Vikramshila Setu: भागलपुर और उत्तर बिहार के बीच रोजाना हजारों लोगों की आवाजाही का अहम रास्ता एक बार फिर बड़े बदलाव के दौर से गुजरने वाला है. विक्रमशिला सेतु के पुनर्स्थापन की तैयारी अब अंतिम चरण में पहुंच गयी है. सेतु को पुनर्स्थापन कार्य के लिए बैरिकेडिंग कर बंद किया जायेगा और इसके बाद क्षतिग्रस्त हिस्सों पर काम शुरू होगा.
काम शुरू होने से पहले सबसे महत्वपूर्ण कवायद होगी सेतु पर बने चार बेली ब्रिज को हटाना. इसके लिए 29 अगस्त से प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है. अधिकारियों के अनुसार एक बेली ब्रिज हटाने समेत पूरी प्रक्रिया में पांच से छह दिन तक का समय लग सकता है. इसके बाद सेतु के पुनर्स्थापन का काम आगे बढ़ाया जायेगा.
पहले हटेंगे बेली ब्रिज, फिर खुलेगा पुनर्स्थापन का रास्ता
विक्रमशिला सेतु के जिन हिस्सों पर फिलहाल बेली ब्रिज की मदद से यातायात को संभाला जा रहा है, उन्हीं स्थानों पर अब स्थायी स्टील ब्रिज तैयार करने की योजना है. इसलिए पुनर्स्थापन कार्य शुरू करने से पहले इन अस्थायी संरचनाओं को हटाना जरूरी है.
29 अगस्त से बेली ब्रिज हटाने का काम शुरू होते ही सेतु पर यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. पूरी प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बैरिकेडिंग की जायेगी और सेतु को बंद रखा जायेगा.
बीआरओ की टीम संभालेगी बेली ब्रिज हटाने का काम
बेली ब्रिज हटाने के लिए बीआरओ की पूरी लांचिंग टीम भागलपुर पहुंचेगी. अधिकारियों के अनुसार टीम निर्धारित तिथि से करीब तीन-चार दिन पहले ही यहां पहुंच जायेगी, ताकि मौके पर जरूरी तैयारियां पूरी की जा सकें.
बीआरओ की मेंटेनेंस टीम पहले से भागलपुर में मौजूद है. इससे बेली ब्रिज हटाने के काम के साथ तकनीकी और रखरखाव से जुड़ी तैयारियों को भी तेजी से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी.
कास्टिंग यार्ड में जमा हो रहे स्टील गर्डर
पुनर्स्थापन की तैयारी सिर्फ बेली ब्रिज हटाने तक सीमित नहीं है. स्थायी निर्माण के लिए जरूरी सामग्री भी साइट तक पहुंचायी जा रही है.
एसपी सिंगला के कास्टिंग यार्ड में स्टील गर्डर और कंक्रीट के डेक स्लैब स्ट्रक्चर बीम जमा किये जा रहे हैं. अगले दो-तीन दिनों में सभी स्टील गर्डर और डेक स्लैब स्ट्रक्चर बीम पहुंच जाने की उम्मीद है.
इससे यह संकेत मिल रहा है कि बेली ब्रिज हटते ही पुनर्स्थापन के काम को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी निर्माण सामग्री तैयार रखी जा रही है.
जहां बेली ब्रिज, वहीं बनेंगे स्टील ब्रिज
पुनर्स्थापन कार्य की सबसे अहम बात यह है कि वर्तमान में जिन जगहों पर बेली ब्रिज बनाये गये हैं, उन्हीं स्थानों पर अब स्टील ब्रिज तैयार किये जायेंगे.
यानी मौजूदा अस्थायी व्यवस्था को हटाकर उसी स्थान पर स्थायी और मजबूत संरचना तैयार करने की दिशा में काम होगा. इसके बाद सेतु के क्षतिग्रस्त हिस्सों को भी पुनर्स्थापित किया जायेगा.
सेतु बंद होने से भागलपुर की सड़कों पर बढ़ेगा दबाव
विक्रमशिला सेतु केवल भागलपुर शहर को नवगछिया से जोड़ने वाला पुल नहीं है. यह उत्तर बिहार की ओर आने-जाने वाले लोगों और मालवाहक वाहनों के लिए भी महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है.
ऐसे में सेतु के बंद होने पर वैकल्पिक मार्गों पर वाहनों का दबाव बढ़ना स्वाभाविक है. रोजाना काम, कारोबार, इलाज, पढ़ाई या अन्य जरूरी कामों से सेतु पार करने वाले लोगों को भी अपनी यात्रा की योजना बदलनी पड़ सकती है.
पुनर्स्थापन कार्य के दौरान प्रशासन के सामने यातायात को व्यवस्थित रखने और लोगों को वैकल्पिक रास्तों की जानकारी देने की बड़ी जिम्मेदारी होगी.
पांच-छह दिनों की कवायद के बाद शुरू होगा मुख्य काम
बेली ब्रिज हटाने की पूरी प्रक्रिया में पांच से छह दिन लगने का अनुमान है. इसके बाद क्षतिग्रस्त हिस्सों पर पुनर्स्थापन का मुख्य काम शुरू किया जायेगा.
फिलहाल निर्माण सामग्री जुटाने और बीआरओ की टीम को मौके पर लाने की तैयारी तेज है. अब लोगों की नजर इस बात पर रहेगी कि 29 अगस्त से शुरू होने वाली प्रक्रिया तय समय के अनुसार पूरी होती है या नहीं और इसके बाद स्थायी स्टील ब्रिज का काम कितनी तेजी से आगे बढ़ता है.
Vikramshila Setu: भागलपुर के लिए क्यों अहम है यह काम
विक्रमशिला सेतु पर लंबे समय से यातायात और संरचनात्मक मजबूती को लेकर चिंता बनी रही है. ऐसे में पुनर्स्थापन का काम केवल पुल की मरम्मत तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य में सुरक्षित और सुचारु आवागमन के लिए भी महत्वपूर्ण है.
लोगों के लिए फिलहाल परेशानी का दौर हो सकता है, लेकिन स्थायी पुनर्स्थापन पूरा होने के बाद सेतु की उपयोगिता और मजबूती बढ़ने की उम्मीद है. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि बेली ब्रिज हटने के बाद स्टील ब्रिज और पुनर्स्थापन का काम कितनी तेजी से पूरा होता है.
