bhagalpur news. अतिक्रमण से 60 से घटकर 25 फीट हो गयी संतनगर की मुख्य सड़क

वार्ड 28 अंतर्गत संतनगर में सबसे बड़ी समस्या अतिक्रमण व पेयजल संकट है. यहां अतिक्रमण के कारण 60 फीट चौड़ी सड़क घटकर 25 फीट रह गयी है

वार्ड 28 अंतर्गत संतनगर में सबसे बड़ी समस्या अतिक्रमण व पेयजल संकट है. यहां अतिक्रमण के कारण 60 फीट चौड़ी सड़क घटकर 25 फीट रह गयी है. ऐसे में यहां की सूरत खराब हो गयी और कुछेक लोगों के अतिक्रमण के कारण अधिकतर लोगों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. इतना ही नहीं समीप स्थित वाटर वर्क्स से शहर के मुख्य हिस्से समेत 12 से अधिक वार्डों के लाखों लोगों को जलापूर्ति होती है. इसके विपरीत यहां के लोगों को पेयजल सकट झेलना पड़ रहा है. इसके अलावा भी कई समस्याएं हैं, जिससे यहां के लोगों को रोजाना दो-चार होना पड़ रहा है. उक्त बातें रविवार को संतनगर के प्रबुद्धजनों ने प्रभात खबर आपके द्वार में बतायी. एक-एक समस्या पर खुल कर अपनी बातें रखी. अतिक्रमित मार्ग से ही रोजाना नगर आयुक्त है आना-जाना

स्थानीय लोगों ने कहा कि जिलाधिकारी से मिलकर जब यहां की समस्या से अवगत कराया गया, तो बातों को गंभीरता से नहीं लिया गया. इसके अलावा नगर निगम प्रशासन को भी कई बार समस्याओं से अवगत कराया गया. सबसे बड़ी विडंबना है कि इसी अतिक्रमित मार्ग से होकर नगर आयुक्त का रोजाना आना-जाना होता है. दरअसल नगर आयुक्त का आवास वाटर वर्क्स परिसर में ही है. बताया कि अतिक्रमण हटाने को लेकर अंचल से लेकर नगर निगम प्रशासन तक कई बार मापी करा चुके हैं. अतिक्रमण हटाने के लिए कई बार नोटिस दिया गया, अतिक्रमण हटाने के लिए बुल्डोजर भी आया, लेकिन वापस लौट गया. ऐसे में यहां के लोगों को निराशा हाथ लगी.

गलियों में जलता है इक्का-दुक्का वेपर लाइट, मुख्य मार्ग पर सब खराब

गलियों में इक्का-दुक्का वेपर तो दिन में भी जलता है, लेकिन अधिकतर वेपर खराब पड़े हैं. निगरानी के अभाव में मुख्य मार्ग पर वेपर खराब पड़े हैं. इससे अंधेरा छाया रहता है. चोरों का भय बना रहता है. पुलिस गश्ती भी कभी-कभार इस क्षेत्र में आती है.

पुराने गंगा घाट व हनुमान घाट खतरनाक

संतनगर से सटे गंगा तट हनुमान घाट सिल्क सिटी का सबसे पुराना घाट है. इसे देखकर ही कोई बता सकता है कि ऐतिहासिक है. देखरेख के अभाव में जर्जर होता गया और 2019 में घाट समीप दीवार गिर गयी और तीन लोगों की मौत हो गयी. इससे पहले भी एक व्यक्ति की मौत हुई थी. सबसे खतरनाक घाट यहां का ही है. मलवा हटा दिया गया, लेकिन सड़क व घाट को व्यवस्थित नहीं किया गया. यहां से पहले सैकड़ों कांवरियां सावन में गंगा जल भरते थे. घाट खतरनाक होने के कारण कांवरियों की संख्या अचानक घट गयी.

1980 में डेवलप हुआ संतनगर

हनुमान घाट व वाटर वर्क्स अंग्रेज जमाने का है. वाटर वर्क्स परिसर में स्वामी विवेकानंद कुछ दिनों के लिए ठहरे और गंगा के किनारे ध्यान किया. इसके विपरीत संतनगर के रूप में आधुनिक मोहल्ला 1980 में डेवलप हुआ. यहां सबसे पहले संत नरेश मंडल गंगा पार से आकर बस गये. फिर संतनगर के रूप में क्षेत्र डेवलप हुआ. रमानंदी मत से जुड़े थे. फिर कोई गृहस्थ संत, कोई मजदूर संत और फिर ब्रह्मचारी संत भी इस नगर में आकर अपनी कुटिया बनाकर रहने लगे. धीरे-धीरे 600 परिवारों का मोहल्ला बस गया. अभी यहां झारखंड के गोड्डा, साहेबगंज, पूर्णिया, मधेपुरा, किशनगंज, बेगुसराय, बांका, मुंगेर आदि के लोगों ने अपना घर बनवाया है. समीप में रिफ्यूजी कॉलोनी है. यहां बंगाली समाज के लोग अलग-अलग देश से आकर बसे हैं. इनलोगों का पेशा मछली मारना व अन्य घरेलू कार्य करना है.

लोगों ने बयां किया दर्द

संतनगर में कोई सुविधा नहीं है. पढ़ाई के लिए कोई सरकारी स्कूल ���हीं है. पूर्व में सार्वजनिक आचरण विद्यालय को कोई सरकारी मदद नहीं मिली, तो बंद हो गया.

आमोद कुमार मिश्र

संत नगर में सुरक्षा का घोर अभाव है. थाना व पुलिस सुरक्षा से बहुत दूर है. यह क्षेत्र पूरी तरह से उपेक्षित है. चोर भी इस क्षेत्र में शरण लेने पहुंचते हैं.

उमेश मंडल

गली में सड़क पर कुछ लोग गाय बांधते हैं. इससे हमेशा दुर्घटना का डर बना रहता है. चारों तरफ अतिक्रमण है. कोई सुविधा नहीं है.

उपेंद्र प्रसाद सिंह

मुख्य मार्ग पर वेपर खराब है. गली में भी सभी वेपर ठीक नहीं है. संतनगर में लोग आंदोलन की बजाय सहनशीलता पर जोर देते हैं.

अनिरुद्ध यादव

संतनगर के बगल में वाटर वर्क्स है. यहां से 12 वार्डों समेत मुख्य शहर को जलापूर्ति हो रही है, लेकिन यहां के लोगों के बीच पेयजल संकट है.

सुजीत कुमार मंडल

मुख्य मार्ग से लेकर हरेक गली में अतिक्रमण है. यहां के लोग कई बार आवाज उठा चुके हैं. अतिक्रमणकारी का मन बढ़ता जा रहा है.

भूपनारायण मंडल

सड़क संकरी है. नाला का निर्माण नहीं हो पा रहा है. बारिश के दिनों में जलजमाव की समस्या होती है. सालोंभर मच्छर का प्रकोप होता है.

मालती देवी

इस क्षेत्र में सफाईकर्मी कभी-कभार आते हैं. नगर निगम की ओर से कहा जाता है कि रोटेशन से सफाई होती है, लेकिन अब तक कभी दिखा नहीं.

रामानंद साह

संतनगर में कहीं भी कूड़ादान नहीं है. हर घर कूड़ा उठाव की भी व्यवस्था नहीं है. पास में ही नगर आयुक्त रहते हैं, लेकिन कभी यहां की समस्या नहीं देखा.

विनोद कुमार राम

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Published by: Atul kumar

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