बंटवारा नहीं होने पर भी जारी रहेगा सर्वे, एक्शन मोड में सरकार, 2027 तक काम पूरा करने का लक्ष्य

Bihar Land Survey: बिहार सरकार ने दिसंबर 2027 तक सर्वे पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है. पारिवारिक बंटवारा नहीं होने पर भी प्रक्रिया नहीं रुकेगी. अतिरिक्त कर्मचारी लगाए जाएंगे, AI से सरकारी जमीन चिन्हित होगी और जमीन के डॉक्यूमेंट अब सिर्फ ऑनलाइन मिलेंगे.

Bihar Land Survey: बिहार में जमीन सर्वे को लेकर सरकार अब पूरी तरह एक्टिव मोड में आ गई है. राज्य सरकार ने साफ कर दिया है कि दिसंबर 2027 तक जमीन सर्वे का काम हर हाल में पूरा कर लिया जाएगा. परिवार में जमीन का बंटवारा हुआ हो या नहीं, सर्वे तय समय पर पूरा होगा. यानी जिन परिवारों में अब तक आपसी बंटवारा नहीं हुआ है, वहां भी सर्वे रुकेगा नहीं. ऐसी स्थिति में जमीन उसी पूर्वज या पुराने मालिक के नाम पर दर्ज रहेगी, जिसके नाम से पहले से रिकॉर्ड मौजूद है.

सरकार ने लोगों की सबसे बड़ी चिंता भी दूर कर दी है. अगर परिवार में जमीन का बंटवारा अभी तक नहीं हुआ है तो घबराने की जरूरत नहीं है. सर्वे के दौरान जमीन को लेकर प्रक्रिया जारी रहेगी और पुराने रिकॉर्ड के आधार पर नाम दर्ज रहेगा. इससे सर्वे की रफ्तार पर असर नहीं पड़ेगा और काम समय पर पूरा किया जा सकेगा.

लंबित मामलों के लिए बढ़ेगी कर्मचारियों की संख्या

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने साफ किया है कि जहां जरूरत पड़ेगी वहां अतिरिक्त अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी. हाल के दिनों में हड़ताल की वजह से कई सर्किल ऑफिस में सर्वे से जुड़े मामले लंबित हो गए हैं. अब इन मामलों को तेजी से निपटाने के लिए राजस्व कर्मचारी सुबह 6 बजे से 9 बजे तक और शाम 7 बजे से रात 10 बजे तक अतिरिक्त ड्यूटी करेंगे. सरकार की कोशिश है कि लंबित फाइलें जल्द खत्म हों और सर्वे में देरी न हो.

प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों का मानना है कि बिहार में कई आपराधिक घटनाओं की जड़ जमीन विवाद है. कई बार हत्या और गंभीर झगड़ों की वजह भी जमीन का विवाद बनता है. इसी कारण सरकार चाहती है कि जमीन सर्वे, रिकॉर्ड अपडेट और स्वामित्व की स्थिति पूरी पारदर्शिता के साथ तय हो ताकि भविष्य में विवाद कम हो सके.

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सरकारी जमीन की पहचान में अब AI तकनीक की मदद

सरकार अब सरकारी जमीन की सही पहचान के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI तकनीक का भी इस्तेमाल करेगी. इससे सरकारी जमीन पर कब्जे, रिकॉर्ड गड़बड़ी और फर्जीवाड़े पर रोक लगाने में मदद मिलेगी. नई तकनीक के जरिए सर्वे प्रक्रिया को और ज्यादा सटीक बनाने की तैयारी है.

जमीन से जुड़े विवाद कम करने के लिए बड़ा बदलाव यह भी किया गया है कि अब लैंड डॉक्यूमेंट सिर्फ ऑनलाइन माध्यम से ही जारी किए जाएंगे. ऑफलाइन रिकॉर्ड देने की व्यवस्था खत्म की जा रही है. इससे रिकॉर्ड में पारदर्शिता बढ़ेगी, फर्जी कागजात पर रोक लगेगी और लोग घर बैठे अपनी जमीन से जुड़े दस्तावेज हासिल कर सकेंगे.


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लेखक के बारे में

Published by: Paritosh shahi

परितोष शाही डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. अभी प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम में काम कर रहे हैं. देश और राज्य की राजनीति, सिनेमा और खेल (क्रिकेट) में रुचि रखते हैं.
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