बिहार के 9000 पोस्ट ऑफिस से अब सीधे विदेश जाएगा आपका पार्सल, जानें कब से शुरू होगी सुविधा

Bihar News: विदेश पार्सल भेजने के लिए अब पटना, दिल्ली या कोलकाता का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा. आपके अपने जिले का पोस्टऑफिस ही बनेगा इंटरनेशनल डिस्पैच सेंटर. अप्रैल 2026 से पहले बिहार के सभी 29 हेड आफिस के अंतर्गत आने वाले लगभग 9,000 पोस्ट आफिस में 'अंतरराष्ट्रीय व्यापार इकाई' शुरू होने जा रही है.

Bihar News: बिहार में विदेश सामान भेजना अब पहले से कहीं ज्यादा आसान होने जा रहा है. पोस्टल विभाग बिहार सर्किल राज्य के सभी 29 हेड आफिस के करीब नौ हजार पोस्ट ऑफिस में अंतरराष्ट्रीय व्यापार इकाई खोलने जा रहा है.

यह सुविधा अप्रैल से पहले सभी जगह शुरू कर दी जाएगी. इसके साथ ही रेलवे मेल सर्विस (आरएमएस) में भी यह यूनिट कार्यरत होगी, जिससे स्थानीय स्तर पर ही पार्सल बुकिंग से लेकर प्रोसेसिंग तक की पूरी व्यवस्था उपलब्ध हो सकेगी.

अब जिला स्तर पर ही पूरी होगी विदेश पार्सल की प्रक्रिया

अब तक विदेश पार्सल भेजने के लिए लोगों को पटना, दिल्ली या कोलकाता पर निर्भर रहना पड़ता था. पार्सल की स्क्रूटनी, कस्टम प्रक्रिया और क्लियरेंस जैसी औपचारिकताएं बड़े शहरों से पूरी होती थीं. कई बार पार्सल रिजेक्ट होने की जानकारी भी दिनों बाद मिलती थी. नई व्यवस्था लागू होने के बाद यह पूरी प्रक्रिया संबंधित जिले में ही पूरी होगी और किसी भी समस्या की सूचना तुरंत मिल सकेगी.

चीफ पोस्ट मास्टर जनरल, बिहार सर्किल एम. अब्दाली के अनुसार हर प्रमंडल में इंटरनेशनल बिजनेस यूनिट बनाई जाएगी. इससे विदेश जाने वाले पार्सल की निगरानी बेहतर होगी और कस्टम क्लियरेंस की प्रक्रिया तेज होगी.

हर स्तर पर बनेंगी अलग टीमें, बढ़ेंगे काउंटर

अंतरराष्ट्रीय व्यापार इकाई के संचालन के लिए शाखा डाकघर से लेकर मुख्य पोस्ट ऑफिस तक अलग टीम बनाई जाएगी.चार काउंटर विदेश पार्सल बुकिंग के लिए निर्धारित होंगे. जहां बुकिंग ज्यादा होगी, वहां काउंटरों की संख्या बढ़ाई जाएगी. इससे भीड़ कम होगी और प्रक्रिया तेज होगी.

पार्सल पैकेजिंग यूनिट को भी किया जा रहा मजबूत

पोस्टल विभाग पार्सल पैकेजिंग सिस्टम को भी आधुनिक बना रहा है. पटना की पार्सल पैकेजिंग यूनिट को अपडेट किया गया है. विभाग का दावा है कि अब कोई पार्सल एक जगह पर एक घंटे से ज्यादा नहीं रुकता और उसे लगातार आगे भेजने की प्रक्रिया चलती रहती है. पोस्टल विभाग की बढ़ती मांग को देखते हुए यह कदम बिहार के व्यापारियों, छात्रों और प्रवासी परिवारों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है.

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लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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