Bihar News: (अनुराग प्रधान, पटना)
बिहार के पांच प्रमुख विश्वविद्यालयों में वित्तीय अनियमितताओं और लंबित उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) के मामलों को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है. महालेखाकार (एजी) की ऑडिट रिपोर्ट में सामने आई कमियों की समीक्षा के लिए उच्च शिक्षा निदेशालय में अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें विश्वविद्यालयों के कुलसचिव और वित्त पदाधिकारी शामिल हुए.
ऑडिट में सामने आई कमियों की हुई समीक्षा
बैठक में वर्ष 2021 से नवंबर 2022 के बीच महालेखाकार द्वारा किए गए ऑडिट में दर्ज आपत्तियों और कमियों की वर्तमान स्थिति की विस्तार से समीक्षा की गई. अधिकारियों ने विश्वविद्यालयों से लंबित मामलों की जानकारी ली और उनके शीघ्र निपटारे का निर्देश दिया. उच्च शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया कि वित्तीय मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी ऑडिट आपत्तियों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना होगा.
उपयोगिता प्रमाण पत्र पर विशेष फोकस
समीक्षा बैठक में उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) से जुड़े मामलों को सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा माना गया. कई विश्वविद्यालयों में यूसी से संबंधित मामले लंबे समय से लंबित पाए गए हैं. अधिकारियों ने निर्देश दिया कि जिन विश्वविद्यालयों ने अब तक उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा नहीं किए हैं, वे जल्द से जल्द संबंधित विभाग को आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराएं. विभाग का कहना है कि लंबित यूसी वित्तीय पारदर्शिता में बाधा बन रहे हैं.
अधिकांश आपत्तियों का हुआ निस्तारण
बैठक में बताया गया कि महालेखाकार की रिपोर्ट में दर्ज अधिकांश ऑडिट आपत्तियों का निपटारा कर लिया गया है. हालांकि कुछ मामलों में अब भी कार्रवाई बाकी है. ऐसे मामलों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने का निर्देश दिया गया. सरकार का मानना है कि लंबित मामलों के समाधान से विश्वविद्यालयों की वित्तीय व्यवस्था अधिक व्यवस्थित और जवाबदेह बनेगी.
पारदर्शिता बढ़ाने पर सरकार का जोर
उच्च शिक्षा विभाग ने कहा कि विश्वविद्यालयों में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है. उपयोगिता प्रमाण पत्रों और ऑडिट आपत्तियों के समय पर निपटारे से न केवल वित्तीय अनुशासन मजबूत होगा, बल्कि भविष्य में मिलने वाले अनुदान और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में भी सहूलियत होगी.
कई विश्वविद्यालयों के अधिकारी रहे मौजूद
बैठक में मुंगेर विश्वविद्यालय के वित्त परामर्शी डॉ. सत्यप्रकाश झा, वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के कुलसचिव राजेंद्र प्रसाद, जयप्रकाश विश्वविद्यालय के वित्त पदाधिकारी समेत विभिन्न विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि मौजूद रहे. सभी अधिकारियों को लंबित मामलों के शीघ्र निष्पादन के लिए आवश्यक निर्देश दिए गए.
