बिहार के इन 9 कमजोर पुलों से रोज गुजर रहे हजारों वाहन, IIT रिपोर्ट के बाद अलर्ट मोड में सरकार

Bihar Bridge: बिहार में पुल हादसों के बीच आईआईटी पटना की स्ट्रक्चरल ऑडिट रिपोर्ट ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है. जांच में 9 बड़े पुलों में गंभीर तकनीकी खामियां मिली हैं. अब सरकार ड्रोन, सेंसर और डिजिटल मॉनिटरिंग के जरिए बड़े स्तर पर पुलों की सुरक्षा जांच और मरम्मत अभियान चला रही है.

Bihar Bridge: बिहार में लगातार हो रहे पुल हादसों और कमजोर इन्फ्रास्ट्रक्चर को लेकर अब सरकार सतर्क हो गई है. आईआईटी पटना की ताजा स्ट्रक्चरल ऑडिट रिपोर्ट ने राज्य की चिंता बढ़ा दी है. जांच में बिहार के 9 बड़े पुलों में गंभीर तकनीकी और संरचनात्मक कमजोरियां सामने आई हैं. रिपोर्ट मिलते ही पथ निर्माण विभाग, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम और संबंधित एजेंसियां अलर्ट मोड में आ गई हैं. जिन पुलों में खामी पाई गई है, वहां तुरंत तकनीकी जांच, मरम्मत और सुरक्षा उपाय शुरू करने की तैयारी की जा रही है.

आईआईटी पटना की रिपोर्ट में कई पुलों के पिलर, स्लैब, बेयरिंग, एक्सपेंशन जॉइंट और सुपर स्ट्रक्चर में दरार, जंग, कंपन और तकनीकी कमजोरी का जिक्र किया गया है. कुछ पुलों की लोड क्षमता को लेकर भी सवाल उठे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ते ट्रैफिक, भारी वाहनों के दबाव और समय पर रखरखाव नहीं होने से पुराने पुल तेजी से कमजोर हो रहे हैं.

हर दिन हजारों वाहन गुजरते हैं इन पुलों से

जिन पुलों में खामियां मिली हैं, उनमें कई ऐसे हैं जहां से रोजाना हजारों छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं. ऐसे में रिपोर्ट के बाद सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है. हाल के महीनों में बिहार में कई पुल गिरने या क्षतिग्रस्त होने की घटनाओं ने पहले ही सरकार पर दबाव बढ़ाया था. भागलपुर के विक्रमशिला सेतु पर स्लैब टूटने की घटना के बाद बड़े स्तर पर समीक्षा हुई थी.

सरकार ने अब 250 मीटर से ज्यादा लंबे 85 बड़े पुलों की वैज्ञानिक जांच शुरू कराई है. दक्षिण बिहार के 45 पुलों की जिम्मेदारी आईआईटी पटना को दी गई है, जबकि उत्तर बिहार के 40 पुलों का ऑडिट आईआईटी दिल्ली कर रहा है. इसका मकसद हादसा होने के बाद कार्रवाई नहीं, बल्कि पहले से खतरे की पहचान करना है.

बिहार स्टेट ब्रिज मेंटेनेंस पॉलिसी-2025 लागू

राज्य सरकार ने बिहार स्टेट ब्रिज मेंटेनेंस पॉलिसी-2025 लागू कर दी है. इसके तहत अब पुलों की निगरानी केवल सामान्य निरीक्षण से नहीं होगी, बल्कि आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा. ड्रोन सर्वे, सेंसर आधारित मॉनिटरिंग, डिजिटल मैपिंग और कंपन मापने वाली मशीनों से पुलों की असली स्थिति जानी जाएगी. बाढ़, नमी और भारी ट्रैफिक के असर का भी तकनीकी विश्लेषण होगा.

इस पूरे ऑडिट और मॉनिटरिंग सिस्टम पर सरकार करीब 16 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च कर रही है. जिन पुलों को क्रिटिकल श्रेणी में रखा गया है, वहां जल्द रेट्रोफिटिंग और मरम्मत शुरू की जा सकती है. जरूरत पड़ने पर कुछ पुलों पर भारी वाहनों की आवाजाही सीमित करने पर भी विचार किया जा रहा है.

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बिहार के लिए पुल क्यों हैं बेहद अहम

गंगा, कोसी, गंडक, सोन और बागमती जैसी बड़ी नदियों वाले बिहार में पुल सिर्फ सड़क ढांचा नहीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा जिंदगी और व्यापार की रीढ़ हैं. सरकारी आंकड़ों के अनुसार राज्य में करीब 4000 पुल हैं, जिनमें 500 से ज्यादा बड़े पुल शामिल हैं. इनमें कई पुल दशकों पुराने हैं और मौजूदा ट्रैफिक दबाव के हिसाब से उन पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है.

पिछले वर्षों में पुल गिरने की घटनाओं के बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी चिंता जताई थी और राज्य सरकार से जवाब मांगा था. अदालत ने नियमित स्ट्रक्चरल ऑडिट और जवाबदेही तय करने पर जोर दिया था. इसके बाद अब सरकार ने डिजिटल डेटा बैंक और रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम की दिशा में काम तेज कर दिया है.

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लेखक के बारे में

Published by: Paritosh shahi

परितोष शाही डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. अभी प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम में काम कर रहे हैं. देश और राज्य की राजनीति, सिनेमा और खेल (क्रिकेट) में रुचि रखते हैं.
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