श्रीनगर में सीआरपीएफ कैंप पर आतंकी हमले में बिहार का एक और लाल शहीद

जम्मू/आरा/पीरो : जम्मू के सुजवान स्थित आर्मी कैंप में अभी ऑपरेशन जारी था कि आतंकियों ने सोमवार की सुबह श्रीनगर शहर के कर्ण नगर इलाके में सीआरपीएफ के कैंप पर हमले का प्रयास किया. यहां आतंकियों के साथ मुठभेड़ में सीआरपीएफ का एक जवान शहीद हो गया. शहीद जवान मो मोजाहिद खान बिहार के भोजपुर […]

जम्मू/आरा/पीरो : जम्मू के सुजवान स्थित आर्मी कैंप में अभी ऑपरेशन जारी था कि आतंकियों ने सोमवार की सुबह श्रीनगर शहर के कर्ण नगर इलाके में सीआरपीएफ के कैंप पर हमले का प्रयास किया. यहां आतंकियों के साथ मुठभेड़ में सीआरपीएफ का एक जवान शहीद हो गया. शहीद जवान मो मोजाहिद खान बिहार के भोजपुर जिले के पीरो के निवासी थे. मंगलवार की शाम तक शहीद का शव पीरो पहुंचने की संभावना जतायी जा रही है. हमले की जिम्मेवारी लश्कर-ए-तैयबा ने ली है.

हथियारों से लैस आतंकवादियों ने सोमवार की सुबह करीब साढ़े चार बजे एसएमएचएस अस्पताल के पास स्थित सीआरपीएफ कैंप पर हमले का प्रयास किया. संतरी ने उन्हें देख लिया और उसने उन्हें चेतावनी देते हुए रुकने का संकेत किया. इसके बाद आतंकी पास में बने एक मकान में छुप गये और गोलियां दागने लगे. मुठभेड़ में सीआरपीएफ की 49वीं बटालियन का जवान मो मोजाहिद खान (पीरो गांव निवासी मो खैर खान का पुत्र) घायल हो गया था, जिसकी मौत अस्पताल में हो गयी. आतंकियों की संख्या दो थी. इस बीच पूरे श्रीनगर में प्रशासन ने एलर्ट घोषित करते हुए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है.

सीआरपीएफ के आईजी रविदीप सहाय ने जानकारी दी कि दो आतंकियों ने सुबह सीआरपीएफ मुख्यालय में घुसने की कोशिश की थी. वे मुख्यालय में प्रवेश नहीं कर सके. लेकिन, मुख्यालय के पास एक इमारत में घुस गये. वहां से पांच परिवारों को निकाल लिया गया है. 23वीं वाहिनी के मुख्यालय से कुछ ही दूरी पर खाली पड़े मकानों को जब सुरक्षाबल खंगालने लगे तो एक मकान में छिपे आतंकियों ने उन पर गोली चला दी. जवानों ने भी जवाबी फायर किया. मालूम हो कि छह फरवरी को आतंकवादियों ने एसएमएचएस अस्पताल से लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी नवीद जट उर्फ अबु हंजला को पुलिस हिरासत से छुड़ा लिया था.

शहीद होने से पहले घर पर की बात
शहीद होने से कुछ समय पहले उसने अपने घरवालों से फोन पर बातचीत की थी और वहां के घटना की जानकारी दी थी, लेकिन कुछ ही देर बाद आतंकियों से लोहा लेते हुए वह शहीद हो गया. जैसे ही बटालियन की ओर से इसकी जानकारी उसके परिजनों को मैसेज से मिली, घर में कोहराम मच गया. घटना की खबर मिलते ही लोगों की भीड़ शहीद के घर जुटनी शुरू हो गयी है.

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