Bihar Township: ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप के लिए जमीन का सर्वे पूरा हो चुका है. अब दूसरे चरण में मौके पर जुटाई गई जमीन की जानकारी को सरकारी रिकॉर्ड से मिलाया जाएगा. इसमें देखा जाएगा कि जमीन मौके पर कितनी है और सरकारी कागजों में उसका क्षेत्रफल कितना दर्ज है. जमीन की स्थिति भी जांची जाएगी.
हर भूखंड की अलग जानकारी होगी
टाउनशिप में आने वाले हर भूखंड का अलग डेटा तैयार किया जाएगा. इसमें मौके पर मिली जमीन का क्षेत्रफल और सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज क्षेत्रफल दोनों शामिल होंगे. इसके साथ यह भी देखा जाएगा कि जमीन किसके नाम दर्ज है और वह किस श्रेणी में आती है.
जमीन का नक्शा भी तैयार होगा
सर्वे के बाद तैयार किए गए नक्शे को अंचल स्तर पर मौजूद सरकारी रिकॉर्ड से मिलाया जाएगा. नक्शा सर्वे नंबर के आधार पर तैयार किया जाएगा. अगर मौके पर जमीन की स्थिति सरकारी रिकॉर्ड से अलग मिलती है तो उस अंतर को भी नक्शे में अलग से दर्ज किया जाएगा.
GIS में भी रखा जाएगा पूरा डेटा
जमीन से जुड़ी पूरी जानकारी भौगोलिक सूचना प्रणाली यानी GIS में भी दर्ज की जाएगी. इससे टाउनशिप की योजना बनाते समय यह साफ रहेगा कि जमीन का असली क्षेत्रफल कितना है, सरकारी रिकॉर्ड में कितना दर्ज है और उसका मालिक कौन है.
सलाहकार एजेंसी चुनी जाएगी
नगर विकास एवं आवास विभाग ने इस काम के लिए सलाहकार एजेंसी चुनने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. एजेंसी को अलग-अलग विभागों की मदद से जमीन से जुड़े नए राजस्व रिकॉर्ड, जमीन के कागज, मुकदमों की जानकारी, नक्शे और जमीन अधिग्रहण से जुड़े दस्तावेज जुटाने होंगे.
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जमीन विवाद कम करने में मिलेगी मदद
विभाग के अनुसार मौके पर मिली जमीन और सरकारी रिकॉर्ड का मिलान करने से आगे जमीन से जुड़े विवाद कम करने में मदद मिलेगी. साथ ही टाउनशिप में किस जगह क्या बनाया जाना है और जमीन का इस्तेमाल कैसे होगा, इसकी योजना बनाने के लिए सही जानकारी मिल सकेगी.
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