Bhagalpur. बिहार संग्रहालय के सहयोग से जून में सजेगी मंजूषा कला कार्यशाला
मंजूषा कला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पटल पर नयी पहचान दिलाने के लिए 'दिशा ग्रामीण विकास मंच' की ओर से मंजूषा कला के विकास, कलाकारों के भविष्य और उनके लिए रोजगार के नए अवसरों लिए कार्यशाला होगी.
भागलपुर से दीपक राव की रिपोर्ट :
मंजूषा कला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पटल पर नयी पहचान दिलाने के लिए ”दिशा ग्रामीण विकास मंच” की ओर से मंजूषा कला के विकास, कलाकारों के भविष्य और उनके लिए रोजगार के नए अवसरों लिए कार्यशाला होगी..
14 और 15 जून को सजेगी कार्यशाला
वरिष्ठ मंजूषा कलाकार उलूपी झा ने बताया कि आगामी 14 और 15 जून को बिहार संग्रहालय के सहयोग से मंजूषा कला पर केंद्रित एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया जायेगा. इस कार्यशाला को लेकर कलाकारों में भारी उत्साह है. उन्हें उम्मीद है कि इस पहल से मंजूषा कला अब उपेक्षित नहीं रहेगी और अंग प्रदेश की सीमा को पार कर वैश्विक मंच पर अपना परचम लहरायेगी.
60 कलाकार उकेरेंगे बिहुला-विषहरी की गाथा
दिशा ग्रामीण विकास मंच के सचिव डॉ मनोज मीता ने बताया कि इस कार्यशाला में भागलपुर प्रमंडल के 60 से अधिक चुनिंदा कलाकारों को शामिल किया जायेगा. कार्यशाला के दौरान ”बाला बिहुला” की पारंपरिक लोकगाथा के 60 से अधिक अलग-अलग खंड (एपिसोड) तय किये जायेंगे, जिन्हें कलाकार मंजूषा शैली के दायरे में अपनी कूची से जीवंत करेंगे.
परंपरा के साथ नवाचार भी है जरूरी
कार्यशाला को लेकर हुई बैठक में विशेषज्ञों ने कलाकारों को कला और आजीविका से जुड़े कई अहम सुझाव दिये हैं. कला केंद्र के प्राचार्य राहुल ने कलाकारों को उत्कृष्ट कलाकृतियों की रचना के लिए जरूरी और तकनीकी गुर बताये हैं. वरिष्ठ पत्रकार प्रसून लतांत ने कहा कि मंजूषा कलाकारों को अपनी पारंपरिक जड़ों को मजबूती से थामे रखते हुए आधुनिक नवाचार (इन्नोवेशन) की उड़ान भी भरनी होगी. दृष्टि विहार के सचिव दिलीप ने ग्रामीण कलाकारों की बढ़ती भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि इस कला के माध्यम से कलाकारों के सामने खड़ा आजीविका का संकट भी दूर हो सकेगा. दिशा ग्रामीण विकास मंच के अध्यक्ष मनोज कुमार ने कहा कि मंजूषा कला के चौमुखी विकास से ही अंग और अंगिका संस्कृति के विकास के नए द्वार खुलेंगे.