अपराधी नहीं समाजसेवी था रिटायर्ड जवान का बेटा भरत, बाढ़ पीड़ितों की मदद की, परिजनों ने क्या-क्या बताया?

Bharat Tiwari Encounter: भोजपुर में भरत तिवारी के एनकाउंटर पर अब सवाल खड़े किए जा रहे हैं. भरत के परिजनों का कहना है कि वह अपराधी नहीं था. उसने बाढ़ पीड़ितों की मदद की. लेकिन पुलिस ने उसका एनकाउंटर कर दिया. इस मामले में एक थानाध्यक्ष राजेश मालाकार को सस्पेंड कर दिया गया.

Bharat Tiwari Encounter: भोजपुर में भरत तिवारी के एनकाउंटर का मामला अब गहराता जा रहा है. शाहपुर थाना इलाके के बेलौटी गांव के पास एसटीएफ और भोजपुर पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में गोली लगने से भरत तिवारी ने पटना पीएमसीएच में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. इसके बाद भरत के परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा. लोगों ने बीच रोड पर भरत के शव को रखकर जमकर हंगामा किया.

भरत के बारे में परिजनों ने क्या बताया?

भरत तिवारी के बारे में उसके परिजनों ने साफ कहा कि वह अपराधी नहीं था. बल्कि समाजसेवक था. वह एक रिटायर्ड जवान का बेटा था. भरत ने कई लोगों की मदद की थी. खासकर बाढ़ पीड़ितों की उसने मदद की थी. भोजपुर के जवइनियां में हर साल बाढ़ से तबाही का मंजर देखा जाता है. कई लोगों के घर गंगा में समा जाते हैं. बाढ़ के दौरान गांव के लोगों की उसने मदद की.

भरत के परिजन ने एक मीडिया चैनल से बात करते हुए बताया कि वह बीएससी की परीक्षा पास कर चुका था. इसके बाद वह जॉब ढूंढ रहा था. लेकिन जॉब नहीं मिलने की वजह से उसने समाज सेवा करनी शुरू कर दी. इतना ही नहीं, लोगों की सेवा के लिए वह प्रसासनिक अधिकारियों से भी मिलता था. लोग खुद भरत के पास मदद के लिए आते थे.

मां बोली- खून के बदले खून चाहिए, SDM पर आरोप

भरत की मां ने बताया कि भरत को धोखे से बुलाकर मारा गया है. उसे जहर दिया गया था. भरत पर फायरिंग के बाद उसे बंदूक से मारा भी गया. उन्होंने यह भी कहा कि खून के बदले खून चाहिए. साथ ही एसडीएम पर भी आरोप लगाया. भरत की मां ने बताया कि भरत की जान एसडीएम की वजह से गई. एसडीएम ने जान से मरवाने की धमकी दी थी.

ग्रामीणों ने पुलिस पर लगाया आरोप

कुछ ग्रामीणों का आरोप है कि सरेंडर करने के बाद पुलिस की ओर से उसे गोली मारी गई है. ग्रामीणों का कहना था कि वह कोई अपराधी नहीं था, जो इतनी जल्दी उसकी गिरफ्तारी जरूरी थी. परिवार के सहयोग से भी उसे एक दो दिनों बाद पकड़ा जा सकता था, या उसे घर में बंद कर भी रखा जा सकता था, लेकिन पुलिस ने उसे गिरफ्तार न कर एनकाउंटर ही कर दिया.

इस तरह किया गया भरत का एनकाउंटर

जानकारी के मुताबिक, मुठभेड़ के दौरान भरत फेसबुक पर लाइव था. ऐसे में मुठभेड़ का सोशल मीडिया पर लाइव प्रसारण हो रहा था, लाइव वीडियो में भरत को फायरिंग करते देखा जा रहा है. उसे कहते सुना जा रहा है कि लाइव एनकाउंटर हो रहा है. उसे यह भी कहते सुना जा रहा था कि देखिए इतने सारे बुलेट प्रूफ जैकेट पहने पुलिस वाले एक देशभक्त को मारने पहुंचे हैं.

भरत की हरकत देख उसे घर में बंद कर दिया गया था, लेकिन वह छत पर चढ़कर पुलिस को टारगेट कर फायरिंग करने लगा था. वह पुलिस कर्मियों को लगातार गाली और धमकी भी दे रहा था. उसका भी वीडियो वायरल हुआ था. उसके बाद उसे गिरफ्तार करने की योजना तैयार की गई.

उसके लिए एसटीएफ को साथ शाहपुर थाने की पुलिस बुधवार की सुबह बिलौटी पहुंची, लेकिन भरत पुलिस को देख फायरिंग करते भागने लगा. जवाबी कार्रवाई के तहत पुलिस की ओर से भी फायरिंग की गई. उसमें उसे दो गोलियां लगी और वह जख्मी हो गया. बाद में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.

एक थानाध्यक्ष को किया गया निलंबित

बताया जा रहा है कि भरत भूषण तिवारी को काबू करने में जुटी पुलिस की ओर से पहले तो काफी संयम बरती गई, लेकिन बाद में युवक की हरकत और लगातार फायरिंग करने के कारण पुलिस को गोली चलाने के लिए बाध्य होना पड़ा. लेकिन अब पुलिस एनकाउंटर पर सवाल उठने लगे हैं.

मामले में शाहपुर थानाध्यक्ष राजेश मालाकार को एसपी मिस्टर राज ने कर्तव्य में लापरवाही बरतने पर निलंबित कर दिया है. परिजनों ने आरोप लगाया है कि सरेंडर करने के बाद भरत भूषण तिवारी को गोली मारी गई है. भोजपुर एसपी राज ने बताया कि पुलिस की ओर से उसे समर्पण करने के लिए कहा जा रहा था, उसके बावजूद भरत फायरिंग कर रहा था. इसके बाद पुलिस ने आत्मरक्षा और आम लोगों की सुरक्षा को देखते हुए जवाबी फायरिंग की. ऐसे में आगे इस मामले में क्या कार्रवाई होती है, देखने वाली बात होगी.

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Published by: Preeti Dayal

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