विक्रमशिला सेतु के एक्सपेंशन जॉइंट के बीच गैप बढ़ने के मामले में पथ निर्माण मंत्री ईं कुमार शैलेंद्र ने स्थिति स्पष्ट की है. मंत्री ने आश्वस्त करते हुए बताया कि विक्रमशिला सेतु पूरी तरह सुरक्षित है और एक्सपेंशन ज्वाइंट के बीच गैप नहीं बढ़ा है. सेतु पर हल्के वाहनों का परिचालन पूरी तरह निर्बाध और सुचारू रूप से चालू है. इसमें किसी भी प्रकार का कोई खतरा नहीं है.उन्होंने सेतु के एक्सपेंशन जॉइंट के बीच गैप बढ़ने को लेकर प्रिंट व डिजिटल मीडिया में प्रसारित हो रही खबरों को लेकर बताया कि विभाग के अभियंताओं को तुरंत स्थल पर जाकर जांच करने का निर्देश दिया गया. अभियंताओं द्वारा ज्वाइंट की भौतिक मापी की गयी. सेतु के ऊपरी व निचले हिस्से की ड्रोन फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी के माध्यम से गहन तकनीकी जांच सुनिश्चित की गयी. भागलपुर की तरफ औसतन गैप 90-100 एमएम और नवगछिया की तरफ औसतन 40-50 एमएम पाया गया, जो पूर्व की स्थिति से यथावत है.
गत तीन मई की मध्यरात्रि में पाया दो व तीन के स्पैन की 34 मीटर लंबाई का सस्पेंडेड भाग क्षतिग्रस्त हो गया था. इसके बाद आइआइटी, पटना द्वारा सौंपी गयी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर बीआरओ की टीम को डिस्ट्रेस स्पेन में बेली ब्रिज निर्माण कराने का अनुरोध किया गया. फिर चार बेली ब्रिज का निर्माण पुल के ऊपर कराया गया है. निर्माण के दौरान विजुअल इंस्पेक्शन के आधार पर स्पेनों के एक्सपेंशन ज्वाइंट में उत्पन्न गैप की मापी की गयी थी. विभाग द्वारा विक्रमशिला सेतु की सतत निगरानी की जा रही है, ताकि आवागमन में कोई व्यवधान न हो. पथ निर्माण विभाग राज्य के बुनियादी ढांचे को विकसित करने और आम जनमानस की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.बेली ब्रिज पर जारी है आवागमन
बिहार राज्य पल निर्माण निगम लिमिटेड के एमडी जितेंद्र कुमार ने बताया कि भागलपुर में विक्रमशिला सेतु और उसके बेली ब्रिज पर आवागमन जारी है. पुल में बुधवार को किसी प्रकार की दरार की कोई घटना नहीं हुई है.विक्रमशिला सेतु पर लगता रहा जाम, ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी भी बेहाल
विक्रमशिला सेतु पर परिचालन शुरू होने के बाद बाद चौथे दिन भी लोगों को जाम की समस्या का सामना करना पड़ा. वहीं दूसरी ओर पुलिसकर्मियों के लिए लगाये गये अस्थायी टेंट तेज आंधी-तूफान में पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया. बांस और तिरपाल से बना यह ढांचा सड़क पर बिखरा पड़ा रहा. पुलिसकर्मी खुले आसमान के नीचे ड्यूटी करने को मजबूर हैं. वहीं ट्रैफिक थानाध्यक्ष ने कहा कि यातायात व्यवस्था सामान्य रूप से जारी है.पोल संख्या 95 से बेली ब्रिज तक वाहनों की लंबी कतार
बुधवार को नवगछिया से भागलपुर जाने वाली लेन में पोल संख्या 95 से लेकर बेली ब्रिज तक वाहनों की लंबी कतार लगी रही. सवारी से लेकर दूध और सब्जी लेकर जाने वाले वाहन घंटों जाम में फंसे रहे. कई लोगों को पैदल चलकर पुल पार करना पड़ा. स्थानीय निवासी रंजीत यादव ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अगर किसी को इमरजेंसी हो जाये या एम्बुलेंस फंस जाये, तो समस्या गंभीर हो सकती है. दो-दो घंटे से लोग जाम में फंसे हैं. इससे अच्छा था कि नाव सेवा भी जारी रहती, ताकि लोगों को विकल्प मिलता.पुल की स्थिति को लेकर लोगों में डर
दैनिक रूप से पुल से आने-जाने वाले लोगों का कहना है कि पुल के कई हिस्सों में पहले से दरारें और गैप बढ़ने की बातें सामने आती रही हैं. ऐसे में लगातार मरम्मत के बावजूद लोगों के मन में सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है. एक यात्रियों ने कहा कि हर दिन पुल पार करते समय डर लगता है. पूरी संरचना पर लगातार निगरानी और स्थायी समाधान की जरूरत है.जाम हटाने में जुटा प्रशासन
लगातार लग रहे जाम को देखते हुए नवगछिया पुलिस अधीक्षक वैभव शर्मा, भागलपुर जिला प्रशासन व दोनों जिलों के पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार निगरानी कर रहे हैं. पुल के दोनों छोर पर पुलिस बल और दंडाधिकारी तैनात किये गये हैं, ताकि यातायात को नियंत्रित किया जा सके. जाह्नवी चौक से लेकर बेली ब्रिज तक पुलिसकर्मी दिन-रात ड्यूटी कर रहे हैं. लेकिन उनके लिए मूलभूत सुविधाओं का अभाव भी बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है.पुलिसकर्मियों और यात्रियों के लिए नहीं है पानी की व्यवस्था
स्थानीय लोगों का कहना है कि भीषण गर्मी में घंटों ड्यूटी कर रहे पुलिसकर्मियों के लिए न तो पर्याप्त छाया की व्यवस्था है और न ही पीने के पानी की. यही स्थिति जाम में फंसे यात्रियों की भी है, जिन्हें कई-कई घंटे पुल पर खड़े रहना पड़ता है.नाव परिचालन शुरू करने की जरूरत
पुल पर जाम में फंसे लोगों ने कहा कि जिला प्रशासन को नाव सेवा फिर से उपलब्ध कराने की जरूरत है. कहा कि अगर नाव सेवा चालू हो जायेगी, तो पुल पर दबाव कम होगा, जिससे जाम की समस्या भी खत्म हो जायेगी.रफ्तार कम करने के लिए लगा डिवाइडर
पुल पर वाहनों की रफ्तार कम करने के लिए यातायात पुलिस की ओर से डिवाइडर लगाया गया है. बताया गया कि वाहनों की रफ्तार अधिक होने से वन-वे परिचालन किसी प्रकार का हादसा नहीं हो, इसी को लेकर डिवाइडर लगाया गया.