तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) में पीएचडी सत्र 2024 और 2025 में नामांकन की प्रक्रिया शुरू होते ही बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जारी उस आदेश का कॉलेजों के शिक्षकों ने कड़ा विरोध किया है, जिसमें पीएचडी गाइड (सुपरवाइजर) के रूप में केवल पीजी विभागों, पीजी सेंटरों और पीजी की पढ़ाई कराने वाले कॉलेजों के शिक्षकों को ही शामिल करने की बात कही गई है.
'अधिसूचना वापस न ली तो करेंगे जोरदार आंदोलन'
अधिसूचना पर कड़ी आपत्ति जताते हुए विवि के सिंडिकेट सदस्य डॉ. निर्लेश कुमार ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों के साथ खुला भेदभाव कर रहा है. उन्होंने कहा कि बिहार पीएचडी ऑर्डिनेंस-रेगुलेशन 2026 में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि डिग्री कॉलेजों के शिक्षक पीएचडी नहीं करवा सकते. उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि विवि प्रशासन अविलंब इस त्रुटिपूर्ण पत्र में सुधार नहीं करता है, तो शिक्षक विश्वविद्यालय परिसर में उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे.
कोर्ट जाने की तैयारी, छपरा विवि का दिया हवाला
वहीं, सीनेट सदस्य डॉ. राजेश तिवारी ने कहा कि राजभवन से जारी रेगुलेशन के विपरीत विश्वविद्यालय ने अधिसूचना जारी की है. उन्होंने जयप्रकाश विश्वविद्यालय (छपरा) का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां सभी कॉलेजों के शिक्षकों को पीएचडी कराने का प्रावधान दिया गया है. डॉ. तिवारी ने स्पष्ट किया कि यदि टीएमबीयू प्रशासन इस फैसले को वापस नहीं लेता है, तो शिक्षक न्याय के लिए कोर्ट की शरण लेंगे. वहीं कई शिक्षकों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के इस रवैये को तानाशाही करार दिया है.
12 अगस्त तक मांगी गई पीएचडी की रिक्त सीटों का ब्योरा
दूसरी ओर, प्रभारी कुलपति प्रो. विमलेंदु शेखर झा के निर्देश पर रजिस्ट्रार प्रो. रामाशीष पूर्वे ने सभी पीजी विभागाध्यक्षों को 12 अगस्त तक रिक्त सीटों का सत्यापित ब्योरा जमा करने का आदेश दिया है. जारी निर्देश के अनुसार, सेवानिवृत्ति में 3 वर्ष या उससे कम समय शेष रहने वाले शिक्षकों को भी गाइड नहीं बनाया जाएगा. इसके साथ ही गलत जानकारी देने वाले विभागाध्यक्षों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की बात कही गई है.
