bhagalpur news D शोध प्रस्तावों व दो नई तकनीकों की हुई समीक्षा

बिहार कृषि विश्वविद्यालय में दो दिवसीय 27 वीं शोध परिषद की बैठक का समापन गुरुवार को कुलपति डॉ डीआर सिंह की अध्यक्षता में हो गया.

बीएयू में दो दिवसीय 27वीं शोध परिषद की बैठक संपन्न

बिहार कृषि विश्वविद्यालय में दो दिवसीय 27 वीं शोध परिषद की बैठक का समापन गुरुवार को कुलपति डॉ डीआर सिंह की अध्यक्षता में हो गया. कुलपति ने समापन समारोह में वैज्ञानिकों को आश्वस्त किया कि विश्वविद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शोध करने के लिये हर तरह की सुविधा मिलेगी. कार्यक्रम की रुपरेखा निदेशक शोध डॉ ए के सिंह ने प्रस्तुत किया, जबकि उप निदेशक शोध ने इस कार्यक्रम में लगातार दो दिनों तक भागीदारी करने वाले सभी वैज्ञानिक, अधिष्ठाताओं, कर्मचारियों व किसानों का धन्यवाद ज्ञापित किया.

शोध परिषद की बैठक में कुल 44 शोध प्रस्तावों, 2 प्रभेद प्रस्तुतीकरण एवं 2 नई तकनीकों की गहन समीक्षा की गयी. दूसरे दिन प्राकृतिक संसाधन संरक्षण, फसल सुधार एवं सामाजिक विज्ञान के विषयों पर शोध प्रस्तावों की समीक्षा हुई.

कार्यक्रम के अंतिम चरण में धान एवं मक्का के प्रभेदों और खरपतवार नियंत्रण और चारा उत्पादन संबंधित प्रस्तावों पर विचार विमर्श हुआ. धान की एक किस्म बीआरआर 2108 के विमोचन के लिए डाॅ प्रकाश सिंह ने किया. खरीफ मक्का के लिए सबौर खरीफ मक्का किस्म के विमोचन का प्रस्ताव डाॅ एस एस मंडल द्वारा दिया गया. इस किस्म की महत्ता उपयोगिता को देखते हुए इसका विमोचन अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया तथा शोध परिषद द्वारा इस किस्म का विमोचन प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया. बताया गया कि यह खरीफ मौसम के लिए उपयुक्त तथा मध्यम अवधि 92 दिनों का है जो संकर प्रभेद की श्रेणी में आता है जिसकी उत्पादन क्षमता 72.4 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक होगा.

शोध परिषद की बैठक में डाॅ एस के गुप्ता द्वारा हाइड्रोपोनिक्स विधि से बिना मिट्टी के बगैर मक्का का पौष्टिक चारा उत्पादन तकनीक पर प्रस्तुतीकरण दिया गया. बताया गया कि यह तकनीक बाढ़ग्रस्त एवं सूखाग्रस्त क्षेत्रों में मवेशियों के लिए बिना मिट्टी के उत्तम क्वालिटी के चारा का कम समय में उत्पादन के लिए कारगर है. परिषद के सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से इस तकनीक को विमोचित करने की स्वीकृति दी.

डाॅ मंकेश कुमार को श्रेष्ठ वैज्ञानिक की उपाधि

शोध के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए पौधा प्रजनन विभाग के वैज्ञानिक डाॅ मंकेश कुमार को 2023-24 के लिए विश्ववद्यालय के श्रेष्ठ वैज्ञानिक की उपाधि से सम्मानित किया गया.

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By Prabhat Khabar News Desk

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bhagalpur news. प्रतिदिन कम से कम पांच घंटे व साप्ताहिक कार्यभार 40 घंटे से कम न हो - लोकभवन ने विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के लिए कार्यभार मानदंड सख्ती से लागू करने दिया निर्देश- लोकभवन ने पत्र में कहा, निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन करायेवरीय संवाददाता, भागलपुरपीजी व कॉलेज में प्रतिदिन कम से कम पांच घंटे तक कक्षाओं में उपस्थित रहना अनिवार्य है. साथ ही यह भी सुनिश्चित करना है कि साप्ताहिक कार्यभार 40 घंटे से कम न हो. इसे लेकर लोकभवन के विशेष कार्य अधिकारी न्यायिक कल्पना श्रीवास्तव ने टीएमबीयू सहित सूबे के अन्य विश्वविद्यालयों में पत्र भेजा है. पत्र में विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के लिए कार्यभार मानदंड सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है. विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार को लेकर सचिवालय ने विवि प्रशासन को सख्त रुख अपनाने के लिए कहा है. शिक्षकों के कार्यभार को लेकर जारी निर्देश में स्पष्ट कहा कि निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन करायी जाये.लोकभवन से जारी पत्र में कहा कि पूर्णकालिक कार्यरत सभी शिक्षकों को सेमेस्टर के दौरान प्रतिदिन कम से कम पांच घंटे तक कक्षाओं में उपस्थित रहना अनिवार्य है. साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि उनका साप्ताहिक कार्यभार 40 घंटे से कम न हो.शैक्षणिक वर्ष में कम से कम 30 सप्ताह लागू रहेगापत्र में स्पष्ट रूप से कहा कि न्यूनतम कार्यभार एक शैक्षणिक वर्ष में कम से कम 30 सप्ताह यानी 180 कार्य दिवसों तक लागू रहेगा. साप्ताहिक 40 घंटे के कार्यभार को छह कार्य दिवसों में समान रूप से विभाजित करने का निर्देश दिया है. कहा कि यूजीसी के प्रावधानों में भी कार्यभार से संबंधित इसी तरह के मानदंड निर्धारित हैं. जिन्हें कानूनी मान्यता प्राप्त है. उनका पालन अनिवार्य है. उन मानकों को सख्ती से लागू कर बेहतर शैक्षणिक परिणाम सुनिश्चित करें.लोकभवन को मिली शिक्षकों के गायब रहने की शिकायतलोकभवन को शिक्षकों के गायब रहने की शिकायत मिल रही है. अंदरखाने की मानें, तो कुछ छात्र संगठन व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कॉलेज व पीजी विभागों में निर्धारित समय से पहले ही गायब रहने की शिकायत लोकभवन से की है. इसे लेकर कुलाधिपति सख्त होते दिख रहे है. ऐसे में कॉलेजों व पीजी विभाग का औचक निरीक्षण भी किया जा सकता है.ऑनर्स विषय छोड़ सब्सिडियरी की नहीं होती है क्लासकॉलेज में ऑनर्स विषय छोड़ सब्सिडियरी विषय की क्लास नहीं होती है. एक दिन पहले छात्र राजद के कार्यकर्ताओं ने एक कॉलेज के प्राचार्य से वार्ता के दौरान कहा था कि एमजेसी (ऑनर्स) विषय की क्लास होती है, लेकिन एमआइसी (सब्सिडियरी) विषय की क्लास नहीं होती है. छात्र संगठन का आरोप था कि एईसी, वीएसी व एसीसी की भी क्लास भी नहीं होती है.लोकभवन के निर्देश का हो रहा पालन - शिक्षक संगठनशिक्षक संगठन भुस्टा के महासचिव प्रो जगधर मंडल ले कहा कि लोकभवन के निर्देश का पालन हो रहा है. यूजीसी के नियमानुसार कॉलेज व पीजी विभागों में पांच घंटे तक शिक्षकों रहते हैं. सारा कार्य करते हैं. यह कोई नई बात नहीं है. शिक्षक लोकभवन के साथ है.

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