टिल्हा कोठी स्थित रीजनल स्टडी सेंटर पर टीएमबीयू को रिसर्च करने की जरूरत है, क्याेंकि यहां रिसर्च करने वाले अधिकारी नहीं हैं. स्टडी सेंटर सिर्फ सेंटर सहायक, एक चतुर्थवर्गीय कर्मचारी व एक सफाई कर्मी के भरोसे चल रहा है. देखरेख की अभाव में सेंटर भी जर्जर स्थिति में है. जानकारी हो कि दो माह से सेंटर में निदेशक का पद खाली है. सेंटर में सालों से शोध कार्य बंद है. कोई नया प्रोजेक्ट के तहत रिसर्च का काम नहीं किया जा रहा है. कुल मिलाकर देखा जाये, तो रीजनल स्टडी सेंटर सिर्फ नाम का ही रह गया है. यहां से निकलने वाले जनरल भी बंद है. जबकि रीजनल स्टडी सेंटर खोलने का उद्देश्य था कि विवि के शिक्षक व शिक्षिका अलग-अलग विषयों पर शोध कार्य करे. इससे समाज को लाभ मिल सके. इससे पूर्व दो दशक पहले इसी सेंटर से कई महत्वपूर्ण शोध प्रोजेक्ट पर कार्य किये गये हैं. शोध से निकले निष्कर्ष ने सरकार को भी काम करने पर मजबूर कर दिया था. अबतक कुल 12 निदेशक सेंटर के बन चुके हैं. वहीं, विवि के एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने के शर्त पर बताया कि स्टडी सेंटर के निदेशक को लेकर फाइल वरीय अधिकारी के समक्ष बढ़ायी गयी है. उनका आदेश मिलते ही सेंटर में नया निदेशक बनाया जायेगा. सेंटर का कई हिस्सा हुआ जर्जर सेंटर का कई हिस्सा भी जर्जर हो चुका हैं. भवन के दीवार के प्लास्टर झड़ने लगा है. कमरा में लगा दरवाजा जवाब देने लगा है. ऐसे में सेंटर महज नाम का ही रह गया है. विवि प्रशासन भी सेंटर को लेकर सुस्त है. बताया जा रहा है कि सेंटर में कर्मचारी की कमी है. ऐसे में काम भी प्रभावित हो रहा है. नियमित कुलपति के नहीं रहने से सेंटर का नहीं हो रहा देखरेख विवि के अधिकारी ने कहा कि नियमित कुलपति के नहीं रहने से सेंटर का काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है. नया शोध प्रोजेक्ट पर भी काम नहीं हो रहा है. मुख्यालय में कुलपति के नहीं रहने के कारण सेंटर की समस्या को देखने वाला कोई नहीं है. सहायक व सफाई कर्मी के भरोसे सेंटर सेंटर सहायक, एक चतुर्थवर्गीय कर्मचारी व एक सफाई कर्मी के भरोसे चल रहा है. जबकि सेंटर में 11 पद है. टाइपिंग करने के लिए कर्मचारी नहीं है. कर्मचारी देने के लिए रजिस्ट्रार को पूर्व के निदेशक ने कई बार पत्र लिखा व मौखिक बात की, लेकिन पहल नहीं की गयी. बाढ़ से विस्थापित लोगों पर नहीं हो सका रिसर्च विवि की पूर्व कुलपति प्रो नीलिमा गुप्ता के कार्यकाल में बाढ़ से विस्थापित लोगों पर रिसर्च करने का प्रस्ताव स्टडी सेंटर को दिया गया था. उस दिशा में काम पूरा नहीं हो सका. इस बीच में कई निदेशक आये और चले गये. विस्थापित लोगों पर रिसर्च का काम पूरा नहीं किया जा सका. ऐसे में विवि प्रशासन पर सवाल उठने लगा है. प्रोजेक्ट बीच में ही लौटा विवि के अधिकारी ने बताया कि सेंटर के पूर्व निदेशक रहे प्रो एसएन पांडे के कार्यकाल में इसरो से एक प्रोजेक्ट सेंटर को मिला था. इसमें वातावरण में कितना सीओ टू है. इसे दो पार्ट बिहार व झारखंड में शोध कार्य किया जाना था, लेकिन एक ही पार्ट बिहार स्तर पर किया गया. समय अधिक बीत जाने की वजह से इसरो ने दूसरे पार्ट की राशि वापस ले ली. इसके बाद से सेंटर में शोध कार्य पूरी तरह ठप है.
bhagalpur news. स्टडी सेंटर का टीएमबीयू खुद करे रिसर्च, सालों से बंद है शोध कार्य
टिल्हा कोठी स्थित रीजनल स्टडी सेंटर पर टीएमबीयू को रिसर्च करने की जरूरत है, क्याेंकि यहां रिसर्च करने वाले अधिकारी नहीं हैं
