Bihar Electric Buses Route: बिहार में पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बेहतर और प्रदूषण कम करने के लिए इलेक्ट्रिक बसों का नेटवर्क बढ़ाने की तैयारी है. पटना, गया, भागलपुर और पूर्णिया समेत कई जिलों में 690 रूट चिह्नित किए गए हैं. इन रूट पर 114 से अधिक इलेक्ट्रिक बसें चलाने की योजना है. परिवहन विभाग ने दिसंबर तक इन बसों का संचालन शुरू करने का लक्ष्य रखा है.
690 रूट पर चलेंगी 114 से ज्यादा इलेक्ट्रिक बसें
राज्य में इलेक्ट्रिक बसों के जरिए लोगों को आने-जाने का एक और बेहतर विकल्प देने की तैयारी चल रही है. इसके लिए अलग-अलग जिलों में 690 रूट की पहचान की गई है. इन रूट पर 114 से ज्यादा इलेक्ट्रिक बसें चलाने की योजना बनाई गई है.
इसमें पटना के साथ गया, भागलपुर, पूर्णिया और दूसरे जिले भी शामिल हैं. बसों की संख्या और उनका रूट वहां की सड़क, आबादी और यात्रियों की जरूरत को देखकर तय किया जाएगा.
गांव से जिला मुख्यालय तक आने-जाने में होगी आसानी
इलेक्ट्रिक बसों का फायदा केवल शहरों तक सीमित नहीं रहेगा. योजना के तहत शहरों के साथ आसपास के इलाकों को भी सार्वजनिक बस सेवा से जोड़ने पर जोर है. इससे गांव और छोटे इलाकों से जिला मुख्यालय या दूसरे प्रमुख स्थानों तक आने-जाने वाले लोगों को सुविधा मिलने की उम्मीद है.
विभाग के मुताबिक, अलग-अलग जिलों में सार्वजनिक परिवहन की जरूरत को ध्यान में रखते हुए रूट चिह्नित किए गए हैं. इन रूट पर बस सेवा शुरू होने से लोगों को नियमित और सुरक्षित सफर का विकल्प मिलेगा.
छोटी और बड़ी दोनों तरह की होंगी बसें
इलेक्ट्रिक बसों के बेड़े में छोटी और बड़ी, दोनों तरह की बसें शामिल होंगी. किस रूट पर किस आकार की बस चलेगी, यह वहां की सड़क और आबादी के हिसाब से तय किया जाएगा.
जहां ज्यादा यात्रियों की जरूरत होगी, वहां बड़ी बसों का इस्तेमाल किया जा सकता है. वहीं कम यात्री वाले या छोटे रूट पर छोटी इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएंगी. इस तरह अलग-अलग जगह की जरूरत के अनुसार बस सेवा तैयार की जाएगी.
दिसंबर तक शुरू करने का लक्ष्य
परिवहन विभाग ने इलेक्ट्रिक बसों का संचालन दिसंबर तक शुरू करने का लक्ष्य रखा है. इसके लिए जरूरी तैयारियां चल रही हैं. बसों के आने और संचालन के साथ चार्जिंग की सुविधा पर भी काम किया जाएगा.
विभाग की योजना है कि जिन रूट पर बसें चलाई जानी हैं, वहां बसों की उपलब्धता, चार्जिंग की व्यवस्था और रोजाना के संचालन की जरूरतों को देखते हुए पूरी व्यवस्था तैयार की जाए. इसी आधार पर योजना को अंतिम रूप दिया जा रहा है.
पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम करने की कोशिश
इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाने का एक बड़ा मकसद पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता कम करना भी है. सार्वजनिक परिवहन में इलेक्ट्रिक बसों के इस्तेमाल से कम प्रदूषण वाला सफर उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है.
अधिकारियों के मुताबिक, अगर ज्यादा लोग निजी वाहनों की जगह बसों का इस्तेमाल करते हैं तो सड़कों पर निजी गाड़ियों का दबाव भी कम हो सकता है. इससे ईंधन की खपत घटाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है.
निजी वाहनों के मुकाबले सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा
राज्य में इलेक्ट्रिक बसों का नेटवर्क बढ़ने से लोगों को सार्वजनिक परिवहन का नया विकल्प मिलेगा. खासकर उन लोगों को फायदा हो सकता है जो रोजाना शहर या जिला मुख्यालय आने-जाने के लिए निजी वाहन या दूसरे साधनों पर निर्भर रहते हैं.
690 रूट और 114 से अधिक प्रस्तावित इलेक्ट्रिक बसों को बिहार में आधुनिक और कम प्रदूषण वाले सार्वजनिक परिवहन को बढ़ाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है.
बिहार में 5.13 लाख से ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहन
परिवहन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, बिहार में अलग-अलग कैटेगरी के कुल 5,13,436 इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकृत हैं. इनमें ई-रिक्शा की संख्या सबसे ज्यादा है.
राज्य में कुल 3,37,116 ई-रिक्शा हैं. ये बिहार में पंजीकृत कुल इलेक्ट्रिक वाहनों का 65.66 प्रतिशत हिस्सा हैं. यानी राज्य में चल रहे इलेक्ट्रिक वाहनों में सबसे बड़ी संख्या ई-रिक्शा की है.
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मोटरसाइकिल और स्कूटर की संख्या भी काफी
बिहार में इलेक्ट्रिक वाहनों की दूसरी बड़ी कैटेगरी मोटरसाइकिल और स्कूटर की है. इनकी कुल संख्या 92,895 है. इसके अलावा राज्य में 61,983 यात्री तीन-पहिया वाहन भी पंजीकृत हैं.
तीन-पहिया मालवाहक इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या 4,093 है. वहीं इलेक्ट्रिक मोटर कारों की संख्या 3,847 दर्ज की गई है.
इसके अलावा बिहार में 3,098 इलेक्ट्रिक मोपेड और 27 इलेक्ट्रिक बसें रजिस्टर्ड हैं.
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