TMBU Bhagalpur News: तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) के प्रशासनिक गलियारों में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब विवि की वरीयतम डीन और पीजी गणित विभाग की प्रोफेसर डॉ. रंजना की नियुक्ति तिथि को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया. आरटीआई से मिली जानकारी और प्रोफेसर के दावों में नियुक्ति की तारीख को लेकर करीब 23 दिनों का अंतर सामने आया है. नियुक्ति तिथि में आए इस अंतर के कारण विश्वविद्यालय में उनकी वरिष्ठता (Seniority) और प्रभारी कुलपति की गैरमौजूदगी में कार्यवाहक वीसी की कमान संभालने की प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं.
RTI के जवाब में 30 नवंबर दर्ज, कॉलेज प्राचार्य ने विवि को भेजा पत्र
पूरा मामला तिलकामांझी निवासी राजीव रंजन सिंह द्वारा आरटीआई (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी के बाद उजागर हुआ. राजीव रंजन ने टीएनबी कॉलेज से प्रो. रंजना की नियुक्ति संबंधी आधिकारिक दस्तावेज मांगे थे. अगस्त महीने में टीएनबी कॉलेज के प्राचार्य प्रो. दीपो महतो की ओर से विश्वविद्यालय को उपलब्ध कराई गई सूचना में प्रो. रंजना की नियुक्ति तिथि 30 नवंबर 1996 दर्ज बताई गई. इसके साथ ही कॉलेज प्रशासन ने विश्वविद्यालय से अनुरोध किया है कि वर्तमान में पीजी गणित विभाग में पदस्थापित प्रो. रंजना की सेवा पुस्तिका (Service Book) उपलब्ध कराई जाए ताकि नियुक्ति तिथि में आवश्यक सुधार किया जा सके.
वरिष्ठता और कार्यवाहक कुलपति की जिम्मेदारी पर उठे सवाल
इस प्रशासनिक विवाद का सीधा असर विश्वविद्यालय के शीर्ष नेतृत्व पर पड़ रहा है. टीएमबीयू में सबसे वरिष्ठ डीन होने के नाते प्रभारी कुलपति प्रो. बी.एस. झा की अनुपस्थिति में प्रो. रंजना ही कार्यवाहक वीसी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालती हैं. अब यदि उनकी नियुक्ति तिथि 7 नवंबर के बजाय 30 नवंबर 1996 मानी जाती है, तो वरिष्ठता क्रम (Seniority List) प्रभावित हो सकती है. हालांकि, विश्वविद्यालय के अधिकारियों का मानना है कि अंतिम स्थिति संबंधित मूल अभिलेखों की गहन जांच और विवि के आधिकारिक निर्णय के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी.
'1996 बैच की योगदान तिथि 7 नवंबर ही, महिला होने के कारण बनाया जा रहा निशाना': प्रो. रंजना
उधर, इस विवाद पर प्रो. रंजना ने आक्रामक रुख अपनाते हुए आरटीआई में बताई गई तारीख को पूरी तरह से खारिज कर दिया है. उन्होंने जोर देकर कहा कि 1996 बैच के शत-प्रतिशत शिक्षकों की आधिकारिक योगदान तिथि 7 नवंबर 1996 ही है, जब सभी शिक्षकों ने रजिस्ट्रार कार्यालय में योगदान दिया था. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ शिक्षक एक सोची-समझी साजिश के तहत उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और परेशान करने का काम कर रहे हैं.
प्रो. रंजना ने सवाल उठाया कि उनके बैच के कई शिक्षकों ने 7 नवंबर के बाद अलग-अलग तारीखों पर योगदान दिया और आगे चलकर उच्च पदों पर आसीन भी हुए, लेकिन उन पर कभी कोई आपत्ति नहीं जताई गई. केवल महिला होने के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है. उन्होंने चेतावनी दी है कि इस प्रताड़ना के खिलाफ वे महिला आयोग का दरवाजा खटखटाने पर भी विचार कर रही हैं.
TMBU Bhagalpur News: विश्वविद्यालय प्रशासन के रुख पर टिकीं निगाहें
विश्वविद्यालय में वरिष्ठता को लेकर उठा यह विवाद अब केवल दो तारीखों का अंतर नहीं रहा, बल्कि यह प्रशासनिक खींचतान और जेंडर आधारित भेदभाव के आरोपों से घिर चुका है. अब देखना यह होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन सेवा पुस्तिका और रजिस्ट्रार कार्यालय के मूल दस्तावेजों की जांच के बाद इस मामले में क्या निर्णय लेता है.
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