Bihar News: बिहार की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को नया स्वरूप देने की तैयारी शुरू हो गई है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य के प्रमुख पुरातात्विक और धार्मिक स्थलों के संरक्षण, वैज्ञानिक सर्वेक्षण और विकास को लेकर अधिकारियों को विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया है.
सरकार की योजना है कि बोधगया, सुल्तानगंज, मंदार और केसरिया स्तूप जैसे ऐतिहासिक स्थलों को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आकर्षण का केंद्र बनाया जाए.
पुरातत्वविदों की टीम ने सीएम को सौंपी रिपोर्ट
मंगलवार को देश के वरिष्ठ पुरातत्वविदों और विशेषज्ञों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात की. इस दौरान कैमूर स्थित मां मुंडेश्वरी मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों के विस्तृत सर्वेक्षण की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई.
प्रतिनिधिमंडल में पद्मश्री डॉ. केके मोहम्मद, प्रोफेसर रजत सान्याल, प्रो. अनिल कुमार, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) पटना के अधीक्षण पुरातत्वविद् डॉ. हरिओम शर्मा और विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह समेत कई विशेषज्ञ शामिल थे.
केसरिया स्तूप के शेष हिस्से का होगा वैज्ञानिक उत्खनन
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने विश्व के सबसे बड़े बौद्ध स्तूपों में शामिल केसरिया स्तूप के बाकी हिस्सों का वैज्ञानिक उत्खनन कराने का निर्देश दिया.
जानकारों के मुताबिक अब तक स्तूप का केवल एक हिस्सा ही खोदा गया है. इसके बड़े क्षेत्र में अभी भी महत्वपूर्ण पुरातात्विक अवशेष मिलने की संभावना है. ऐसे में वैज्ञानिक उत्खनन से कई नई ऐतिहासिक जानकारियां सामने आ सकती हैं.
महाबोधि मंदिर परिसर के आसपास होगा हाईटेक सर्वे
मुख्यमंत्री ने बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर परिसर और उसके आसपास आधुनिक तकनीक से सर्वे कराने का भी निर्देश दिया है.
इसके लिए लाइट डिटेक्शन एंड रैंगिंग (LiDAR) और ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (GPR) तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा. इन तकनीकों की मदद से जमीन के अंदर मौजूद पुरातात्विक संरचनाओं और अवशेषों का पता लगाया जा सकेगा.
कैमूर के प्राकृतिक और प्रागैतिहासिक स्थलों पर भी फोकस
बैठक में कैमूर क्षेत्र के तिलहाड़ कुंड, करकटगढ़ और अन्य प्राकृतिक व प्रागैतिहासिक महत्व के स्थलों के विकास पर भी चर्चा हुई.
सरकार इन सभी स्थलों को एकीकृत रूप से विकसित करने की योजना बना रही है. साथ ही भविष्य में इन्हें यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने की दिशा में भी प्रयास किए जाएंगे.
बिहार की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें
सुल्तानगंज और मंदार के विकास पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री ने सुल्तानगंज और मंदार क्षेत्र के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले स्थलों के संरक्षण और समग्र विकास पर भी विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि इन स्थलों की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को बेहतर तरीके से प्रस्तुत किया जाए, ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ सके.
धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को मिलेगी नई रफ्तार
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार की ऐतिहासिक धरोहरें राज्य की सबसे बड़ी ताकत हैं. इन स्थलों का संरक्षण और आधुनिक विकास जरूरी है.
सरकार का लक्ष्य है कि बिहार की प्राचीन विरासत को दुनिया के सामने नए रूप में पेश किया जाए. इससे धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और राज्य की वैश्विक पहचान भी मजबूत होगी.
