Bihar Cyber Crime: बिहार में साइबर अपराधियों को फर्जी सिम और बैंकिंग नेटवर्क उपलब्ध कराने वाले सिंडिकेट के खिलाफ साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई (CCSU) ने बड़ी कार्रवाई की है. शेखपुरा और नवादा में छापेमारी कर पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है. जांच में दोनों जिलों से साइबर ठगी का एक जैसा तरीका सामने आया है.
पुलिस के अनुसार, आरोपी ग्रामीणों के बायोमेट्रिक का क्लोन तैयार कर उसी के आधार पर सिम जारी करवाते थे. इसके साथ ही लोगों के नाम पर बैंक खाते भी खुलवाए जाते थे. बाद में ये सिम और बैंक खाते साइबर अपराधियों को मोटी रकम में बेच दिए जाते थे. जांच में इन केंद्रों से जारी सिमों का देशभर में 219 साइबर कांडों और करीब 1.07 करोड़ रुपये की ठगी से सीधा लिंक मिला है.
ग्रामीणों के बायोमेट्रिक का बनाते थे क्लोन
पुलिस ने शेखपुरा के अरियरी स्थित गौतम बीघा निवासी विजय कुमार और नवादा में संचालित भोला आधार सेंटर के शेखपुरा निवासी राजीव रंजन को गिरफ्तार किया है. दोनों मामलों में ग्रामीणों को ही निशाना बनाया जाता था.
आरोपी किसी बहाने लोगों का बायोमेट्रिक लेते थे. इसके बाद उसका क्लोन तैयार कर सिम जारी करवाया जाता था. इसी पहचान के आधार पर बैंक खाते भी खोले जाते थे. पुलिस के मुताबिक, एक सिम को 3 हजार से 5 हजार रुपये और एक बैंक खाते को 10 हजार से 25 हजार रुपये तक में साइबर अपराधियों को बेचा जाता था.
शेखपुरा में 235 सिम समेत कई उपकरण बरामद
शेखपुरा में पुलिस ने विजय कुमार के ठिकाने से 235 सिम कार्ड बरामद किए हैं. इसके अलावा 2 लैपटॉप, 5 मोबाइल, 2 फिंगरप्रिंट रीडर, 6 पासबुक, 2 एटीएम कार्ड, 7 आधार-पैन कार्ड, यूपीआई स्कैनर और एक अनाउंसमेंट माइक भी जब्त किया गया है.
जांच में पता चला कि विजय कुमार पीओएस एजेंट के तौर पर काम करता था. उसने कुछ ही महीनों में 40 सिम कार्ड जारी किए थे. इन सिमों से देश के अलग-अलग राज्यों में 60 शिकायतें दर्ज मिली हैं. शिकायतों की जांच में 16.25 लाख रुपये की साइबर ठगी सामने आई है.
भोंपू बजाकर गांवों में करता था मुफ्त सिम पोर्टिंग का प्रचार
विजय कुमार लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए अलग तरीका अपनाता था. वह बाइक से गांव-गांव घूमता था. साथ में अनाउंसमेंट माइक रखता था. इसी के जरिए मुफ्त सिम पोर्टिंग और आकर्षक ऑफर का प्रचार किया जाता था.
ऑफर के नाम पर ग्रामीणों की भीड़ जुटाई जाती थी. इसके बाद कम पढ़े-लिखे लोगों को ई-केवाईसी की प्रक्रिया में उलझाया जाता था. कई मामलों में बायोमेट्रिक अंगूठा लगवाकर अतिरिक्त सिम भी निकाल लिए जाते थे.
एनसीआरपी से मिली शिकायत के आधार पर सीसीएसयू ने मामले की जांच शुरू की थी. जांच आगे बढ़ी तो विजय कुमार द्वारा जारी किए गए सिमों का अलग-अलग राज्यों में दर्ज साइबर अपराधों से कनेक्शन सामने आया.
आधार सुधार और साइबर कैफे की आड़ में चल रहा था खेल
नवादा में पुलिस ने भोला आधार सेंटर और साइबर कैफे पर छापेमारी की. यहां से शेखपुरा निवासी राजीव रंजन को गिरफ्तार किया गया. जांच में सामने आया कि आसपास के गांवों के लोग आधार सुधार और इंटरनेट से जुड़ी सेवाओं के लिए उसके सेंटर पर आते थे.
आरोप है कि इसी का फायदा उठाकर ग्राहकों के बायोमेट्रिक का क्लोन तैयार किया जाता था. इसके बाद उन्हीं की पहचान पर सिम जारी करवाए जाते थे. पुलिस ने मौके से 5 प्रिंटर, 11 एटीएम कार्ड, 10 पासबुक, एक चेकबुक, एक माइक्रो एटीएम, 3 मोबाइल, एचडीएफसी का स्कैनर और 2 बायोमेट्रिक स्कैनर बरामद किए हैं.
बरामद 11 एटीएम कार्ड में 10 फिनो बैंक और एक उज्जीवन बैंक का है.
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96 सिमों से 91.11 लाख रुपये की ठगी का खुलासा
नवादा मामले में जांच के दौरान 96 सिमों का साइबर ठगी से कनेक्शन सामने आया है. आधार सेंटर से जारी 74 सिमों से जुड़ी 125 शिकायतों में 51.81 लाख रुपये की ठगी सामने आई है.
वहीं, साइबर कैफे से जारी 22 सिमों से जुड़े 34 मामलों में 39.29 लाख रुपये की ठगी का पता चला है. दोनों को मिलाकर 91.11 लाख रुपये की साइबर ठगी सामने आई है.
पुलिस को शक है कि ग्रामीणों के नाम पर पेमेंट बैंक में खाते खोलकर साइबर ठगी की रकम भी निकाली जाती थी. मौके से मिले एटीएम कार्ड और माइक्रो एटीएम ने इस नेटवर्क की एक और कड़ी सामने ला दी है.
219 साइबर कांडों से जुड़ा नेटवर्क
शेखपुरा और नवादा के दोनों केंद्रों से जारी फर्जी सिमों की जांच में देशभर में दर्ज साइबर अपराधों का लिंक सामने आया है. पुलिस के अनुसार, इन सिमों से 219 साइबर कांड जुड़े मिले हैं.
इन मामलों में कुल 1.07 करोड़ रुपये की ठगी का सीधा लिंक सामने आया है. अब पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े दूसरे लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है. जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि फर्जी सिम और बैंक खातों की सप्लाई आखिर किन साइबर अपराधियों तक पहुंचती थी.
