Bihar Land Registry: रैयतों के लिए जरूरी खबर, जमीन रजिस्ट्री का बदलेगा नियम, कैसे तय होगा सर्किल रेट?

Bihar Land Registry: बिहार में जमीन रजिस्ट्री प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सभी जिलों में भूमि वर्गीकरण पंजी बनाई जाएगी. जमीन की नई श्रेणियों के आधार पर सर्किल रेट तय होंगे. पटना मेट्रो क्षेत्र में हर साल और अन्य जिलों में तीन साल पर समीक्षा होगी. पढे़ं पूरी खबर…

Bihar Land Registry: बिहार में जमीन की खरीद-बिक्री और निबंधन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. अब राज्य के सभी जिलों में अलग से भूमि वर्गीकरण पंजी (Land Classification Register) तैयार की जाएगी. इसके लिए अंचल स्तर पर सर्वे कराया जाएगा और जमीन की वास्तविक श्रेणी तय की जाएगी. निबंधन विभाग ने इस कार्य की जिम्मेदारी जिला पदाधिकारियों और अंचल अधिकारियों को सौंपी है.

हर तीन साल पर होगी समीक्षा

भूमि सर्वे पर बैठक करते अधिकारी, फोटो- एआई जेनरेटेड

निबंधन महानिरीक्षक की ओर से जारी आदेश के अनुसार, भूमि वर्गीकरण पंजी की समीक्षा प्रत्येक तीन वर्ष पर की जाएगी. इस दौरान यह आकलन होगा कि किसी इलाके में विकास कार्यों के कारण जमीन की प्रकृति या उपयोग में बदलाव तो नहीं आया है. यदि किसी क्षेत्र की श्रेणी बदलती है तो सर्वे के आधार पर पंजी में संशोधन किया जाएगा.

पटना मेट्रो क्षेत्र में हर साल होगा सर्वे

पटना मेट्रोपोलिटन क्षेत्र में तेजी से हो रहे शहरी विकास को देखते हुए यहां भूमि वर्गीकरण पंजी का अपडेट हर वर्ष किया जाएगा. विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह पंजी केवल निबंधन विभाग की जरूरतों के लिए होगी और इसे खेसरा पंजी नहीं माना जाएगा.

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चार क्षेत्रों में बांटी गई जमीन

राज्य सरकार ने पूरे बिहार में जमीन की एक समान श्रेणियां तय की हैं. इसके तहत भूमि को चार क्षेत्रों में विभाजित किया गया है-

  1. शहरी क्षेत्र
  2. ग्रामीण क्षेत्र
  3. मेट्रोपोलिटन क्षेत्र
  4. पेरिफेरल (शहर से सटे) क्षेत्र

ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन की सात श्रेणियां तय की गई हैं, जबकि शहरी और पटना मेट्रोपोलिटन क्षेत्र में छह श्रेणियां निर्धारित की गई हैं.

पेरिफेरल क्षेत्र का सर्किल रेट होगा अलग

शहर से सटे पेरिफेरल क्षेत्रों में भूमि का वर्गीकरण ग्रामीण क्षेत्र की तरह सात श्रेणियों में होगा. हालांकि यहां की जमीन का सर्किल रेट गांवों से अधिक और शहरों से कम रखा जाएगा. इसकी दर जिला मूल्यांकन समिति तय करेगी. विभागीय योजना के अनुसार अगला व्यापक सर्वे वर्ष 2029 में किया जाएगा.

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ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन की 7 श्रेणियां

  1. व्यावसायिक भूमि
  2. औद्योगिक भूमि
  3. आवासीय भूमि
  4. मुख्य सड़क या हाईवे के दोनों ओर की भूमि
  5. सिंचित भूमि
  6. असिंचित भूमि
  7. बलुआही, पथरीली, दियारा एवं चंवर भूमि

शहरी क्षेत्र में जमीन की 6 श्रेणियां

  1. प्रधान सड़क व्यावसायिक/आवासीय भूमि
  2. मुख्य सड़क व्यावसायिक/आवासीय भूमि
  3. औद्योगिक भूमि
  4. शाखा सड़क व्यावसायिक/आवासीय भूमि
  5. अन्य सड़क या गली की आवासीय भूमि
  6. कृषि एवं गैर-आवासीय भूमि

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लेखक के बारे में

By Aniket kumar

अनिकेत कुमार प्रभात खबर के साथ पिछले दो वर्षों से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. वे मुजफ्फरपुर समेत उत्तर बिहार के आठ प्रमुख जिलों—मुजफ्फरपुर, दरभंगा, सीतामढ़ी, समस्तीपुर, मधुबनी, शिवहर, बेतिया और मोतिहारी—की डिजिटल टीम को लीड करते हैं. पत्रकारिता में उन्हें करीब पांच वर्षों का अनुभव है.

डिजिटल पत्रकारिता के विभिन्न आयामों की समझ रखने वाले अनिकेत वर्तमान में हाइपरलोकल पत्रकारिता पर विशेष रूप से काम कर रहे हैं. हाइपरलोकल, क्राइम और राजनीति से जुड़ी खबरों में उनकी खास रुचि है. इससे पहले वे बिहार और उत्तर प्रदेश की राजनीतिक खबरों पर भी काम कर चुके हैं. खबरों के साथ-साथ वीडियो इंटरव्यू, वीडियो रिपोर्ट और सोशल मीडिया रील्स बनाने का अनुभव भी रखते हैं. YouTube और Instagram के कंटेंट एल्गोरिद्म और डिजिटल ऑडियंस की पसंद को समझते हुए वे खबरों को अलग-अलग डिजिटल फॉर्मेट में प्रस्तुत करने पर भी काम करते हैं.

अपने पत्रकारिता करियर में उन्होंने उत्तर प्रदेश विधानसभा उपचुनाव और बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को जमीनी स्तर पर कवर किया है. प्रभात खबर के साथ बिहार विधानसभा चुनाव कवरेज के दौरान उन्होंने करीब 50 विधानसभा क्षेत्रों का दौरा किया, जहां मतदाताओं से सीधे संवाद किया और प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में चौपाल कार्यक्रम किए. नेताओं से सीधे सवाल पूछने के साथ उन्होंने जनता के बीच जाकर कई जमीनी मुद्दों को वीडियो रिपोर्ट के जरिए सामने रखा. चुनाव के दौरान अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में समय बिताने और लोगों के बीच रहकर रिपोर्टिंग करने के अनुभव उन्हें डेस्क पर खबरों को बेहतर संदर्भ के साथ समझने और प्रस्तुत करने में मदद करते हैं.

प्रभात खबर से पहले वे राजस्थान पत्रिका और न्यूजट्रैक जैसे मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुके हैं. उन्होंने शुरुआती शिक्षा मुजफ्फरपुर में अंग्रेजी माध्यम से प्राप्त की और इसके बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की.

बदलते मीडिया परिदृश्य और AI के दौर की पत्रकारिता को समझने में भी उनकी लगातार रुचि है. वे नए AI टूल्स और तकनीकों को सीखते हैं और उन्हें पत्रकारिता के काम में उपयोग करने के तरीकों पर लगातार प्रयोग करते रहते हैं. खाली समय में साहित्यिक किताबें पढ़ना और वीडियो बनाना उन्हें पसंद है. उनके लिए पत्रकारिता एक लगातार सीखने और बेहतर करने की प्रक्रिया है.

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