस्पतालों का नाम और सटीक दूरी दर्ज होगी. जिला प्रशासन निजी अस्पतालों से समन्वय कर यह व्यवस्था लागू करेगा, ताकि आपात स्थिति में समय की बर्बादी न हो.
गुड सेमेरिटन को मिलेगी सुरक्षा
दुर्घटना में घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने वाले नेक मददगारों यानी ‘गुड सेमेरिटन’ से पुलिस किसी तरह की पूछताछ नहीं करेगी. वहीं इलाज के दौरान पैसों की कमी के कारण किसी भी घायल का उपचार रोका नहीं जाएगा. एंबुलेंस सेवाओं को भी अलर्ट मोड में रखा जाएगा और देरी को गंभीरता से लिया जाएगा.
हर हादसे के बाद बनेगी विस्तृत रिपोर्ट
प्रत्येक दुर्घटना के बाद गठित टीम मौके की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी और जिला प्रशासन इसकी निगरानी करेगा. यह सुनिश्चित किया जाएगा कि एक बार सुधार के बाद उस स्थान पर दोबारा वैसी स्थिति उत्पन्न न हो.
