Bihar Bhumi: उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने एक अंचल अधिकारी (CO) को भ्रष्टाचार और गंभीर अनियमितताओं के आरोपों में तत्काल प्रभाव से “ऑन द स्पॉट” हटाने का निर्देश दिया है. उन्होंने प्रधान सचिव को स्पष्ट आदेश दिया कि आरोपी अधिकारी को मौजूदा पद से हटाकर शोकॉज जारी किया जाए और विधिसम्मत विभागीय कार्रवाई तुरंत शुरू की जाए.
रिश्वतखोरी के आरोप ने खोली पोल
CO पर अपने निजी गार्ड के माध्यम से 25 हजार रुपये रिश्वत लेने का आरोप है. शिकायतकर्ता का दावा है कि जमीन से जुड़े मामले के निपटारे के बदले यह रकम मांगी गई और गार्ड के जरिए वसूली भी की गई. आरोप यह भी है कि कोर्ट के आदेश होने के बावजूद CO ने न तो उनका पालन किया और न ही पीड़ित को राहत दिलाने की कोई ठोस पहल की. इससे नाराज होकर पीड़ित ने उच्च स्तर पर शिकायत दर्ज कराई.
भू-माफियाओं को संरक्षण देने का गंभीर आरोप
शिकायतों में CO पर भू-माफियाओं को खुला संरक्षण देने की बात भी सामने आई है.कहा गया है कि वैध दस्तावेज होने के बावजूद आम लोगों की फाइलें महीनों तक लंबित रखी जाती थीं, जबकि प्रभावशाली और माफियाओं से जुड़े मामलों में नियमों को ताक पर रखकर तेजी से फैसले किए जाते थे. यहां तक कि CO द्वारा खुद फोन कर पैसों की मांग और दबाव बनाने के आरोप भी लगाए गए हैं.
कई शिकायतों से बढ़ी कार्रवाई की गंभीरता
मामला तब और गंभीर हो गया जब एक के बाद एक कई शिकायतें विभाग तक पहुंचीं. अलग-अलग पीड़ितों ने लिखित और मौखिक रूप से CO की कार्यशैली को संदिग्ध बताया. कुछ मामलों में कोर्ट के आदेशों की अवहेलना का भी जिक्र किया गया, जिससे सरकार और प्रशासन की छवि को नुकसान पहुंचने की बात कही गई.
विजय सिन्हा का साफ संदेश
डिप्टी CM विजय सिन्हा पहले से ही राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाए हुए हैं. जनसंवाद कार्यक्रमों और समीक्षा बैठकों में वे कह चुके हैं कि विभाग में किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार, दलाली और भू-माफिया से गठजोड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. इसी नीति के तहत उन्होंने संबंधित CO को तुरंत हटाने और निष्पक्ष जांच कराने का निर्देश दिया है.
विभागीय स्तर पर प्रारंभिक जांच शुरू कर दी गई है. जल्द ही CO से स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है. जांच में रिश्वतखोरी, पद के दुरुपयोग और भू-माफियाओं को संरक्षण देने जैसे बिंदुओं पर फोकस किया जाएगा. आरोप सही पाए जाने पर निलंबन से लेकर बर्खास्तगी तक की कार्रवाई संभव है.
