PHOTOS: बिहार के 4 प्रसिद्ध मंदिर, जहां दर्शन के लिए देशभर से आते हैं श्रद्धालु, जानिए इनकी खासियत

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PHOTOS: बिहार के 4 प्रसिद्ध मंदिर, जहां दर्शन के लिए देशभर से आते हैं श्रद्धालु, जानिए इनकी खासियत
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बिहार के 4 प्रसिद्ध मंदिर

बिहार में कई ऐसे प्राचीन मंदिर हैं, जिनका संबंध रामायण, महाभारत और अन्य पौराणिक मान्यताओं से माना जाता है. हर साल लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं. अगर आप भी धार्मिक यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो बिहार के इन 4 प्रसिद्ध मंदिरों के बारे में जरूर जानिए.

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जानकी मंदिर की तस्वीर

जानकी मंदिर, सीतामढ़ी- माता सीता की जन्मस्थली

सीतामढ़ी शहर से करीब 5 किलोमीटर दूर पुनौरा गांव में स्थित जानकी मंदिर को माता सीता की जन्मस्थली माना जाता है. पौराणिक मान्यता के अनुसार, मिथिला में भीषण अकाल पड़ने पर राजा जनक ने भगवान शिव की पूजा के बाद खेत में हल चलाया था. उसी दौरान धरती से एक पात्र निकला, जिसमें शिशु रूप में माता सीता मिली थीं. यहीं पास में हलेश्वरनाथ मंदिर और जानकी कुंड भी है. मान्यता है कि जानकी कुंड में स्नान करने से संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है. श्रद्धालु यह भी मानते हैं कि इसी क्षेत्र में माता सीता का विवाह हुआ था और इसका साक्षी एक प्राचीन पीपल का पेड़ आज भी मौजूद है. पटना से इसकी दूरी करीब 138 किलोमीटर है. यहां सड़क और रेल, दोनों मार्गों से आसानी से पहुंचा जा सकता है.

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विष्णुपद मंदिर की तस्वीर

विष्णुपद मंदिर, गया- जहां हैं भगवान विष्णु के चरणचिह्न

गया में फल्गु नदी के किनारे स्थित विष्णुपद मंदिर देश के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में गिना जाता है. इसका उल्लेख रामायण में भी मिलता है. करीब 100 फीट ऊंचे इस मंदिर में भगवान विष्णु के लगभग 40 सेंटीमीटर लंबे चरणचिह्न सुरक्षित हैं. इनमें शंख, चक्र और अन्य पवित्र चिन्ह बने हुए हैं. यह मंदिर एक विशाल चट्टान पर बना है और चरणचिह्न पर चांदी की परत चढ़ी हुई है. पितृपक्ष मेले के दौरान यहां लाखों श्रद्धालु अपने पूर्वजों का पिंडदान और तर्पण करने आते हैं. मान्यता है कि यहां दर्शन करने से पितरों को मोक्ष मिलता है. पटना से इसकी दूरी करीब 100 किलोमीटर है.

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महावीर मंदिर, पटना की तस्वीर

महावीर मंदिर, पटना- हर दिन उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़

पटना जंक्शन के ठीक सामने स्थित महावीर मंदिर बिहार के सबसे प्रसिद्ध हनुमान मंदिरों में शामिल है. कहा जाता है कि 1980 के दशक में मंदिर का भव्य पुनर्निर्माण किया गया. यहां मिलने वाला प्रसाद 'नैवेद्यम' देशभर में प्रसिद्ध है. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्चे मन से दर्शन करने और प्रसाद ग्रहण करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं. इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहां हनुमान जी की दो प्रतिमाएं एक साथ स्थापित हैं. मंगलवार और शनिवार को यहां सबसे ज्यादा भीड़ रहती है.

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पटन देवी मंदिर, पटना की तस्वीर

पटन देवी मंदिर, पटना- 51 शक्तिपीठों में शामिल

पटना का पटन देवी मंदिर शक्ति उपासकों के लिए बेहद खास माना जाता है. मान्यता है कि यह 51 शक्तिपीठों में से एक है. पौराणिक कथा के अनुसार, यहां माता सती की जांघ गिरी थी. मंदिर में महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती की प्रतिमाएं स्थापित हैं. स्थानीय लोगों का विश्वास है कि मां पटन देवी पूरे शहर की रक्षा करती हैं. इसी कारण उन्हें रक्षिका भगवती पटनेश्वरी भी कहा जाता है. नवरात्र के दौरान यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. विवाह के बाद नवविवाहित जोड़े भी आशीर्वाद लेने यहां पहुंचते हैं.

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लेखक के बारे में

By अभिनंदन पांडेय

भोपाल से शुरू हुई पत्रकारिता की यात्रा ने बंसल न्यूज (MP/CG) और दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अनुभव लेते हुए अब प्रभात खबर डिजिटल तक का मुकाम तय किया है. वर्तमान में पटना में कार्यरत हूं और बिहार की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने का प्रयास कर रहा हूं. गौतम बुद्ध, चाणक्य और आर्यभट की धरती से होने का गर्व है. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति, और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि रखता हूं. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स के साथ प्रयोग करना पसंद है.
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