Vikramshila Setu: भागलपुर के लोगों के लिए Vikramshila Setu के समानांतर पांटून ब्रिज बनने की खबर ने पिछले कुछ दिनों से बड़ी उम्मीद जगा दी थी. लेकिन अब इस योजना को लेकर एक महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है. फिलहाल पांटून ब्रिज के निर्माण पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है. राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि पहले इस परियोजना की फिजिबिलिटी जांच कराई जाएगी. विशेषज्ञों की रिपोर्ट आने के बाद ही तय होगा कि Vikramshila Setu के समानांतर पांटून ब्रिज बनाना तकनीकी और व्यावहारिक रूप से संभव है या नहीं.
यह जानकारी पथ निर्माण विभाग के मंत्री इंजीनियर कुमार शैलेंद्र ने भागलपुर में आयोजित एक विभागीय कार्यक्रम के दौरान दी. उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के समक्ष रखा गया है, लेकिन अभी तक केंद्र सरकार से निर्माण की औपचारिक स्वीकृति प्राप्त नहीं हुई है.
क्यों अटका है पांटून ब्रिज का फैसला
Vikramshila Setu भागलपुर और उत्तर बिहार के बीच सबसे महत्वपूर्ण सड़क संपर्क है. पिछले कई वर्षों से इस पुल पर भारी ट्रैफिक दबाव, जाम और मरम्मत कार्यों के कारण लोगों को लंबी परेशानी झेलनी पड़ रही है. ऐसे में समानांतर पांटून ब्रिज की संभावना को एक अस्थायी लेकिन प्रभावी समाधान के रूप में देखा जा रहा था.
हालांकि सरकार का कहना है कि किसी भी बड़े निर्माण कार्य से पहले यह जांचना जरूरी है कि संबंधित स्थान पर नदी की धारा, जलस्तर, मिट्टी की स्थिति, नौवहन गतिविधियां और अन्य तकनीकी पहलू पांटून ब्रिज के लिए उपयुक्त हैं या नहीं. यही कारण है कि पहले फिजिबिलिटी टेस्ट कराया जाएगा.
अगले सप्ताह पहुंचेगी विशेषज्ञों की टीम
मंत्री के अनुसार अगले सप्ताह दिल्ली और पटना से विशेषज्ञों की एक संयुक्त टीम भागलपुर पहुंचेगी. यह टीम संभावित स्थल का विस्तृत निरीक्षण करेगी और निर्माण की व्यवहारिकता का आकलन करेगी. जांच के दौरान नदी के प्रवाह, मौसमीय परिस्थितियों, तकनीकी चुनौतियों और यातायात की जरूरतों का अध्ययन किया जाएगा.
इसके बाद एक विस्तृत फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार की जाएगी. यही रिपोर्ट आगे की पूरी प्रक्रिया की आधारशिला होगी. यदि रिपोर्ट सकारात्मक आती है, तभी पांटून ब्रिज निर्माण की दिशा में अगला कदम उठाया जाएगा.
लंबाई को लेकर भी अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं
लोगों के बीच यह चर्चा भी थी कि प्रस्तावित पांटून ब्रिज कितनी लंबाई का होगा और किस स्थान से जोड़ा जाएगा. इस सवाल पर मंत्री ने साफ कहा कि अभी परियोजना को मंजूरी ही नहीं मिली है. इसलिए इसकी लंबाई, डिजाइन, निर्माण स्थल और अन्य तकनीकी विवरणों पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है.
उन्होंने कहा कि पहले विशेषज्ञों की रिपोर्ट आएगी. उसके बाद ही यह तय होगा कि पुल किस रूप में और कितनी लंबाई में बनाया जा सकता है.
भागलपुर और आसपास के लोगों के लिए क्यों अहम है यह योजना
Vikramshila Setu पर हर दिन हजारों वाहन गुजरते हैं. पुल पर जाम लगने से न केवल यात्रियों का समय बर्बाद होता है, बल्कि व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और कृषि परिवहन पर भी असर पड़ता है. विशेष रूप से भागलपुर, नवगछिया, कटिहार, पूर्णिया और उत्तर बिहार के अन्य जिलों के लोगों के लिए यह मार्ग जीवनरेखा माना जाता है.
यदि समानांतर पांटून ब्रिज बनता है, तो मरम्मत या रखरखाव के दौरान वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध हो सकता है. इससे भारी वाहनों और स्थानीय यातायात को राहत मिल सकती है. लेकिन फिलहाल लोगों को विशेषज्ञों की रिपोर्ट का इंतजार करना होगा.
Vikramshila Setu: अभी क्या है आगे की स्थिति
फिलहाल स्थिति यह है कि पांटून ब्रिज को लेकर केवल प्रस्ताव स्तर की प्रक्रिया चल रही है. केंद्र सरकार से अंतिम स्वीकृति मिलना बाकी है और उससे पहले फिजिबिलिटी जांच होगी. अगले सप्ताह विशेषज्ञों की टीम के निरीक्षण के बाद तैयार होने वाली रिपोर्ट ही तय करेगी कि Vikramshila Setu के समानांतर पांटून ब्रिज का सपना आगे बढ़ेगा या नहीं.
