होली के दिन बगहा में दिखा सफेद उल्लू, बस स्टैंड पर उमड़ी भीड़, रेस्क्यू की मांग तेज

Bihar News: पश्चिमी चंपारण के बगहा नगर में होली के दिन एक दुर्लभ सफेद उल्लू दिखने से सनसनी फैल गई. अनुमंडलीय अस्पताल परिसर स्थित बस स्टैंड के विशाल बरगद के पेड़ पर बैठे इस पक्षी को देखने के लिए लोग उमड़ पड़े. माना जा रहा है कि यह पक्षी Barn Owl प्रजाति का है, जिसे आम बोलचाल में ‘हवेली उल्लू’ कहा जाता है.

Bihar News: बिहार के बगहा में इस साल की होली बेहद खास और आध्यात्मिक रंग में रंगी नजर आई. शनिवार को जब पूरा शहर रंगों में सराबोर था, तभी अनुमंडलीय अस्पताल परिसर स्थित बस स्टैंड के एक पुराने बरगद के पेड़ पर एक दुर्लभ सफेद उल्लू दिखाई दिया.

होली के शुभ अवसर पर सफेद उल्लू का दिखना इलाके में चर्चा का विषय बन गया है. देखते ही देखते मौके पर सैकड़ों लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा, जो इस अद्भुत पक्षी की एक झलक पाने के लिए बेताब दिखे.

धार्मिक आस्था और शुभ संकेत का संगम

सनातन धर्म में सफेद उल्लू को धन की देवी माता लक्ष्मी का वाहन माना जाता है. ऐसे में होली जैसे बड़े त्यौहार के दिन इसका अचानक रिहायशी इलाके में प्रकट होना स्थानीय लोगों के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था.

बुजुर्गों और जानकारों का मानना है कि जहां सफेद उल्लू का वास होता है, वहां सुख-समृद्धि और लक्ष्मी का आगमन होता है. लोगों ने इसे ‘शुभ शकुन’ मानते हुए हाथ जोड़कर नमन किया, वहीं कुछ युवाओं ने इस दुर्लभ पल को अपने कैमरों में कैद करने की होड़ मचा दी.

वाल्मीकि टाइगर रिजर्व का ‘मेहमान’ या हवेली उल्लू?

यह दुर्लभ पक्षी बार्न आउल (Barn Owl) प्रजाति का है, जिसे ग्रामीण इलाकों में ‘हवेली उल्लू’ भी कहा जाता है. अपने दिल के आकार के चेहरे और दूध जैसे सफेद रंग के कारण यह काफी आकर्षक और शांत स्वभाव का होता है.

माना जा रहा है कि यह पक्षी पास के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (VTR) के घने जंगलों से भटककर भोजन की तलाश में यहां पहुंचा है. चूहों का शिकार करने वाला यह पक्षी किसानों का मित्र भी माना जाता है, क्योंकि यह फसल बर्बाद करने वाले कृंतकों का सफाया करता है.

सुरक्षा को लेकर चिंता और रेस्क्यू की मांग

जैसे-जैसे बस स्टैंड परिसर में भीड़ बढ़ती गई, पक्षी के असहज होने की आशंका भी गहराने लगी. जागरूक नागरिकों ने तुरंत स्थानीय प्रशासन और वन विभाग को सूचित करने का प्रयास किया ताकि इस बेजुबान की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.

वाल्मीकि टाइगर रिजर्व अपनी जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है, इसलिए स्थानीय लोगों की मांग है कि इस ‘राजकीय अतिथि’ को सुरक्षित पकड़कर वापस जंगल के प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाए.

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लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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