सुलतानगंज में शिक्षा व्यवस्था का हाल : कहीं टपकती छत के नीचे, तो कहीं जर्जर कमरे में पढ़ाई कर रहे बच्चे

Bhagalpur News : कहीं जर्जर कमरों में बैठकर पढ़ने को मजबूर बच्चे, तो कहीं नाट्य कला भवन और सामुदायिक भवन ही बन गए स्कूल. सुलतानगंज के कई सरकारी विद्यालय वर्षों से भवन और जमीन के अभाव में बदहाल स्थिति में चल रहे हैं. अब शिक्षा विभाग ने इन स्कूलों की सुध लेते हुए नए भवन और जमीन की प्रक्रिया तेज कर दी है.

सुलतानगंज, भागलपुर से शुभंकर की रिपोर्ट : भागलपुर के सुलतानगंज प्रखंड में भवनहीन और भूमिहीन सरकारी विद्यालयों की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है. कई स्कूलों में बच्चे असुरक्षित कमरों, सामुदायिक भवनों और अस्थायी जगहों पर पढ़ाई करने को मजबूर हैं. शिक्षा विभाग ने अब ऐसे विद्यालयों की सूची तैयार कर जिला कार्यालय को भेज दी है, ताकि जल्द नए भवन और जमीन उपलब्ध कराई जा सके.

जर्जर कमरों में पढ़ने को मजबूर बच्चे

मध्य विद्यालय हलकाराचक की स्थिति सबसे अधिक खराब बताई जा रही है. विद्यालय में केवल दो कमरे हैं, जिनमें एक पूरी तरह जर्जर हो चुका है जबकि दूसरा किसी तरह उपयोग में लाया जा रहा है. करीब 110 बच्चों के नामांकन के बावजूद पर्याप्त कमरों की व्यवस्था नहीं है. विद्यालय के पास 12 डिसमिल जमीन उपलब्ध है, लेकिन उस पर अतिक्रमण की समस्या बनी हुई है. शिक्षा विभाग ने यहां कम से कम तीन नए कमरों की जरूरत बताई है.

नाट्यकला भवन में चल रही पढ़ाई

प्राथमिक विद्यालय करहरिया कन्या का संचालन फिलहाल नाट्य कला भवन में किया जा रहा है. बच्चे अस्थायी व्यवस्था में पढ़ाई करने को विवश हैं. हालांकि विद्यालय के पास नौ डिसमिल जमीन उपलब्ध है और उसका एनओसी भी मिल चुका है. जमीन अतिक्रमण मुक्त होने के बावजूद अब तक भवन निर्माण नहीं हो पाने से बच्चों और शिक्षकों को परेशानी झेलनी पड़ रही है.

बिना जमीन के चल रहा स्कूल

प्राथमिक विद्यालय शिवनंदनपुर मुसहरी के पास अपनी जमीन तक नहीं है. इसी कारण इस विद्यालय को दूसरे मध्य विद्यालय में शिफ्ट कर चलाया जा रहा है. यहां 84 बच्चों का नामांकन है. अब शिक्षा विभाग ने अंचल प्रशासन से विद्यालय के लिए जमीन चिन्हित करने की मांग की है, ताकि स्थायी भवन का निर्माण कराया जा सके.

सामुदायिक भवन में पढ़ रहे 220 छात्र

प्राथमिक विद्यालय यादवटोला मिरहट्टी भी वर्षों से भवन के इंतजार में है. यहां करीब 220 बच्चों की पढ़ाई सामुदायिक भवन में कराई जा रही है. विद्यालय के पास 21 डिसमिल जमीन उपलब्ध है और एनओसी भी प्राप्त है. विभागीय अधिकारियों का मानना है कि भवन निर्माण शुरू होने के बाद यहां शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव आएगा.

विभाग ने तेज की कार्रवाई

बीआरसी लेखापाल पवन कुमार ने बताया कि भवनहीन और भूमिहीन विद्यालयों की सूची जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, प्राथमिक शिक्षा एवं सर्व शिक्षा अभियान को भेज दी गई है. वहीं प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ने अंचल अधिकारी को पत्र भेजकर भूमिहीन विद्यालयों के लिए जमीन चिन्हित करने का अनुरोध किया है.

अंचल प्रशासन ने दिया कार्रवाई का भरोसा

अंचल अधिकारी अनुज कुमार झा ने कहा कि मामले को गंभीरता से लिया गया है और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी. विभागीय स्तर पर उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द प्रक्रिया पूरी होने पर स्कूलों को स्थायी भवन मिल सकेगा.

बेहतर स्कूल की मांग तेज

स्थानीय अभिभावकों और ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले गरीब बच्चों को भी सुरक्षित भवन और बेहतर शैक्षणिक माहौल मिलना चाहिए. लोगों का मानना है कि यदि भवन निर्माण और जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया जल्द पूरी हो जाती है तो यह सिर्फ भवन निर्माण नहीं, बल्कि ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था को नई मजबूती देने वाला बड़ा कदम साबित होगा.

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लेखक के बारे में

Author: AMIT KUMAR SINH

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